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"हम कैसे पढ़ाये और पढ़े?"

Posted On: 25 Jul, 2014 Others में

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pkdubey

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आजकल अधिकतर अभिवावकों की चिंता है,बच्चे पढ़ते नहीं | और बच्चों की चिंता है -कितना पढ़े यार,कुछ कम पढ़ना पढ़े तो ही अच्छा है| कुछ अभिवावक सोचते उन्होंने अपने बच्चों पर उचित उम्र में ध्यान नहीं दे पाया,अधिक व्यस्तता के कारण और कुछ बच्चे सोचते उन्होंने पढ़ने की उम्र में सही से पढ़ नहीं पाया, या तो अपनी गलतियों के कारण अथवा माँ -पिता की उपेक्षा के कारण | जब कि,एक तथ्य कुछ अलग ही है,जिसे हम अनदेखा करते हैं-पढाई कोई अज़ूबा नहीं और न ही कुछ सीखने के लिए बिलायत जाने की जरूरत है | बस,हमें थोड़ा ध्यान से जीने की जरूरत है,हर बच्चे में कुछ जानने की जिज्ञासा जन्मजात प्रवृत्ति है,पर हो सकता है,वह दिन में १० बार ग से गाय कहे और हम उसे ग से गमला कहने के लिए बाध्य करें,बस यही मूल समस्या है |
मैं कभी -कभी मुंबई के स्टेशन और लोकल ट्रैन में कुछ छात्रों को मैथमेटिक्स -कैलकुलस के नोटबुक पढ़ते हुए देखता हूँ,ऐसा लगता मानो वो solution याद करने का प्रयत्न कर रहे हों| तब मैं सोचता यार अपने उधर तो हर छात्र न जाने कितनी रद्दी तैयार कर देता,मैथ लगाते लगाते,पर यह तो ऐसे ही काम चला लेते,इनका भी कांसेप्ट सही है |
मेरे अनुभव से तो,मैथ ,साइंस फ्रेश मूड में सॉल्व की जाती है और हिस्ट्री,लिटरेचर थके मन-मष्तिष्क को कुछ राहत देने के लिए पढ़ी जाती है |
कुछ कठिन प्रयास अभिवावक को भी करने पढ़ते हैं,एक बार जब मैं ननिहाल में था,मेरे नाना जी से कोई मिलने आया (जिस वर्ष उन्होंने घोड़ी रखी हुयी थी,जिनके पास घोड़ी रहती या अन्य परिचित मित्र गण घोड़ी देखने आते),उससे बात चीत के दौरान नाना जी ने कहा,बहुत मेहनत की मैंने अपने जीवन में,सुबह ३ बजे उठकर हल-बैल तैयार करके १० बजे तक खेत जोतना,इसके बाद स्नान कर के कचाटीपुर जाना (सरदार पटेल इण्टर कॉलेज,कचाटीपुर ,इंदरगढ़ ,कन्नौज) ,सभी अध्यापकों से मिलकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में पूछना,उनसे कहना,थोड़ा ध्यान रखना साहब बच्चों का,बापस आकर १-२ घंटे आराम के बाद पुनः खेत में काम पर लग जाना ,तब जाकर आज ये सब बाल -बच्चे अपने रास्ते पकड़ पाये |
मेरे बाबा जी तो खेतों में काम करते वक्त भी इंग्लिश वर्ड्स की स्पेलिंग वगैरह पूछते रहते थे और जब मैं एक वर्ष पिता जी के साथ रहा,तो जिस दिन स्कूल में बीजगणित का टर्न रहता था,पिता जी अंकगणित खुद पढ़कर,उसी दिन शाम को,मुझे समझाते थे |
आजकल अधिकतर इंसान सुबह से शाम तक देश दुनिया की हर खबर पर ध्यान रखेगा,पर बच्चों की पुस्तकें,उनकी पढाई,उनके नोटबुक्स कभी नहीं चेक करेगा,अरे कम से कम देखो तो मेरा बच्चा क्या लिख रहा ,कैसा लिख रहा,किताब का कोई पेज अभी तक पढ़ा या नहीं| स्कूल भी जाता है या रास्ते से ही बहाना बनाकर लौट आता आदि -आदि |
पर माँ -बाप को अपने बच्चे की बाल चंचलता को देखकर यह लगता ,यह तो मुझसे भी कई गुना होशियार है,बस यही एक बड़ी भूल है क्यूंकि बाप,बाप होता है |
हमारे बाबा जी कहते,हम तुम्हारे बाबा हैं ,कितना भी पढ़ लोगे,फिर भी मेरा अनुभव तुम्हारी पढ़ाई से कुछ ज्यादा ही रहेगा |

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