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नरेश गोयल ने मां के जेवर बेचकर 10 हजार से की थी जेट एयरवेज की शुरुआत, ट्रैवल एजेंसी के नाम पर मजाक उड़ाते थे लोग

Posted On: 19 Apr, 2019 Hindi News में

Pratima Jaiswal

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जेट एयरवेज फिलहाल आसमान में नहीं, जमीन में ही दिखाई देंगे।8000 करोड़ रुपये से अधिक के बोझ से जेट के सभी विमान पर जमीन पर ही रहेंगे। 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड जारी करने से इनकार के बाद कंपनी ने परिचालन को अस्थायी रूप से अस्थगित कर दिया है। ऐसे में जेट एयरवेज के कर्मचारियों के लिए यह खबर किसी त्रासदी से कम नहीं है. अब देखना यह है कि क्या कभी जेट फिर से आसमान से बातें कर पाएगा, या फिर किंगफिशर की तरह जेट भी एक इतिहास बनकर रह जाएगा। चलिए, जानते हैं कैसे हुई थी जेट एयरवेज की शुरुआत।

 

 

मां के जेवर बेचकर 10 हजार रुपए से शुरू की ट्रैवल एजेंसी
जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने बेहद कठिन परिस्थिति में अपनी मां के जेवर बेचकर ट्रैवल एजेंसी शुरू की थी। नरेश गोयल ने 1967 में अपनी मां के एक चाचा की एजेंसी में कैशियर के रूप में काम शुरू किया था। तब उन्हें 300 रुपए सैलरी मिलती थी. यहां काम करते हुए रॉयल जॉर्डन एयरलाइंस जैसे कई बड़ी कंपनियों में काम करने का मौका मिला। ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने अपनी मां से बात की। मां ने अपने जेवर देकर कहा, इन्हें बेच दो। जेवर बेचने से उन्हें करीब 15 हजार रुपए मिले। उन्होंने 10 हजार रुपए से जेट एयर शुरू की और इस तरह 1974 को उन्होंने अपनी ट्रैवल एजेंसी शुरू की और उसका नाम जेट एयरवेज रखा।

 

 

ट्रैवल एजेंसी के नाम पर दोस्त उड़ाते थे मजाक
इस ट्रैवल एजेंसी का नाम जेट एयरवेज था, इस वजह से जब वह पेपर टिकट लेने एयरलाइन ऑफिस में जाया करते, तो वहां लोग उनका यह कहकर मजाक उड़ाते कि अपनी ट्रैवल एजेंसी का नाम एयरलाइन कंपनी जैसी रखी है। तब गोयल कहा करते कि एक दिन वह खुद की एयरलाइन कंपनी भी जरूर खोलेंगे।

 

1993 में जेट एयरवेज ने भरी पहली उड़ान
साल 1991 के बाद जेट एयरवेज के लिए रास्ता खुलना शुरू हुआ. जब भारत सरकार ने ओपन स्काई पॉलिसी को हरी झंडी दी और नरेश गोयल ने इस मौके का फायदा उठाया और डोमेस्टिक ऑपरेशन के लिए 1993 में जेट एयरवेज की शुरुआत की। कंपनी लगातार अपने काम को बढ़ाती रही और एक वक्त पर जब कंपनी अपने शीर्ष पर थी, तब नरेश गोयल देश के 20 सबसे अमीर शख्सियत में शुमार हुआ करते थे।

 

 

एयर सहारा की खरीद से शुरू हुआ संकट
जेट को विदेशों के लिए उड़ाने भरने वाली एकमात्र कंपनी बनाने के लिए गोयल ने 2007 में एयर सहारा को 1,450 करोड़ रुपये में खरीद लिया। गोयल ने कंपनी को जेटलाइट नाम दिया था। यही वह बेहद कीमती डील थी जिससे जेट कभी उबर नहीं पाई। आखिरकार कंपनी 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई। तब से कंपनी को वित्तीय मुश्किलों से सही मायने में कभी छुटकारा नहीं मिल पाया।

 

नरेश गोयल का इस्तीफा
नरेश गोयल ने 25 मार्च को जेट के चेयरमैन और बोर्ड की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही, पत्नी अनिता गोयल ने भी बोर्ड की सदस्यता छोड़ दी थी। जेट के 51% शेयर पहले की तरह गोयल के पास हैं और 24% हिस्सेदारी पार्टनर एतिहाद एयरवेज के पास। नरेश गोयल ने चेयरमैन और बोर्ड मेंबर का पद छोड़ने के बाद अपना 31.2 प्रतिशत शेयर बेचने का ऐलान किया था और कहा था कि वह बाकी बची हिस्सेदारी भी बेच देंगे।…Next

 

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