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भगवान अयप्पा के दर्शन से पहले ‘वावर मस्जिद’ जाते हैं तीर्थयात्री, ये है सबरीमाला दर्शन से जुड़ा नियम

Posted On: 18 Oct, 2018 Others में

Pratima Jaiswal

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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हो रहा विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बुधवार को महिलाएं मंदिर तक नहीं पहुंच पाई। अब सबरीमाला संरक्षण समिति ने गुरुवार को 12 घंटे राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है। मामला इतना बढ़ गया था कि प्रदेश के निल्लकल, पंपा, एल्वाकुलम, सन्निधनम में धारा-144 लागू कर दी गई है। ऐसे में आम लोगों में मंदिर से जुड़ी बातों और नियमों को जानने की दिलचस्पी बढ़ गई है। इन सभी नियमों में से सबरीमाला मंदिर में जाने से पहले ‘वावर मस्जिद’ में जाने वाले नियम की चर्चा हो रही है। आइए, जानते हैं क्या है ये नियम।

 

 

वावर मस्जिद में होती है भगवान अयप्पा की जयकार
सबरीमला के रास्ते में एक छोटा सा कस्बा है इरुमलै, यह स्वामी अयप्पा के मंदिर से करीब 60 किलोमीटर पहले है। यहां रुकना सबरीमला की तीर्थयात्रा का एक नियम है। वे बहुत श्रद्धा के साथ एक सफ़ेद भव्य मस्जिद में घुसते हैं, इसे वावर मस्जिद कहा जाता है। वे भगवान अयप्पा और ‘वावरस्वामी’ की जयकार करते हैं। वे मस्जिद की परिक्रमा करते हैं और वहां से विभूति और काली मिर्च का प्रसाद लेकर ही यात्रा में आगे बढ़ते हैं। अयप्पा मंदिर के तीर्थयात्री अपने रीति-रिवाज के अनुरूप पूजा-पाठ करते हैं जबकि वहीं नमाज़ भी जारी रहती है।

 

 

मस्जिद की परिक्रमा करने की परंपरा पिछले 500 साल से भी अधिक समय से चल रही है। विशेष रूप से सजाए गए हाथी के साथ जुलूस पहले मस्जिद पहुंचता है, उसके बाद पास के दो हिंदू मंदिरों में जाता है। मस्जिद कमेटी हर साल सबरीमला मंदिर से अपने रिश्ते का उत्सव मनाती है, इस उत्सव को चंदनकुकुड़म (चंदन-कुमकुम) कहा जाता है। इरुमलै में काफ़ी मुसलमान आबादी है और पहाड़ी की चढ़ाई चढ़कर थके तीर्थयात्री अक्सर आराम करने के लिए किसी मुसलमान के घर रुक जाते हैं।

 

मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किमी की दूरी पर पंपा है, वहाँ से चार-पांच किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर सबरीमला मंदिर स्थित है। मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है, जहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

 

 

शबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। मलयालम में ‘शबरीमला’ का अर्थ होता है, पर्वत। वास्तव में यह स्थान सह्याद्रि पर्वतमाला से घिरे हुए पथनाथिटा जिले में स्थित है। पंपा से सबरीमाला तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह रास्ता पांच किलोमीटर लंबा है…Next

 

 

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