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Surgical Strike 2 : भारतीय वायुसेना के विमान मिराज 2000 की खास बातें, जिससे POK में आंतकी ठिकानों पर किया हमला

Posted On: 26 Feb, 2019 Hindi News में

Pratima Jaiswal

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पुलवामा अटैक का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने पाक कब्जे वाले कश्मीर पर आंतकी ठिकानों पर हमला कर दिया। इस कार्रवाई को सर्जिकल स्ट्राइक-2 का नाम दिया जा रहा है। आज तड़के वायुसेना के मिराज विमानों ने PoK के बालाकोट, चकोटी और मुजफ्फराबाद में जबर्दस्त बमबारी कर आतंकियों के ठिकाने तबाह किए। इस हमले में कितने आतंकी मारे गए हैं, अभी इसकी जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि मारे गए आतंकियों की संख्या 200 से 300 हो सकती है।

 

 

ऐसे की कई जवाबी कार्रवाई
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार भारतीय वायुसेना के करीब 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमान आज तड़के करीब साढ़े तीन बजे पाक के कब्जे वाले कश्मीर में घुसे। इन विमानों ने बालाकोट और चकोटी में एक हजार किलो के बम गिराए। इस हमले में जैश के आतंकी कैंपों को निशाना बनाया गया। हमले के बाद विमान भारतीय सीमा में सुरक्षित लौट आए।

 

 

फाइटर प्लेन मिराज 2000 की खास बातें
मिराज-2000 विमान फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया है। यह वही कंपनी है, जिसने राफेल को बनाया है जिसे लेकर भारतीय राजनीति आज भी गर्माई हुई है। मिराज-2000 चौथी जेनरेशन का मल्टीरोल, सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है। इसकी पहली उड़ान साल 1970 में आयोजित की गई थी। यह फाइटर प्लेन अभी लगभग नौ देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।
इसमें समय-समय पर अपडेशन का काम भी किया जाता रहा है। साल 2009 तक लगभग 600 से अधिक मिराज-2000 दुनिया भर में सेवारत हैं
भारतीय वायु सेना द्वारा संचालित लगभग 51 मिराज 2000 विमानों के एक बेड़े को उन्नत करने के लिए फ्रांस से 1।9 बिलियन डालर का समझौता किया गया है। जून 2011 में यह घोषणा की गई कि सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) ने भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 के उन्नयन पर विचार करेगी। जिसके बाद यह समझौता किया गया था। 29 जून 1985 को नंबर 7 स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी के साथ भारतीय वायु सेना इस प्रकार का पहला विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज 2000 विमान थे। शुरूआत में इस विमान में स्नेक्मा एम 53-5 इंजन थे जिसे बाद में एम 53 पी-2 इंजन से बदल दिया गया।

 

 

लेजर गाइडेड बम को गिराने में सक्षम
मिराज 2000 में परिवर्तित होने वाला दूसरा स्क्वाड्रन नंबर 1 स्क्वाड्रन था। जिसे द टाइगर्स के नाम से जाना जाता है। इसे 1986 में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। मिराज 2000 में उन्नत एवियोनिक्स, आरडीवाई रडार और नए सेंसर और कंट्रोल सिस्टम का उपयोग करके नए कई निशानों को एक साथ साधना, हवा से जमीन और हवा से हवा में भी मार करने में माहिर है। यह पारंपरिक और लेजर गाइडेड बम को भी गिराने में सक्षम है।

 

2000 हथियारों को ले जाने में सक्षम
मिराज 2000 में हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्डपॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया गया है। सिंगल-सीट संस्करण भी दो आंतरिक हैवी फायरिंग करने वाली 30 मिमी बंदूखों से लैस है। हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में MICA मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बैट मिसाइलें शामिल है। इसके अलावा भी यह कई प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है।…Next

 

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