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मनमोहन सिंह ने माना मजबूर हूं मैं

Posted On: 17 Feb, 2011 Hindi News में

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जहां एक ओर पिछला साल घोटालों के लिए मशहूर रहा वहीं लगता है यह साल अब बचाव के लिए जाना जाएगा. पिछले साल कॉमनवेल्थ से लेकर 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले तक देश की मटिया मेट हुई. इन सब घोटालों में नेताओं से लेकर प्रधानमंत्री तक की खूब किरकिरी हुई. और जब बात पीएमओ में घोटाले तक पहुंची तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने एक ऐसा वक्तव्य दिया जिसे सुन देश के हर नागरिक का अब सरकार से भरोसा उठ चुका है.


ManmohanSingh2_0गठबंधन के चलते भ्रष्टाचार पर खुद को मजबूर करार देते हुए उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सियासत के चलते ‘कुछ समझौते’ करने पड़े. भ्रष्टाचार और शासन के मोर्चे पर गड़बड़ियां व असफलता स्वीकार करने के साथ यह भी माना कि उनसे कुछ गलतियां हुई हैं, लेकिन वह उतने बड़े दोषी भी नहीं, जितना प्रचारित किया जा रहा है. घोटालों, भ्रष्टाचार, महंगाई समेत तमाम जटिल सवालों पर उलझे प्रधानमंत्री सिर्फ एक ही मुद्दे पर दृढ़ दिखाई पड़े कि वह अपनी पारी बीच में नहीं छोड़ेंगे.


महंगाई दर बढ़ने के पीछे भी तो अर्थशास्त्र के विद्वान मनमोहन जी ने तर्क दिया कि विकास की दर बढ़ने के साथ महंगाई दर भी तो कुछ बढ़ेगी ही. और मनमोहन सिंह की अपनी सरकार को बचाने के बेढंगी दलीलें यहीं नहीं रुकीं. 2 जी घोटाले में हुए नुकसान की विचित्र तुलना खाद्य और किरोसिन तेल में दी जाने वाली सब्सिडी से कर उन्होंने न सिर्फ सबको चौंका दिया, बल्कि विपक्ष को एक हथियार भी थमा दिया. उन्होंने तत्कालीन पहले आओ, पहले पाओ नीति का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह तो कोई यह भी कह सकता है कि 60 हजार करोड़ की खाद्य सब्सिडी और 22 हजार करोड़ रुपये की पेट्रोलियम सब्सिडी से भी देश को नुकसान होता है. इसी तरह विपक्ष खास तौर से भाजपा पर उन्होंने शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाने की तोहमत तो मढ़ी, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन के संकेत भी दे दिए.


बात साफ है मनमोहन सिंह जो पहले हमेशा इसलिए चर्चा में रहते थे क्यूंकि वह कुछ बोलते नहीं थे, वह अब शायद अपनी बेबाक और सरकार बचाने के लिए जो टिप्पणी देंगे उसकी वजह से चर्चा में रहेंगे. मनमोहन सिंह ने इस बार जो बयान दिया है उससे साफ हो गया है कि यूपीए सरकार में जबरदस्त धांधलेबाजी चल रही है और सरकार चलाने की मजबूरी में सभी अनैतिक कामों को मंजूरी मिल रही है. गद्दी पर काबिज रहने के लिए यूपीए साम, दाम, दंड, भेद चारों नीतियां अपना रही है और ऐसे में नुकसान हो रहा है देश का और यह नुकसान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.

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