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शिक्षा व्यवसाय नहीं ज़िम्मेदारी...

Posted On: 5 Sep, 2013 Others में

परिवर्तन की ओर.......बदलें खुद को....... और समाज को.......

Piyush Kumar Pant

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शिक्षक दिवस पर अक्सर हम लोग अपने नए पुराने शिक्षकों को याद करते हैं। कुछ को आत्मीयता से याद किया जाता है तो कुछ को याद करते हुए खेद भी होता है कि वो शिक्षक थे…

अकसर मैं अपने कई शिक्षकों को याद करता हूँ उनकी दी हुई शिक्षाओं के कारण। पर कुछ शिक्षकों को इस कारण भी याद किया जाता है कि उन्होने एक शिक्षक की ज़िम्मेदारी को कभी समझा ही नहीं।

अध्यापन एक व्यवसाय नहीं है, अपितु एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी है। अध्यापक उस शिल्पी कि भांति है जो एक पत्थर को भगवान की मूर्ति बना सकता है, जिसे लोग रोज पूजते हों। वो उसी पत्थर को एक शिलालेख भी बना सकता है, जो बस दूसरों की गौरवगाथा का गुणगान बार करता रहे, उसका अपना कोई वजूद नहीं रहे, वो उसकी महिमा गए जिसे उसपर अंकित किया है।

शिक्षक उस कुम्हार की भांति है जो मिट्टी से घड़ा बना सकता है जो लोगों को शीतल जल प्रदान करे, या उसी मिट्टी से एक दिया बना सकता है जो लोगों को प्रकाश दे या फिर वो उस मिट्टी से एक गुल्लक बना देता है, जो केवल धन का संचय करने के काम आता है और अंत में जब धन पूरी तरह भर जाता है तो उसी धन के कारण अपने अंत को प्राप्त करता है।

मैं आभारी हूँ, उन शिक्षकों का जिन्होने किताबों के साथ स्वयं अपने आचरण से भी हमें नैतिकता की शिक्षा दी। उन शिक्षकों का भी आभारी हूँ जिन्होने भले शिक्षक होने का सही दायित्व न निभाया हो, पर अपने कृत्यों से यह शिक्षा दी कि आपका कृत्य आपको ऊंचा उठाने और भूतल पर ला पटकने के लिए पर्याप्त है।

मुझे यह शिक्षा मेरे हिन्दी व अँग्रेजी के अध्यापकों से मिली। हिन्दी में “आपके आदर्श शिक्षक” व अँग्रेजी में “योर फेवरेट टीचर” नाम से निबंध शिक्षक दिवस एक दिन लिखने को दिये गए। दोनों में मेरे द्वारा विज्ञान/गणित के शिक्षक के बारे में लिखा गया। और तर्कपूर्ण विधि से मैंने अपने पक्ष को रखा भी। किन्तु मैं उस निबंध प्रतियोगिता में सबसे अंत के छात्रों में एक था। क्योंकि शिक्षा में राजनीति मुझे नहीं आती थी। प्रथम वो लोग थे जिन्होने हिन्दी के निबंध में हिन्दी के अध्यापक को आदर्श माना और अँग्रेजी में अँग्रेजी के अध्यापकों का गुणगान किया।

पर अंततः उन दोनों अध्यापकों का भी मैं आभारी हूँ, क्योंकि उनके इस निर्णय ने मुझे एक अध्यापक के रूप में काम करते हुए बहुत सहायता प्रदान की। मैं इस बात के लिए हमेशा जागरूक रहा कि मेरे किसी कृत्य से किसी छात्र का अध्यापक शब्द से विश्वास न खंडित हो।

शिक्षक दिवस पर मेरे सभी शिक्षकों व उन सभी को जिन्होने किसी भी रूप में मुझे कोई शिक्षा दी हो फिर वो मेरे संबंधी हों या मित्र सभी को हार्दिक शुभकामनायें….

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