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Harivansh Rai Bachchan Kavita: आदर्श प्रेम

Posted On: 15 Jun, 2013 Others में

काव्य ब्लॉग मंचकविता जो करती है व्यक्त, अव्यक्त भावों को बड़ी सहजता से, जो खोलती है राह नित नयी और करती है मजबूर कुछ कह जाने को

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Harivansh Rai Bachchan Kavita

प्यार किसी को करना लेकिन
कह कर उसे बताना क्या
अपने को अर्पण करना पर
और को अपनाना क्या


Harivansh Rai Bachchan Kavita

गुण का ग्राहक बनना लेकिन
गा कर उसे सुनाना क्या
मन के कल्पित भावों से
औरों को भ्रम में लाना क्या


Harivansh Rai Bachchan Kavita

ले लेना सुगंध सुमनों की
तोड उन्हे मुरझाना क्या
प्रेम हार पहनाना लेकिन
प्रेम पाश फैलाना क्या


Harivansh Rai Bachchan Kavita

त्याग अंक में पले प्रेम शिशु
उनमें स्वार्थ बताना क्या
दे कर हृदय हृदय पाने की
आशा व्यर्थ लगाना क्या

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