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राष्ट्रपति चुनाव 2012: क्या कहता है आंकड़ों का खेल

Posted On: 8 Jul, 2012 Hindi News में

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Presidential election 2012

राजनीति की बिसात पर अकसर हरेक मोहरा बहुत अहम होता है और जब बात सबसे बड़ी बाजी की हो तो यह मोहरे ही अकसर जीत और हार का कारण बनते हैं. चाहे केंद्र सरकार की बात हो या राज्य सरकार की, देश में बहुमत के आंकड़े का खेल हमेशा बहुत अहम रहता है.


Presidential election 2012

अब एक बार फिर देश की राजनीति में आंकड़ों का खेल शुरू हो चुका है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए इस समय देश में दो प्रमुख नाम सामने आ चुके हैं. प्रणब मुखर्जी और पी ए संगमा दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस और उसके घटक दलों का सहयोग प्राप्त है तो वहीं पी ए संगमा के पास एनडीए का समर्थन है.


राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए राजनीतिक गठजोड़ लगातार जारी है. देश के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने तो अपने हालिया बयान में यह भी कह डाला कि  राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी को 70 फीसद से ज्यादा मत मिलेंगे. जहां कांग्रेस प्रणब दा की जीत का ढोल बजाने से पीछे नहीं हट रही वही एनडीए को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें और क्या ना करें.


2012 Indian President Elections

राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल वोट 1098882 लाख हैं. जीतने वाले उम्मीदवार को 549442 लाख वोट हासिल करने होंगे. ममता के समर्थन को हटाकर यूपीए की ओर से प्रणब मुखर्जी को 36.67 फीसद वोट मिलने की उम्मीद है. वहीं सपा व बीएसपी की ओर से प्रणब को 10.3 फीसद वोट मिलेंगे. जदयू व शिव सेना के 5.5 फीसद मत तथा सीपीआईएम व फॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से 3.7 फीसद वोट मिलने की उम्मीद है. इस प्रकार प्रणब मुखर्जी को कुल 56.17 फीसद वोट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.


दूसरी ओर प्रणब को इस चुनाव में कड़ी टक्कर देने वाले पीए संगमा को भाजपा की ओर से 21.2 फीसद वोट मिल सकते हैं. वहीं शिरोमणि अकाली दल की ओर से 1.1 फीसद व एआईएडीएमके का 3.3 फीसद वोट का समर्थन और बीजेडी की ओर से 2.8 फीसद वोट प्राप्त हो सकते हैं. संगमा को 31.7 फीसद कुल वोट मिल सकते हैं.


लेकिन इन आंकड़ों से साफ है कि अभी भी यह कह पाना की प्रणब दा ही राष्ट्रपति बनेंगे, सही नही होगा. जीत का पलड़ा किस ओर झुक जाए कोई नहीं कह सकता.


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