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कुछ बातें प्रेम के सम्बन्ध में........

Posted On: 11 Feb, 2011 Others में

परिवर्तन की ओर.......बदलें खुद को....... और समाज को.......

Piyush Kumar Pant

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मानव का ह्रदय प्रेम की अपार संभावनाओं से भरा है…….. प्रेम ही प्रेम है उसके भीतर…………. कई बार अहं आड़े आने से वो इसको छुपा जाता है……….उसको लगता है की प्रेम कमजोरों का कार्य है……. और उसका अहं उसको बलवान साबित करने के लिए उसपर झूठा गुस्सा या प्रेम शुन्य भाव से भरने का प्रयास करता है…………….


पर प्रेम सबसे बड़ी ताकत है…….. मुर्दे में जान डाल दे ऐसे चमत्कारी शक्ति से पूर्ण है प्रेम…….. प्रेम स्त्री पुरुष के बीच होने वाले आकर्षण का नाम नहीं है………… प्रेम ह्रदय से पैदा हुए निःस्वार्थ भाव है …….. जो कुछ न पाने की आकांक्षा से किसी और के प्रति प्रकट किया जाये ……..


आम जीवन में कुछ भाव पूर्ण क्षण जिनमे निःस्वार्थ प्रेम झलकता है………… ये प्रेम सामने वाले को एक अदभुद आनंद प्रदान करता है……… कुछ क्षण जिहे हो सके तो आप भी महसूस करें…………….. या आपने कभी महसूस किये हों………..

ये भाव आपने शायद तब महसूस किया हो जब आप छोटे थे और आपकी माँ आपको चूम कर अपना स्नेह आपपर लुटा देती थी…………

एक और स्नेह का उदहारण जब आप देर रात ऑफिस से आयें और घर पर आपके पिता जी टेलीविजन के सामने बैठ कर आपके इंतजार में समय कट रहे हों………… और आप आकर अपने पिता से पूछते है……. पिताजी अभी तक सोये नहीं ………… आपकी तबियत तो ठीक है………… और पिता जी बोलें की नहीं देखना चाह रहा था की तू पी कर तो नहीं आता है…………. और आप हँसते हुए उनके गले लग जाते है……… और कहते है……….. खुद सूंघ कर देख लो………
तो एक भाव आपके पिता के भीतर आपके इस कथन से और एक आपके भीतर पिताजी के इंतजार करने से पैदा होगा ……… निसंदेह वो प्रेम ही है………..

प्रेम भाव पैदा होता है और प्रदर्शित होता है…….. जब आपकी भाभी आत्मीयता से कहती है………. देवर जी ….. एक लड़की देखी है मैंने आपके लिए………….

प्रेम भाव पैदा होता है और प्रदर्शित होता है…….. जब आपकी बहिन आपका कोई काम करते हुए कहती है………… देखती हूँ मेरी शादी होने के बाद कौन करता है तेरे काम…………

प्रेम भाव पैदा होता है और प्रदर्शित होता है…….. जब आप अपने छोटे भाई से (जो बड़ी देर से पढाई कर रहा है या किसी और काम में लगा है) कहते हैं की छोड़ यार चल पहले कहीं घूम कर और कुछ खा कर आते हैं ………. फिर मैं करता हूँ तेरी हेल्प……

प्रेम भाव पैदा होता है और प्रदर्शित होता है…….. जब आपका कोई ख़ास दोस्त आपसे या आप अपने किसी खास दोस्त से कहते है……… की यार तो ज्यादा देर तक घर में मत रहा कर……….. तेरे बिना बड़ा अजीब सा लगता है……….. पता नहीं क्यों……………

प्रेम भाव पैदा होता है और प्रदर्शित होता है…….. जब आपका कोई ख़ास दोस्त आपसे या आप अपने किसी खास दोस्त से कहते है……… की अबे छोड़ ये टेंशन अब तो जो भी हो जाये मैं हूँ न तेरे साथ ……………….

ये छोटे छोटे वाक्य जो हम बोल सकते है………… जो किसी को बेहद आनंद प्रदान कर सकते हैं……… पर हम नहीं कहते क्यों की अहं हमे रोक देता है…………. क्यों हम अपने अहं को अपने प्रिय जनों से ऊपर रखते हैं……………… प्रेम किसी को छोटा नहीं अपितु बहुत बड़ा बना देता है…………….

उपरोक्त पंक्तियों में से जो भी आप कभी भी प्रयोग कर सकते हैं जरूर करें……..

ये ज़िन्दगी बहुत छोटी है प्रेम करने के लिए ………….

न जाने लोग नफरत के लिए समय कहा से लाते है…………

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