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असली रौशनी वाली दीवाली

Posted On: 5 Nov, 2012 Others में

chandravillaविश्व गुरु बने मेरा भारत

nishamittal

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deewali

दीप पर्व की मंगल कामनाएं आप सभी को.

आज  दीवाली का पर्व होने पर भी रमा को बॉस के कहने से  किसी जरूरी कार्य वश कुछ देर के लिए ऑफिस जाना पड़ा,काम निबटाते काफी समय हो गया .रमा को अभी बाज़ार से सामान  भी खरीदना था और त्यौहार की तैयारी भी करनी थी.जल्दी से कुछ मिठाई तथा अन्य आवश्यक सामान लेकर वह ऑटो लेने के लिए चली ,परन्तु  रमा  के  तेजी से बढते क़दमों को ब्रेक लग गया ,जब उसकी नज़र  चौराहे पर गाड़ी साफ़ करते उस  बच्चे पर पडी जो कभी कपडे से तो कभी अपनी फटी कमीज से एक गाड़ी को चमका रहा था ,इतने में ग्रीन  सिग्नल होते ही ट्रैफिक चालू हो गया और गाड़ी के मालिक से पैसे मांगता वह बच्चा बराबर की गाड़ी से धक्का लगने के कारण नीचे गिर पड़ा ,पैसे तो मेहनत के उसको मिले ही नहीं ,पता नहीं गाड़ी के मालिक को मोबाइल पर बात करने के कारण फुर्सत नहीं थी या उस बच्चे के पैसे मारकर वह और अमीर बनना चाह रहा था,वह आगे बढ़ गया. .इतनी भागमभाग में  किसी के पास फुर्सत नहीं थी, जो उस बच्चे को उठाकर कुछ मरहम पट्टी करा सके परन्तु रमा की मानवता ने उसको अनुमति नहीं दी ,खून बहते बच्चे को छोड़ कर जाने के लिए उसकी अंतरात्मा ने अनुमति नहीं दी. और वह घर बच्चों के पास उड़ कर पहुँच जाने का  अपना अभियान भूल कर उसको डाक्टर के पास ले जाने की सोचने लगी ,उसकी आँखों के सामने वह दृश्य आ गया, जब उसका नन्हा भाई इसी प्रकार एक दुर्घटना का शिकार हो कर असमय ही उनका साथ छोड़ गया था.

रमा को ऑटो  मिल गया था,अतः  बच्चे को लेकर वह चल पडी, रमा अपने घर  भी  खबर नहीं दे पा रही थी,रमा के पति  इस बार छुट्टी न मिलने के कारण दीवाली पर घर नहीं आ सके थे.बेटा 7  वर्ष का 5   वर्ष की बेटी तीन ही सदस्य घर में ,उधर   दीवाली का त्यौहार. डाक्टर का क्लीनिक  थोडा दूर था,बच्चे का खून बह रहा था.रास्ते में उसने रोते  बच्चे से  उसका  नाम पूछा तो उसने बताया कन्हैया नाम है उसका और आज दीवाली पर उसको घर पर बहुत मिठाई और पटाखे ले जाने हैं, पर अभी वह 50 ही कमा सका है.एक बीमार माँ और एक छोटा भाई है उसका.बाप किसी बीमारी से भगवान के घर चला गया ,माँ भी बीमार है,कुछ काम नहीं कर पाती.भाई बहुत छोटा है और उसने अपने भाई से वादा किया था कि बहुत सारे मिठाई और पटाखे लेकर आएगा.अब वह कुछ भी नहीं कर पायेगा.
क्लीनिक  आ गया था,ऑटो वाले की सहायता से रमा कन्हैया को लेकर अंदर पहुँची.डाक्टर ने इंजेक्शन लगाकर,मरहमपट्टी आदि कर उसको खाने की दवाइयां दी .अब रमा कन्हैया को ऑटो में ही उसके घर छोड़ने गई.कन्हैया की बीमार माँ बेटे के पट्टियाँ बंधी देख कर घबरा गई.रमा ने उनको  सब कुछ बताया और अपने साथ लाया  दीवाली का सारा सामान कन्हैया और उसके भाई को देकर आगे के इलाज के पैसे उसको देकर अपने घर पहुँची.कन्हैया की माँ ने  तो आशीर्वाद की झड़ी लगा दी.  रमा की  सारी थकान उड़ गई  . अब वह पुनः ऑटो से घर पहुँचने की जल्दी में थी.
दोनों बच्चे माँ की इंतज़ार कर सो चुके थे ,थोड़ी बहुत तैयारी रमा सुबह ऑफिस जाने से पूर्व करके गई थी,लौटते समय मिठाई भी नहीं ला सकी थी. घर पहुँचते ही रमा के तो होश उड़ गए ये देखकर कि बच्चों ने उसके पीछे  मोमबत्ती जलाई होगी , जिसकी लौ किसी बराबर में रखे एक वस्त्र ने पकड़ ली थी ,थोड़ी दूर पर बच्चे सो रहे थे.बिजली की फुर्ती से उसने उस सुलगते वस्त्र को हटाया ,दृश्य देख कर काँप गई थी रमा.
सामान्य हो कर  थोडा सा हलवा तैयार कर उसने सोते हुए बच्चों को उठाया और दीपक जला कर पूजन किया.बच्चे माँ से चिपट कर रोने लगे उनसे सौरी  कहा  कि वह उनके पटाखे नहीं ला सकी,कल लाने का वादा कर बच्चों को कुछ खिलाकर सुलाया .त्यौहार तो रमा का पति के ना आने के कारण  तथा इस घटना के कारण जोश से नहीं मन सका था परन्तु उसकी आत्मा में शान्ति थी कि उसने किसी परिवार के चिराग को बचाया था और शायद उन्ही दुआओं से उसके घर का चिराग और रौशनी सुरक्षित रहे.बच्चे थोड़ी देर में पुनः सो गए थे. रमा की आँखों की नींद आज के दिन की घटनाओं के कारण उड़ गई थी ,उसका परिवार भले ही दीवाली उल्लास से नहीं मना पाया था परन्तु उसको लगा कि इस बार  की दीवाली पर  अधिक रौशनी है.
(दीवाली का दिव्य पर्व अपने परिवार के साथ धूम धाम से मनाने का आनंद ही कुछ और है,परन्तु किसी को जीवन देना और उसके मुख पर प्रसन्नता लाने का बहुत महत्व है,जो आत्मिक सुख प्रदान करता है.ऐसी ही दीवाली रमा और उसके परिवार की रही)

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