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कारगिल युद्ध में बंदी बनाए गए लेफ्टिनेंट नचिकेता और स्क्वॉड्रन लीडर अजय की कहानी, एक लौट आए वतन और एक की नहीं हुई वापसी

Posted On: 28 Feb, 2019 Others में

Pratima Jaiswal

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आपने देशभक्ति फिल्मों में देखा होगा कि जंग के दौरान सैनिकों को बंदी बना लिया जाता है और उन्हें टॉर्चर करके सारी जानकारी हासिल कर ली जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक-2 की कड़ी में विंग कमांडो अभिनंदन को कब्जे में लेने के बाद भी कुछ ऐसी ही आशंका जताई जा रही थी। पाकिस्तान की ओर जारी पहले भारतीय वायुसेना जवान के पहले वीडियो को देखकर उनके साथ किसी बुरे बर्ताव की आशंका जताई जा रही थी क्योंकि इस वीडियो में उनके हाथ बंधे और आंखों पर पट्टी बांधी गई थी। वहीं उनके चेहरे पर चोट के निशान भी देखे जा रहे थे।

 

 

लेकिन शाम को भारतीयों को राहत देने वाला वीडियो जारी किया गया, जिसमें कमांडो चाय पीते हुए दिख रहे हैं और पाकिस्तान की ओर से सही बर्ताव की बात कहते दिख रहे हैं। बहरहाल, ये पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी भारतीय सिपाही को अपने कब्जे में लिया हो। इससे पहले भी करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने दो भारतीय सैनिकों को अपने कब्जे में लिया था। अजय आहूजा और कमबमपति नचिकेता जिनमें से एक भारतीय जवान की वतन वापसी हो पाई थी जबकि अजय आहूजा, कमबमपति नचिकेता को बचाने के मकसद से गए थे लेकिन पाकिस्तानियों ने उन्हें टॉर्चर करके मार डाला।

 

कारगिल युद्ध में बंदी बनाए गए जवान 

1999 की सर्दियों में कारगिल की पहाड़ियों में भारतीय सेना की खाली की गई 140 चौकियों पर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया था।
भारतीय वायुसेना ने ऊंचाई पर बनी भारतीय चौकियों से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए अपना ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया ‘ऑपरेशन सफेद सागर’। भारतीय वायुसेना के स्क्वॉड्रन नंबर-9 को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वो बाल्टिक सेक्टर में 17,000 फीट की ऊंचाई पर जाए और दुश्मन की चौकी पर हमला करे। इस मिशन की जिम्मेदारी दी गई स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहूजा को। जिन्होंने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया।

 

स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहूजा

 

अपने साथ नचिकेता को बचाने की कोशिश में पकड़े गए अजय आहूजा
7 मई 1999 के दिन स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहूजा ने मिग-21 विमान संख्या C-1539 से उड़ान भरी। उनके बगल में थे 26 साल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट कमबमपति नचिकेता। जो मिग-27 विमान के साथ इस मिशन में शामिल थे। तीन विमान के इस स्क्वॉड्रन ने हायना फॉर्मेशन उड़ान भरना शुरू किया। सुबह के करीब 10।45 का समय था और यह स्क्वॉड्रन दुश्मन पर मौत बरसा रहा था।
इन लोगों को साफ़ निर्देश था कि किसी भी हालत में सीमा रेखा को पार नहीं करना है। बमबारी करते हुए अचानक फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता के विमान के इंजन में गड़बड़ी आनी शुरू हो गई। स्पीड तेजी से गिर रही थी। कुछ ही सेकंड के भीतर नचिकेता के विमान की गति 450 किलोमीटर प्रति घंटे पर आ गई। जब उन्हें लगा कि अब बचने की कोई उम्मीद नहीं है तो अपने स्क्वॉड्रन लीडर को इस बात की जानकारी देते हुए ये विमान से इजेक्ट हो गए।
इसका बाद अपना लीडर होने का फर्ज निभाते हुए स्क्वॉड्रन लीडर ने नचिकेता की लोकेशन पता लगाने के लिए विमान से उनका पीछा करना शुरू किया। रिपोर्ट्स के अनुसार अपनी सीमा में रहते हुए भी पाकिस्तान ने युद्ध का उल्लघंन करते हुए अजय के विमान पर मिसाल दाग दी और इस वजह से उन्हें विमान से इजेक्ट होना पड़ा। दोनों भारतीय सिपाही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लैंड हुए जिन्हें तुंरत पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया गया।

 

फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता अटल बिहारी वाजपेयी के साथ

अजय आहूजा को टॉर्चर करके मार दी गोली और नचिकेता सुरक्षित लौट गए
रिपोर्ट्स की मानें तो अजय आहूजा को पाकिस्तानी सेना ने टॉर्चर करके मार डाला। श्रीनगर बेस हॉस्पिटल में हुए पोस्टमार्टम में साफ हुआ था कि उन्हें पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई। जबकि नचिकेता एक वरिष्ठ पाक अधिकारी के दखल के बाद बचने में कामयाब रहे। उन्हें भी पाक में टॉर्चर किया गया था लेकिन भारत-पाक के समझौते के बाद 4 जून 1999। पाकिस्तान ने उन्हें इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस को सौंपा और वहां रेड क्रॉस से वो वाघा बोर्डर से भारत आए।अजय आहूजा शहीद हो गए। उन्हें मरणोंपरात वीर चक्र से सम्मानित किया गया। वहीं, कमबमपति नचिकेता को वायुसेना मेडल से नवाजा गया।…Next

 

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