blogid : 26149 postid : 1355

वर्ल्ड मिल्क डे 2019 : जिस लड़के को बचपन में दूध नहीं था पसंद, वो कैसे बना ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’

Posted On: 1 Jun, 2019 Others में

Pratima Jaiswal

OthersJust another Jagranjunction Blogs Sites site

Others Blog

204 Posts

1 Comment

“बचपन में मुझे दूध पीना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। ” वर्गीज कुरियन ने अपने जीवन के अच्छे-बुरे प्रसंगों पर ‘आई टू हैड अ ड्रीम’ नाम की एक किताब भी लिखी। जिसमें उन्होंने दूध को नापसंद करने वाली बात का जिक्र भी किया है। डॉ। वर्गीज कुरियन को भारत में श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है।आज वर्ल्ड मिल्क डे है, ऐसे में जानते भारत में श्वेत क्रांति के जनक कैसे बने मिल्कमैन ऑफ इंडिया।

 

 

‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से हुए मशहूर
भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले वर्गीज कुरियन 26 नवंबर 1921 को केरल के कोझिकोड में पैदा हुए थे। एक सीरियाई क्रिश्चियन परिवार में पैदा हुए वर्गीज कुरियन ने मकैनिकल इंजिनियरिंग में मास्टर्स किया है। मास्टर्स करने के बाद उन्होंने दुग्ध उत्पादन की दुनिया में कदम रखा। साल 2012 में 90 साल की उम्र बिताकर ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर वर्गीज कुरियन दुनिया छोड़कर चले गए।

 

सरकारी स्कॉलरशिप के लिए शुरू की थी पढ़ाई
वर्गीज कुरियन ने जमशेदपुर में टाटा स्टील लिमिटेड में काम भी किया है। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। डेयरी इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए उन्हें भारत सरकार से छात्रवृत्ति मिली और फिर उन्होंने इंपीयरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऐनिमल हज्बेंड्री एंड डेयरिंग से पढ़ाई की। इसके बाद वह मास्टर्स के लिए अमेरिका चले गए। कहा जाता है कि कुरियन ने डेयरी फार्मिंग की पढ़ाई सिर्फ इसलिए की क्योंकि इसके लिए उन्हें सरकारी स्कॉलरशिप मिल रही थी।

 

 

ऐसे हुआ श्वेत क्रांति का आगाज
वर्गीज कुरियन ने 1970 में ऑपरेशन फ्लड शुरू किया। इससे देश में श्वेत क्रांति का आगाज हुआ और भारत दुग्ध उत्पादन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश बन गया। भारत में डेयरी उत्पादों की सबसे बड़ी कंपनी अमूल की स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमूल की सफलता से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सारे देश में अमूल मॉडल को फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड का गठन किया। साल 1965 में स्थापित होने वाली इस संस्था का पहला अध्यक्ष वर्गीज कुरियन को ही बनाया गया।

 

कुरियन के सहकारिता आंदोलन से प्रेरित फिल्म थी ‘मंथन’
डॉ. कुरियन के सहकारिता आंदोलन से प्रेरित एक फिल्म मंथन का निर्माण किया गया। इसे मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने बनाया था। डॉ। कुरियन ने अपने जीवनकाल में 30 से ज्यादा उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की थी। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें रेमन मैग्सेसे, पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया…Next

 

Read More :

जिन लोगों के लिए 16 सालों तक अनशन पर रही इरोम शर्मिला, वही उनकी प्रेम कहानी के ‘विलेन’ बन गए

चुनावी रैली में घुस आए सांड ने मचाया उत्पात, आंधे घंटे तक हवा में चक्कर काटता रहा अखिलेश का हेलीकॉप्टर : देखें वीडियो

Avengers Endgame: गूगल पर Thanos चुटकी में गायब कर रहा है सर्च रिजल्ट, आप खुद ट्राई करके देख लीजिए

Rate this Article:

  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग