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[Amitabh Bachchan] कर लिया राजनीति से किनारा - अमिताभ बच्चन

Posted On: 17 Nov, 2011 Politics में

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amitabh bachchan 'अमिताभ बच्चन का जीवन परिचय

हिंदी फिल्मों के मशहूर और लोकप्रिय अभिनेता अमिताभ बच्चन फिल्म जगत में अपनी अनूठी और विशिष्ट अभिनय प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं. एक बेहतरीन अदाकार, वक्ता और टेलीविजन मेजबान अमिताभ बच्चन राजनीति में भी अपना भाग्य आजमा चुके हैं. अमिताभ हरिवंश राय बच्चन जैसे प्रतिष्ठित हिंदी कवि और पूर्व रंगकर्मी तेजी बच्चन के दो बेटों में सबसे बड़े हैं. इनका जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के इलाहाबाद में हुआ था. जिस समय अमिताभ बच्चन का जन्म हुआ उस समय उनका नाम इंकलाब रखा गया था. लेकिन साथी कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर हरिवंशराय बच्चन ने इंकलाब नाम बदलकर अमिताभ रख दिया. अमिताभ बच्चन की प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद स्थित ज्ञान प्रबोधिनी और ब्वॉयज हाई स्कूल से संपन्न हुई. उसके बाद अमिताभ बच्चन नैनिताल स्थित शेरवुड स्कूल चले गए. स्कूल की पढ़ाई समाप्त होने के बाद अमिताभ बच्चन ने विज्ञान विषय के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लिया. आयु के बीसवें दशक में फिल्मों में कॅरियर बनाने के उद्देश्य से अमिताभ बच्चन ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी. अमिताभ बच्चन के परिवार में पत्नी जया बच्चन, बेटा अभिषेक बच्चन, बेटी श्वेता नंदा, पुत्रवधू ऐश्वर्या राय बच्चन हैं. हाल ही में इनकी पौत्री का जन्म हुआ है.


अमिताभ बच्चन का फिल्मी सफर

अमिताभ ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत मृणाल सेन निर्देशित फिल्म भुवन शोम में अपनी आवाज देकर की. अभिनय के क्षेत्र में उनका आगमन 1969 में ‘सात हिन्दुस्तानी’ से हुआ. हालांकि फिल्म कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पायी पर अमिताभ को राष्ट्रीय पुरस्कार (नवागंतुक अभिनेता) से सम्मानित किया गया. लेकिन इस फिल्म के बाद उनकी अभिनय प्रतिभा कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. 1971 में उन्होंने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ ‘आनंद’ में काम किया,  जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सह अभिनेता का पुरस्कार प्रदान किया गया. इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन की असफलता का दौर प्रारंभ हो गया. 17 असफल फिल्में करने के बाद भी अमिताभ एक बड़ी सफलता के इंतज़ार में थे. इसी समय 1973 में प्रकाश मेहरा ने उन्हें ‘जंजीर’ फिल्म में काम करने का अवसर दिया. यह फिल्म उस समय की एक सफल फिल्म बन गई. इस फिल्म से उन्हें ‘एंग्री यंग मैन‘ का नाम मिला. इसके बाद आई दीवार, शोले, त्रिशूल, मुकद्दर का सिकंदर, काला पत्थर और शक्ति जैसी सफल फिल्मों में भी उन्होंने एंग्री यंग मैन की ही भूमिका निभाई. चुपके-चुपके और कभी-कभी जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा साफ प्रदर्शित हुई. 1978 में आई फिल्म डॉन  ने अमिताभ बच्चन को बॉलिवुड का बादशाह बना दिया. उनकी प्रसिद्धि का आलम यह था कि जिस भी सिनेमाघर में उनकी फिल्म लगती उसके बाहर दर्शकों की लाइन लग जाती. कालिया, इस दौरान नमक हलाल, लावारिस, शराबी, अग्निपथ, इंसानियत, दोस्ताना, शान आदि अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत प्रमुख फिल्में थीं. वर्ष 1982 में फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान उन्हें बहुत गहरी और प्राणघातक चोट लगी जिससे उभरने में उन्हें काफी लंबा समय लगा. अमिताभ बच्चन ने बहुत बड़ी लागत के साथ एबीसीएल नामक एक निर्माण कंपनी भी खोली जो फिल्में और टी.वी. सीरियलों का निर्माण करती थी. लेकिन कुछ ही समय में यह कंपनी दिवालिया घोषित हो गई. इससे अमिताभ बच्चन को बहुत बड़ा आर्थिक घाटा हुआ. लेकिन बाद में एक ब्रिटिश कार्यक्रम की तर्ज पर बना कौन बनेगा करोड़पति ने एक बार फिर अमिताभ बच्चन को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. इस गेम शो की मेजबानी ने उन्हें लोकप्रियता के साथ-साथ आर्थिक तौर पर भी मजबूती प्रदान की. तब से लेकर अब तक अमिताभ बच्चन की ज्यादातर फिल्में सफल ही रही हैं. यहां तक की अब फिल्मों की असफलता का अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ता. शूट आउट एट लोखंडवाला, सरकार राज, पा, अमिताभ बच्चन की बेहतरीन फिल्मों में से हैं.


amitabh bachchan and amar singhअमिताभ बच्चन का संक्षिप्त राजनैतिक कॅरियर

कुली फिल्म में लगी चोट से उभरने के बाद अमिताभ बच्चन ने कुछ समय के लिए फिल्मों से संन्यास ले लिया था. इस दौरान उन्होंने अपने पारिवारिक मित्र राजीव गांधी के सहयोग से राजनीति में प्रवेश किया. अमिताभ बच्चन ने आठवीं लोकसभा के लिए इलाहाबाद सीट से एच.एन. बहुगुणा (उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री) के विरुद्ध चुनाव लड़ा. बहुत भारी अंतर से अमिताभ बच्चन ने एक अनुभवी राजनेता को हराया. लेकिन तीन वर्ष बाद ही राजनीति से त्रस्त आकर अमिताभ बच्चन ने राजनीति को अलविदा कह दिया. लेकिन इनके हटते ही अमिताभ बच्चन और उनके छोटे भाई अजिताभ बच्चन का नाम बोफोर्स घोटाले में उछ्ला. अमिताभ बच्चन ने इन दोषारोपणों का पुरजोर विरोध किया. समाजवादी पार्टी के सदस्य रह चुके अमर सिंह एक जमाने में अमिताभ बच्चन के बहुत गहरे मित्र हुआ करते थे. उन्हीं के कहने पर अमिताभ ने अपनी पत्नी और फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी बच्चन को राजनीति में जाने का सुझाव दिया था.


अमिताभ बच्चन से जुड़े विवाद

  • वर्ष 2007 में फैजाबाद कोर्ट ने अमिताभ बच्चन को बाराबंकी में दलितों की जमीन हथियाने और झूठे दस्तावेजों के आधार पर खुद को किसान दर्शाने का आरोपी पाया. हालांकि अमिताभ बच्चन को इन आरोपों से मुक्त किया गया लेकिन अमिताभ बच्चन को भी इस जमीन पर अपने दावे को छोड़ना पड़ा.
  • 2008 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने अमिताभ बच्चन पर यह आरोप लगाए कि वे मुंबई से ज्यादा अपने गृहनगर इलाहाबाद और उत्तर-प्रदेश को अहमियत देते हैं. वह हमेशा वहीं के लोगों की भलाई के लिए कार्य करते हैं.

अमिताभ बच्चन को दिए गए सम्मान और पुरस्कार

राष्ट्रीय और फिल्मफेयर अवॉर्डों के अलावा अमिताभ बच्चन को कई अन्य पुरस्कार भी प्रदान किए गए हैं. वर्ष 1991 में अमिताभ बच्चन पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीववमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. वर्ष 2000 में अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक की उपाधि दी गई. वर्ष 1984 में भारत सरकार द्वारा अमिताभ बच्चन को पद्मश्री और 2001 में पद्म विभूषण दिया गया. 2007 में फ्रेंच सरकार द्वारा अमिताभ बच्चन को लीजन ऑफ ऑनर से अलंकृत किया गया. जून 2000 में अमिताभ बच्चन पहले जीवित एशियाई कलाकार बने जिनका मोम का पुतला मैडम तुसाद म्यूजियम में लगाया गया. 2004 में अमिताभ बच्चन को झांसी विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय(2006), डी मोंटफोर्ड यूनिवर्सिटी (2006), लीड्स मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी, यार्कसायर (2007), क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, ब्रिसबेन (2011) द्वारा सम्मान के रूप में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्रदान की गई.


अमिताभ बच्चन का राजनीति में प्रवेश तो बहुत जोर-शोर से हुआ लेकिन वह ज्यादा समय तक अपने लिए स्थान नहीं बना पाए. भले ही वह एक अच्छे और लोकप्रिय अभिनेता हों लेकिन उनकी राजनैतिक और सामाजिक छवि आरोपों से घिरी रही है.


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