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कहाँ गए वो मेले..........

Posted On: 27 Sep, 2010 Others में

परिवर्तन की ओर.......बदलें खुद को....... और समाज को.......

Piyush Kumar Pant

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27 सितम्बर …… आज सुबह ऑफिस आधा घंटे पहले पहुच गया था तो मित्र को फ़ोन करके पूछा की कहाँ हो……….. वो अभी घर पर ही था……. फिर मैंने पूछा आज की तारीख में क्या विशेष है याद है……… वो बोला आज तारीख क्या है…. मैंने कहा 27 सितम्बर……….

वो बोला समझ गया तू कहना क्या चाहता है…….. पर तू गलत है….. वो 28 सितम्बर को है…… मैंने पूछा क्या …. वो बोला अयोध्या पर फैसला………. सुनकर बड़ा बुरा सा लगा…..
क्योकि हर बार 26 जनवरी, 15 अगस्त या कोई भी राष्ट्रीय पर्व हो ………मेरा ये मित्र पहले सूचित करता था…… पर आज क्या हुआ…………

मैंने कहा की तू भूल गया ……….. वो फिर बोला ……. क्या हुआ कुछ और भी है क्या…… फिर मैंने कहा की किसी की चिता पर मेले लगाने का वादा किया था तुमने और हमने………. क्या हुआ तेरा वादा………..

अब वो चौंका और बोला ओह…. सॉरी यार भूल गया ………. भगत सिंह का जन्म दिवस….
27 सितम्बर 1907 …….. अरे यार इतने मेसेज आये 28 सितम्बर के की 27 सितम्बर कही छुप सा गया है…..

थोडा दुःख सा हुआ ……………. की वो भगत सिंह जिसने सिखों के प्रतीक केश को देश पर बलिदान कर दिया वो …….. मंदिर मस्जिद के विवाद में भुला दिया गया…….. आज देश भक्तों पर भारी पड़ गए हमारे धार्मिक मूल्य……

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फिर भी एक उम्मीद थी की रात को जब घर पहुच कर ब्लॉग देखूंगा तो शायद बहुत सारी पोस्ट छापी होंगी भगत सिंह के जन्मदिवस पर………. पर यहाँ भी गिने चुने लेखों ने लाज बचा रखी थी…… निलेश वैशनव जी व दिग्विजय त्रिवेदी जी ने जरुर इस विषय पर लिखा और इसके लिए हम सभी को उनके प्रति आभार प्रकट करना चाहिए…………

पर आखिर कैसे हम भूल गए की उन शहीदों ने हमारे आज के लिए आपना आज कुर्बान कर दिया था……….. कितने उम्मीद से उन्होंने कहा होगा

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले………
वतन पर मिटने वालों के यही बाकि निशां होंगे……….

आज ये सोचना ही पड़ेगा की आखिर क्यों कोई इस देश पर बलिदान हो जाये………. जबकि हम उसको ये भरोसा ही नहीं दे सकते है की उसकी मौत के बाद हम उसको भूलेंगे नहीं……. कोई भी चाहे भगत सिंह हो या कोई और……… वो इस लिए कुर्बान नहीं होता की उसको पूजा जाये……… अपितु इस लिए बलिदान देता है की अपने मूल्यों से वो समझोता नहीं कर पाता………. और उसको एक विश्वाश होता है……. की मेरे बाद ये देश मेरे परिवार को मेरी कमी नहीं खलने देगा………

क्या हो जब उसको ये पता चल जाये की हम उसको ही याद नहीं रख सकते……. तो उसकी फैमिली को क्या याद करेंगे…………….

इस महान शहीद क्रांतिकारी को शत शत नमन…………

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