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भारत के ‘डोसा किंग’ राजगोपालन को उम्रकैद, दो पत्नियां होने के बाद भी तीसरी शादी की चाहत ने पहुंचा दिया जेल

Posted On: 2 Apr, 2019 Hindi News में

Pratima Jaiswal

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कहते हैं समय सबसे बड़ा बलवान है, जो आपको कब अर्श से फर्श और फर्श से अर्श पर खड़ा कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में यहां एक बात ध्यान रखने वाली होती है कि जब आप लगातार असफल हो रहे हों, तो कभी भी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए और जब कामयाबी आपके कदम चूम रही हो तो कभी भी आपको अंहकार में नहीं आना चाहिए। भारत के ‘डोसा किंग’ के नाम से मशहूर हुए राजगोपालन के सिर पर कामयाबी का नशा इस कदर चढ़ा कि सबकुछ हासिल करने के जुनून में सलाखों के पीछे पहुंच गए। राजगोपालन को 18 साल पहले अक्तूबर 2001 में प्रिंस संतकुमार नामक युवक का अपहरण करने और बाद में हत्या करने का दोषी पाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण और हत्या के एक मामले में नामी रेस्टोरेंट चेन सर्वणा भवन के मालिक पी राजगोपालन की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।

 

 

क्या है पूरा मामला
राजगोपालन ज्योतिषि की बातों को बेहद यकीन करते थे। ज्योतिषी की ही सलाह पर जीवाज्योति से शादी करने की ठानी थी। हालांकि, उस समय उनकी दो पत्नियां थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शादी के कुछ महीने बाद संतकुमार और जीवाज्योति एक ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए राजगोपाल और जीवाज्योति के अंकल के पास ऋण लेने गए थे। लेकिन राजगोपाल के मन में जीवाज्योति को लेकर भावनाएं पैदा हो गईं। वह उसे रोज़ाना कॉल करने लगे और तोहफ़े में महंगे आभूषण भेजना शुरू कर दिया। 28 सितंबर 2001 को आधी रात को राजगोपाल जीवाज्योति और संतकुमार के घर आए और उन्हें चेतावनी दी कि दो दिन के भीतर अपना रिश्ता तोड़ लें।

 

 

 

संतकुमार और उनकी पत्नी ने वहाँ से भागने की कोशिश की, लेकिन राजगोपालन ने पाँच कर्मचारियों ने उन्हें जबरन एक कार में बिठा दिया और केके नगर स्थित एक गोदाम में ले गए। वहाँ राजगोपालन और उनके साथियों ने संतकुमार की पिटाई की। वे किसी तरह से 12 अक्तूबर को वहाँ से भाग निकले और शहर पुलिस कमिश्नर के दफ़्तर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। छह दिन बाद राजगोपालन के कर्मचारियों ने उन्हें फिर अग़वा कर लिया और उन्हें ज़बरदस्ती अलग कर दिया। बाद में संतकुमार का शव काडाइकोनाल के टाइगर चोला के जंगलों से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत गला दबाकर की गई थी।राजगोपालन ने 23 नवंबर को आत्मसमर्पण किया, लेकिन अगले साल 15 जुलाई 2003 को उन्हें जमानत मिल गई।

 

 

1981 में ज्योतिषि की सलाह पर शुरू किया था बिजनेस
राजगोपाल ने 1981 में केके नगर में अपने पहला रेस्टोरेंट खोला। इससे पहले उनकी किराने की दुकान थी और एक ज्योतिषी के कहने पर ही उन्होंने रेस्टोरेंट के कारोबार में उतरने का फैसला किया था। ज्योतिषी ने उन्हें सलाह दी थी कि उन्हें ऐसा काम करना चाहिए, जिसमें आग शामिल हो। राजगोपाल के संस्मरण पर आधारित किताब के मुताबिक, “मुझे ये सलाह दी गई कि मुझे सस्ते मसालों का इस्तेमाल करना चाहिए और स्टाफ को जितना कम हो सके, उतना वेतन देना चाहिए। मुझे उनकी सलाह बिल्कुल पसंद नहीं आई और इस सलाहकार को मैंने निकाल दिया।”
राजगोपाल ने नारियल तेल और उच्च गुणवत्ता के मसालों का इस्तेमाल किया और नतीजा ये हुआ कि एक ही महीने में उन्हें 10 हजार रुपये का घाटा हो गया। घाटे की वजह ये थी कि उनके मेन्यू कार्ड में कोई भी चीज एक रुपये से अधिक कीमत की नहीं थी। इतनी सस्ती दर में लजीज खाना होने की वजह से बिजनेस चल निकला और राजगोपाल करोड़पति बन गए लेकिन उनके पागलपन ने उन्हें जेल के पीछे पहुंचा दिया।…Next 

 

 

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