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स्‍वामी विवेकानंद का ब्रह्मचर्य तोड़ने आई वेश्या बन गई मुरीद, राजा को मांगनी पड़ी माफी

Posted On: 4 Jul, 2020 Others में

Rizwan Noor Khan

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दुनियाभर के युवाओं के प्रोरणास्रोत स्‍वामी विवेकानंद ने पूरे संसार को आधुनिक वेदांत और हिंदू दर्शन का महत्‍व समझाया। अमेरिका प्रवास के दौरान एक सभा में उनके विचारों से प्रभावित होकर जब उन्‍हें अमेरिकी महिला ने शादी के लिए प्रपोज किया तो उन्‍होंने उसे प्रेम का असली पाठ पढ़ाया। जबकि, अपनी युवावस्‍था में ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे स्‍वामी विवेकानंद के समक्ष वेश्‍या भेजे जाने की भूल होने के बाद स्‍वयं राजा माफी मांगने पहुंचे थे।

 

 

 

 

 

 

भारत के विश्वगुरु होने की घोषणा
स्‍वामी विवेकानंद ने अमेरिका में भाषण देकर बता दिया था भारत विश्‍व गुरु है। भारत के कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्‍वामी विवेकानंद की आज यानी 4 जुलाई को पुण्यतिथि है। आध्‍यात्मिक शक्तियों वाले स्‍वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। ज्ञान का भंडार रखने वाले विवेकानंद ने किशोरावस्‍था में ही दुनिया की कई भाषाएं सीख ली थीं। उन्‍होंने अपने आध्‍यात्‍म की रुचि को सही दिशा देने के लिए स्‍वामी रामकृष्‍ण परमहंस के सानिध्‍य में चले गए। इस दौरान उन्‍होंने सांसारिक सुखों को त्‍यागकर जीवन की सही दिशा और उसके उद्देश्‍य प्राप्ति में जुट गए।

 

 

 

 

राजा के आमंत्रण पर पहुंचे जयपुर
स्‍वामी बनने से पहले विवेकानंद ने किशोरावस्‍था में ब्रह्मचर्य का पालन शुरु कर दिया। इस दौरान उन्‍होंने खूब ख्‍याति हासिल की। वह घूम घूमकर लोगों को शिक्षित करने लगे। इसी क्रम में वह जयपुर पहुंचे तो वहां के राजा ने उन्‍हें सत्‍कार करने का सौभाग्‍य देने की विनती की। राजा की विनती को स्‍वीकार कर वह महल जा पहुंचे और एक कमरे में विश्राम करने लगे। यहां पर उन्‍होंने राजा की तमाम चिंताओं की मुक्ति का रास्‍ता बताया और राजपरिवार के लोगों को जीवन का सही रास्‍ता और उद्देश्‍य समझाया।

 

 

 

 

 

 

ब्रह्मचर्य तोड़ने के लिए भेजी गई वेश्या
सन्‍यासी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित राजा के करीबी सलाहकारों ने विवेकानंद को खुश करने के लिए राज्‍य की सबसे खूबसूरत वेश्‍या को उनके कमरे के दरवाजे पर भेज दिया। वेश्‍या के आने पर सन्‍यासी विवेकानंद अचंभित हो गए और वेश्‍या के निवेदन पर भी उन्‍होंने दरवाजा नहीं खोला। विवेकानंद अभी युवावस्‍था में पहुंचे ही थे और वह अपनी इंद्रियों को पूरी तरह वश में करना नहीं सीखे थे। ब्रह्मचर्य टूट न जाए इसलिए उन्‍होंने वेश्‍या को कमरे के अंदर नहीं आने दिया।

 

 

 

राजा ने माफी मांगी
इस घटना का जब राजा को पता चला तो वह परिवार समेत दौड़ता हुआ सन्‍यासी विवेकानंद के कमरे पर पहुंचा। राजा ने विवेकानंद से क्षमा मांगते हुए उसे माफ करने की विनती की। विवेकानंद से मिलने की जिद लेकर वहां ठहरी वेश्‍या से मिलने के लिए राजा ने विवेकानंद से विनती की। राजा और वेश्‍या की याचना पर करुणा दिखाते हुए विवेकानंद वेश्‍या के सामने आए और उसे सही मार्ग अपनाने का उपदेश दिया। बाद में वह वेश्‍या सन्‍यासी बनकर भगवान की भक्ति में लीन हो गई। जानकारों के मुताबिक स्‍वामी विवेकानंद ने अपनी डायरी में इस घटना का जिक्र किया है।

 

 

 

 

अमेरिकी महिला ने विवाह का प्रस्‍ताव रखा
अमेरिका में धर्मसभा करने के बाद ख्याति हासिल करने वाले स्‍वामी विवेकानंद को दुनियाभर में सम्मलनों के लिए बुलाया जाने लगा। न्‍यूयार्क में एक समारोह में स्‍वामी विवेकानंद के विचारों और उनके तेज से प्रभावित एक अमेरिकी महिला ने उनसे शादी का प्रस्‍ताव रख दिया। उसने विवेकानंद से कहा कि वह उससे विवाह कर लें ताकि वह उनके जैसे प्रतिभाशाली और ओजस्‍वी बच्‍चे की मां बन सके। अमेरिकी महिला के प्रस्‍ताव से सम्‍मेलन में मौजूद लोग आश्‍चर्यचकित हो गए। विवेकानंद ने महिला से कहा कि वह सन्‍यासी हैं और विवाह नहीं कर सकते हैं। वह महिला चाहे तो उन्‍हें ही अपना पुत्र स्‍वीकार कर ले। इससे उसका विवेकानंद जैसा बेटा पाने का सपना पूरा हो जाएगा और उनका सन्‍यास धर्म भी नहीं टूटेगा।

 

 

 

 

 

 

बेलूर मठ में स्वामी विवेकानंद ने ली अंतिम सांस
स्‍वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्‍ण मठ की स्‍थापना की और रामकृष्‍ण मिशन में जुट गए। विवेकानंद ने अमेरिका के न्‍यूयार्क में वेदांता सोसाइटी का गठन भी किया। उनके अथाह ज्ञान के चलते उन्‍हें वेदांत का अद्वेता भी कहा गया। विवेकानंद ने राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, जनना योग, माई मास्‍टर, लेक्‍चर्स फ्रॉम कोलंबो टू अल्‍मोड़ा जैसी कई प्रसिद्ध पुस्‍तकों को भी लिखा। बंगाल के बेलुर मठ में 4 जुलाई 1902 को स्‍वामी विवेकानंद का निधन हो गया।…NEXT

 

 

 

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