blogid : 23855 postid : 1345492

दम तोड़ती इंसानियत

Posted On: 10 Aug, 2017 Others में

IndianJust another Jagranjunction Blogs weblog

NirajKumar

258 Posts

3 Comments

एक मनुष्य अगर दूसरे मनुष्य की सहायता न करे, तो आखिर कौन मदद करेगा, तभी तो इंसानियत को पहचाना जा सकता है, लेकिन आज मनुष्य की सोच का बदलाव देखते ही बनता है। एक मनुष्य की सोच किस स्तर तक गिरती जा रही है कि लोग छोटी-छोटी बातों पर ही अपना संतुलन खोते जा रहे हैं। जिस तरह से आज के समय में घटनाएं घटित हो रही हैं, उससे तनिक भी नहीं लगता कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। क्योंकि उसकी हरकतें तो बिल्कुल असामाजिक रहती हैं, तो हम यह कैसे कह सकते हैं कि मनुष्य विकास के द्वार पर खड़ा है।


Accident


एक मनुष्य की प्रकृति ऐसी होनी चाहिए कि वह दूसरे मनुष्य की सहायता के लिए तत्पर रहे, इसीलिए कहा भी जाता है कि वही मनुष्य है, जो मनुष्य के लिए मरे, मनुष्य उसके सुख-दुख में काम आए, तभी हम ऐसे मनुष्य को इंसान की श्रेणी में रख सकते हैं। मगर मनुष्य जानवर से भी ख़राब व्यवहार अपने भाइयों के साथ करता है। आज अगर सड़क पर कोई भी घायल व्यक्ति गिरा पड़ा है, तो उसको लोग उठाना सही नहीं समझते और अंततः वह व्यक्ति इलाज के अभाव में दम तोड़ देता है।


उस समय सबसे ज्यादा दुख होता है, जब लोग उसी रास्ते से गुजरते रहते हैं, लेकिन उस तड़पते इंसान की तरफ एक निगाह उठाकर देखते भी नहीं और आगे बढ़ जाते हैं। घायल इंसान तड़पता रहता है, जिसको अगर तुरंत उपचार के लिये ले जाया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। वाह रे इंसान, जब तू ही इंसान के काम नहीं आ सकता, तो फिर किसके काम आएगा।


आज मनुष्य की मानसिकता इतनी बदल गयी है कि लोग अगर सड़क पर किसी को गिरा हुआ देख भी लेते हैं, तो तुरंत उनके दिमाग में यह बात आ जाती है कि ये आदमी जरूर शराब का सेवन किया है और पीकर गिरा पड़ा। इसलिए उसके पास कोई नहीं जाता, लेकिन किसी के दिमाग में यह बात नहीं आती कि हो सकता है इसके गिरने का कोई और कारण हो। उसके तह तक कोई भी जाना नहीं चाहता और लोग देखते हुए निकल जाते हैं, रह जाती है तो बस तड़पती ज़िंदगी।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग