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इम्पोर्ट एक्सपोर्ट .....चालू आहे !...(चुनाव..2014 )

Posted On: 23 Mar, 2014 Others में

AAKARSHANEK DARPAN

OM DIKSHIT

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बड़ी अज़ीब से बात है न !, जब देश की अर्थ-व्यवस्था की बात आती है ..तो…सभी विपक्षी दल के नेता ….सड़क से लेकर सदन तक हंगामा करते नहीं थकते हैं.सरकार को दोष दिया जाता है ..कि…..यदि सरकार ने इम्पोर्ट (आयात )पर अंकुश लगाया होता ……और एक्सपोर्ट (निर्यात) बढ़ाया होता तो देश की अर्थ-व्यवस्था चौपट न होती,……बजट घाटा न बढ़ता, …. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा होता तो ……अर्थ-व्यवस्था में त्वरित सुधार हो जाता,….लेकिन जब राजनीतिक-व्यवस्था की बात आती है …..तो सभी दल ….अधिक से अधिक इम्पोर्ट को बढ़ावा देते नहीं थकते.और …..आयातक- दलों …..के नेता ….बेशर्मी ….की सारी हदें…..पार कर देते हैं ..और …गर्व के साथ …सीना …छप्पन इंच ..बताने में कोई शर्म नहीं करते.सबसे मजेदार बात तब होती जब ……आयातक दल के अध्यक्ष और नेताओं को ….पानी पी-पी कर कोसने और गरियाने….तथा ….खूनी और हत्यारा तक की ..संज्ञा से विभूषित करने वाले ….आयातित नेता ….उनके बगल में खड़े होकर ….माला पहने और बेहयाई …के साथ ….उन्ही की तारीफ में क़सीदे पढ़ते हैं.खैर!,,,,,चुनावी -बसंत में….सब कुछ जायज है…..वैसे भी होली…..में…विरोधियों से भी गले मिलने में परहेज नहीं….

लेकिन कुछ नेता ऐसे भी हैं….जो….आयातित होना चाहते हैं ..सज-धज कर खड़े हैं….लेकिन कोई उन्हें ……आयात नहीं करना चाहता है क्योंकि आयात करने के बाद बाज़ार में उसकी पूछ भी होगी या नहीं ….याने कि….वोट या सीट ..मिलेगा भी कि नहीं? अतः ठोक-बजा कर ही …मॉल इम्पोर्ट करना होता है.बेचारे … तारीफ कांग्रेस की करते हैं……लेकिन राष्ट्रिय लोक-दल में शामिल हो जाते हैं…..इसी को …बैक-डोर से इंट्री…..कहते हैं.लेकिन अपने …..मायके का मोह भी नहीं छोड़ पाते ……और …ससुराल वालों की अनुमति से……बिछड़े हुए भाई.(सपा के मुखिया ) …का प्रचार भी करना चाहते हैं….होना भी चाहिए …..शादी के बाद …यदि ससुराल में कुछ उल्टा-पुल्टा हुआ…तो…कम से कम मायके का दरवाजा ….तो.खुला रहेगा..कोई भी बहू…अपने मायके का मोह भला कैसे छोड़ सकती हैबिहार के ….एक नेता जो जीते रिकार्ड वोट से और हारने में भी ….रिकार्ड बना चुके हैं….गत दिनों …नमो-नमो करते देखे गए.भजपा के …एक ..कद्दावर….नेता ने स्पष्ट रूप से….कहा….‘पार्टी का जनाधार बढ़ने के लिए ….दल-बदलुओं को गले लगाने और उन्हें टिकट देने में कोई गुरेज़ नहीं है.’….शिबू शोरेन को जेल भेजते समय यह सब भूल गए थे.राम कृपाल और सतपाल महाराज से ऐसे गले मिले ….जैसे कोई सगा भी न मिले.इन दोनों को तो आयात करने के बाद टिकट दिया गया लेकिन जगदम्बिका पाल को तो ……आयात होने की प्रत्याशा में टिकट दे दिया गया .आज-कल एक फ़िल्मी गाना बहुत जोर-शोर से बाज़ रहा है……….’सारी लाइफ ……बेशर्मी की हाइट ‘ आप ने भी जरूर देखा सुना या महसूस किया होगा.

जो भी हो इम्पोर्ट के बाद कुछ एक्सपोर्ट तो होना ही चाहिए.जैसे किसी कंटेनर (दल )में काफी दिनों से बंद माल……… जो सड़ने की स्थिति में आ गया हो….या जिसकी बदबू उसके पुराने चुनाव-क्षेत्र में फैलने लगी हो,और इसका आभास हो गया हो कि यदि इसे हटाया नहीं गया तो जनता ….स्वयं ही फेंक देगी….तो उसका स्थान परिवर्तन होना ही चाहिए. सबसे अधिक भाजपा ने और फिर कांग्रेस तथा कुछ अन्य दलों ने अपने नेताओं का एक्सपोर्ट कर दिया .इसके पीछे भी कोई न कोई राजनीतिक चाल है.बड़े-बड़े नेता ……सुरक्षित सीट खोजने लगे हैं.एक्सपोर्ट के पीछे …..अंदरूनी कलह सबसे बड़ा कारण है.एक तीर से दो निशाने…..कभी चुनाव न लड़ने वाले नेताओं को …चुनाव मैदान में उतारना और उनके जीतने की सम्भावना को क्षीण करने का इससे बड़ा दांव क्या हो सकता है भला ?भाजपा अध्यक्ष ….ने यह दिखा दिया कि…..मोदी के बाद यदि पार्टी में कोई है ….तो वही.उन्हें न अडवाणी की परवाह है और न हि …..सुषमा -स्वराज की…..राजनीति का यह सबसे…… पहला सिद्धांत है कि …..”जिस कंधे पर चढ़ कर आगे बढ़ो ,उसे तोड़ देना चाहिए ताकि ……वह स्वयं अपनी -चोट की चिंता में लग जाय और फिर दूसरे कोई उस कंधे पर चढ़ कर आगे न बढ़ सके.” बेचारे! अडवाणी जी!!..भितरघात की चिंता से ग्रसित हैं कि…..उनके चेले उन्हें चित न करा दें.अपने सबसे मजबूत सहयोगी ,हरेन पाठक को फिर टिकट मिलने की आस में,गांधी नगर कबूल कर लिया ,लेकिन बेचारे पाठक जी तो बिना …किसी प्रपत्र के ही ….अपनी सीट से एक्सपोर्ट कर दिए गए……….वो कहा जाता है न कि……’.हिस्ट्री रिपीट्स इटसेल्फ ‘ पिछली बार मोदी अडवाणी प्रकरण में……अडवाणी जी का खुल कर समर्थन करने वाले …शत्रुघ्न सिन्हा भी उनका यह कह कर मजाक उड़ाने लगे हैं……’अब अडवाणी जी की उम्र रूठने की नही रह गयी है.’ बेचारे …गुरु जी!….वैसे मेरा तो यही कहना है कि…..अब उनकी इज्ज़त उनके हाथ में है.उन्हें अब मोह-माया का त्याग कर देना चाहिए.लेकिन….’जब तक साँस..तब तक आस.’ की कहावत यूँ ही नहीं कही जाती है.

राजनीति में एक सबसे मुश्किल कार्य है …..रिटायरमेंट की उम्र का निर्धारण……सरकारी कर्मचारियों को भी यदि अवकाश-ग्रहण न कराया जाय तो अपने मन से कौन …..चाहेगा भला ? कोई भी अपने को बूढ़ा मानने को तैयार नहीं होता चाहे नेता हो ,सेना का जनरल हो या कर्मचारी.बूटा सिंह को ही देखिये न! ,कभी का अवकाश ग्रहण कर चुके थे…लुप्त -प्राय हो गए थे ,….लेकिन अचानक ही …..जवान हो गए और इस उम्र में भी ……साईकिल पर चढ़े देखे गए….शायद आप को भी विश्वास न हो रहा हो?यदि सही में देखा जाय तो हर पार्टी में ऐसे लोगों की बहुलता है…….जसवंत सिंह ,राज नाथ सिंह, जोशी जी, मुलायम सिंह ,जनरल साहब,बेनी वर्मा..आदि-आदि….अभी भी अपने को युवा मानते हैं…भला हो सरकार का ..जिसने कुछ सीमित पद धारकों के मरने पर ही ….राजकीय अवकाश का प्राविधान कर दिया है अन्यथा……????राजनीती के इस अखाड़े में इस समय सबसे महत्त्व-पूर्ण सीट ….वाराणसी की हो गयी है.सभी चाहते हैं कि……….अगले पञ्च -वर्ष ….. बाबा विश्वनाथ …के दरबार में ही बीते….जोशी जी से तो बाबा के साथ यहाँ की जनता भी ….तौबा करना चाहती थी….अब ….इम्पोर्टेड ‘ मोदी ‘ को बाबा का आशीर्वाद मिलता है या नहीं ,समय बतायेगा.लेकिन मोदी के चाटुकारों ने…..पहले ही उन्हें महादेव की बराबरी में लाकर …..’हर हर महादेव, की जगह …’हर हर मोदी,…का नारा लगाना शुरू कर दिया है,जिसे यहाँ की जनता ने बहुत बुरा माना है……अब देखना है कि……महादेव का क्या निर्णय होगा ?अब भाजपा ने इस नारे से अपना पल्ला झाड़ लिया हैं.वड़ोदरा से भी चुनाव लड़ने का कारण ,उनके अंदर या भितरघात का भय हो सकता है.हालात यहाँ तक खराब हो चुके हैं कि ……सुषमा जी जैसी नेता को …पार्टी के कुछ लोगों द्वारा , केंद्रीय चुनाव कमेटी…के ऊपर दबाव बना कर इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट की बात स्वीकार करनी पड़ी हैं.

जो भी हो इस चुनावी दंगल में किसी भी दल का कोई सिद्धांत नहीं रह गया है. केवल यही रह गया है कि जैसे भी हो…..चोर हो या बदमाश, डाकू हो या लुटेरा ,कतली हो या दागी….दल-बदलू हो या कल तक चीख-चीख कर गाली देने वाला ,धोखे- बाज हो या गद्दार….मरने के कगार पर हो ,तो भी चलेगा.अपना वंश हो या गोद लिया हो तो सर्वोपरि .श्री रामलू हो या याकूब कुरैशी,ब्रज भूषण शरण हो या जेल में बंद बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिव कन्या ,ऐसे सभी इम्पोर्टेड दल-बदलुओं को हर दल ने टिकट थमाया है.समझ में नहीं आ रहा है कि ये तथा-कथित ,देश-सुधारने का हल्ला करने वाले नेता कब सुधरेंगे?कब तक अरविन्द केज़रीवाल सरीखे नेता जनता के ऊपर झाड़ू चलाएंगे ?कब तक भाजपा,सपा,कांग्रेस,या बसपा के तथा अन्य दलों के नेता देश को गुमराह करते रहेंगे?कब तक जनता को बेवक़ूफ़ समझते रहेंगे?आखिर कब तक …..जाति,धर्म और फरेब के जाल में जनता को फंसाते रहेंगेऔर लूटते रहेंगे ?और आखिर कब तक जनता इनके चुनावी वादों की चक्की में पिसती रहेगी?अब जनता को बहुत सोच-समझ कर ही निर्णय लेना होगा.अपने मत को केवल ….उचित व्यक्ति को देना होगा,चाहे वह किसी दल,किसी जाति या धर्म का हो.किसी के बहकावे या छलावे में न आयें.यह ध्यान में रखें कि …..सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं ,इसी में से जो व्यक्ति सबसे अच्छा आप को लगे …..उसे ही वोट दें और जरूर वोट दें.
फिर से वह गाना याद आ गया…..”सारी फाइट ….बेशर्मी की हाइट.”

जय हिन्द! जय भारत!!

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