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"राजनीति,सबसे जटिल विज्ञान है"

Posted On: 11 Feb, 2015 Others में

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pkdubey

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मैं राजनीति के विषय का छात्र तो नहीं रहा,पर घर ,परिवार ,गांव ,समाज,प्रदेश ,देश की हलचल को देखते हुए राजनीति का अन्वेषक और विश्लेषक हो गया | हमारे नानाजी ,कांग्रेसी थे ,उनके बड़े भाई श्री सियाराम तिवारी ने ,क्षेत्रीय विधायक श्री रामप्रकाश तिवारी के साथ रहकर कांग्रेस के लिए बहुत कार्य किया ,तो बाबाजी बीजेपी सपोर्टर ,हमेशा अटल जी और कमल को ही वोट दिया | एक बार मैं बाबा जी के साथ ननिहाल गया ,तो बाबा जी ने नाना जी से पूछा,तिवारी ,आप किसको वोट देते,नाना जी ने कहा ,कांग्रेस को ;बाबा जी ने कहा -हम तो भाई ,अटल जी को ही देते ,अपना मत | तब से नाना जी भी ,अटल समर्थक हो गए |
मेरी माँ जी कहती,एक बार शीला दीक्षित भी ,कन्नौज लोक सभा सीट से चुनाव लड़ी थी ,तब हर एक गांव में गयीं थी,गांव की महिलाओं को,बिंदी के पत्ते और सिन्दूर बाँट रही थी |
नेताओं को लगता है ,जनता केवल वोट के लिए है और जनता को लगता है हमारी समस्या का समाधान सरकार है |
जब कि मेरे मतानुसार दोनों ही गलत हैं, लोकतंत्र में जनता जनार्दन हैं और सरकार ,सामाजिक समरसता बनाये रखने के लिए एक सिस्टम है | अब १२५ करोड़ लोगों की हर समस्या का समाधान ,न मोदी कर सकते हैं ,न केजरीवाल और न ही राहुल ,पर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाये जिससे भ्रस्टाचार का निर्मूलन हो सके,देश के अनपढो को शिक्षित किया जाये,सरकार की व्यवस्था में आने वाला हर एक इंसान, प्रधानमंत्री से ग्राम प्रधान तक ईमानदारी से अपना कर्तव्य का पालन करे,तो भारत विकसित राष्ट्र अवश्य बन सकता है |
जैसा कि किरण वेदी जी ने अपने बयान में कहा ,यह अरविन्द की ५ साल की मेहनत है ,यह बात बिलकुल सच है,दिल्ली में उन्होंने अपनी परिवर्तन नाम की संस्था से बहुत समय से जन जागरूकता फैलाई ,उन्हें जटिल कानून को,जनता को आसानी से समझा देने का तजुर्बा है |
पर यह बात पूरे देश में लागू नहीं हो सकती,जैसा कि लोकसभा चुनाव के दौरान खुद अरविन्द केजरीवाल को भी ऐसा अनुभव अवश्य हो गया होगा ,वही दूसरी तरफ बीजेपी ने दिल्ली चुनाव को हल्के में ले लिया,लोक सभा चुनाव के तुरंत बाद यदि दिल्ली इलेक्शन होते ,तो बीजेपी जीत सकती थी और जब अरविन्द ने पोलिटिकल ऑउटफिट शुरू किया ,तभी किरण वेदी जी को बीजेपी में लेना चाहिए था |
वैसे राजनीति में हर इंसान ,दूसरे इंसान की चाल से सीखता है ,दूसरे की कमजोरी पकड़ कर उस पर वार करता है ,यही लोग अन्ना आंदोलन के समय ,गुजरात मॉडल की चर्चा करते थे ,कहते वहां का सारा सिस्टम ऑनलाइन है ,करप्शन करने का चांस ही बहुत कम है ,आज वही सब बीजेपी को गाली दे रहे |
अरविन्द केजरीवाल का अपनी पत्नी को पब्लिक के सामने लाना,उनकी प्रसंशा करना ,कहीं न कहीं इस बात पर बड़ा प्रहार भी है ,कि नरेंद्र मोदी ,जसोदाबेन जी से बहुत दूर हैं |
खैर ,जो भी हो ,जैसे भी हो ,राष्ट्र हित और राष्ट्र उत्थान होना चाहिए ,बीजेपी को आत्म मंथन करने का भी एक अच्छा मौक़ा मिल गया |
हमारा एक सीनियर एक बार अपने जूनियर्स से बोला,तुम प्लेन को हवा में उड़ाने के लिए मेंटेनेंस करते हो ,यही करते रहो,ध्यान से ,लेकिन यदि तुम ही हवा में उड़ने लगे ,तो प्लेन नहीं उड़ पायेगा,बहुत गंभीर बात है ,शायद इसे ही अहंकार या अराजकता कह सकते हैं |
|| जय भारत माता ||

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