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"योग एवं अध्यात्म प्रत्येक मानव के जीवन का अभिन्न अंग हो"

Posted On: 4 Mar, 2016 Others में

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pkdubey

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विश्व और देश में फैले विद्वेष के वातावरण का चिंतन करते हुए एक ही बात बार-बार मन में कौंधती है -” योग एवं अध्यात्म का नित्य अभ्यास किया जाये ,इसी से मानव ,चाहे वह किसी जाति -संप्रदाय का क्यों न हो ,अपना लौकिक एवं पारलौकिक उत्थान कर सकता है “|
कुछ घटनाओं को,जो अभी फिलहाल में घटित हुईं उदाहरण के तौर पर रखते हैं –
१). कल दिल्ली में दो किशोर युवकों ने अपनी गर्ल फ्रेंड को कार गिफ्ट करने के लिए,एक ९ वर्ष के बच्चे की अपहरण कर निर्मम ह्त्या कर दी | वहीं दूसरी ओर लखनऊ में एक प्रौढ़ पिता ने अपने १० माह के बच्चे और एक उससे बड़ी बच्ची की ह्त्या इसलिए कर दी ,की वह दोनों बाहर घूमने की जिद कर रहे थे-इस केस में माँ का बच्चे के जन्म के समय निधन हो गया था ,१० माह से पिता ही बच्चों का पालन कर रहा था |
राजनीतिकार,कानूनविद कहते हैं -नाबालिग के लिए कानून बदलो,जबकि मेरे अनुसार उनके(किशोर एवं प्रौढ़ के ) विचार बदलो |
२),जीवन में कुछ प्रारब्ध के वशीभूत होकर जीने में भी एक सहनशीलता आ जाती है ,शायद पिता यह नहीं समझ पाया अथवा हो सकता और किसी से प्रेम प्रसंग भी चल रहा हो ( क्यूंकि की अपने बच्चों को मारने के बाद भी उसके चेहरे पर कोई अपराधवोध नहीं था ),जो भी हो पर एक ३५-४० वर्ष का इंसान अपने आप से हार गया |
३) किसी भी बात अथवा दैवीय घटना के ऊपर ज्यादा बार -बार चिंतन करने की कोई आवश्यकता नहीं ,वर्तमान के पल को मनोरंजन पूर्वक सोच समझ के जिया जाये इससे अच्छा निर्णय कुछ नहीं हो सकता |
हमारे यहाँ जो कथाये ,नल -दमयंती ,सीता -राम ,कृष्ण आदि की जीवन की जो कुछ भी हैं ,सब अनेकों प्रकार के संघर्ष से भरी पडी है ,इससे शक्ति मिलती है और ऐसा कोई भी नहीं जिसके जीवन में सर्वसुख हो और यह भी कोई गारंटी नहीं कि हमेशा वह सुख बरकरार रहेगा |
आजकल युवा ,किसी ने कुछ कह दिया ,कुछ उनके मन का नहीं हुआ ,तो सीधा -आत्महत्या की ही योजना बनाते हैं एवं माता -पिता को भी चाहिए बच्चे को सही सुझाव देते रहें,चाहे भले ही बच्चे अनसुना कर दे ,पर जब वह अकेले में सोचेंगे ,तो अपने माँ -पिता की सीख को ही याद करेंगे |
बच्चों पर अधिक दवाव किसी बात का न डालें,चाहे शिक्षा हो या व्यक्तिगत जीवन ,पशु -पक्षी भी अपने बच्चे पालते है,उनके बच्चे कौन सा महल बनाते या तिजोरी भरते माँ- बाप के लिए -यह हर माता -पिता का प्राकृतिक दायित्व है -बच्चे को पालना |
कौन से सब विद्वान लोग ही धन कमाते हैं -कम पढ़े लिखे लोग भी लाखों का रोजगार फैलाते हैं ,पढ़े -लिखे लोगों को वह नौकरी देते हैं |
अतः शांत चित्त होकर ,निश्चिन्त होकर थोड़ा समझदारी से जीवन जीने में हम सबका कल्याण है |
|| जय श्री राम || ईश्वर अल्लाह तेरे नाम ,सबको सन्मति दे भगवान.

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