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बजट में इस्तेमाल होने वाले ‘ब्रीफकेस’ का क्या है इतिहास, जानें कैसे शुरू हुई यह परम्परा

Posted On: 3 Jul, 2019 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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यूनियन बजट 2019 जल्द ही पेश होने जा रहा है। 5 जुलाई को आप वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करते हुए देखेंगे। क्या आपने बजट पेश करने आए वित्त मंत्री के पास एक ‘ब्रीफकेस’ को नोटिस किया है? इस साल दूसरी बार यह ब्रीफकेस आपको दिखेगा, क्योंकि चुनाव से पहले सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था। आइए, हम आपको बताते हैं बजट में कैसे हुई इस ब्रीफकेस की एंट्री।

 

 

कैसे हुई थी शुरुआत?
‘बजट’ नाम भी ब्रीफकेस से जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश संसद को सभी संसदीय परंपराओं की जननी माना जाता है, इसलिए ‘बजट’ भी इसका अपवाद नहीं है। दरअसल, 1733 में जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ एक्सचेकर) रॉबर्ट वॉलपोल संसद में देश की माली हालत का लेखा-जोखा पेश करने आए, तो अपना भाषण और उससे संबद्ध दस्तावेज चमड़े के एक बैग (थैले) में रखकर लाए। चमड़े के बैग को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता है। बस, इसीलिए इस परंपरा को पहले बुजेट और फिर कालांतर में बजट कहा जाने लगा। जब वित्त मंत्री चमड़े के बैग में दस्तावेज लेकर वाषिर्क लेखा-जोखा पेश करने सदन में पहुंचता तो सांसद कहते – ‘बजट खोलिए, देखें इसमें क्या है।’ या ‘अब वित्त मंत्री जी अपना बजट खोलें।’ इस तरह ‘बजट’ नामकरण साल दर साल मजबूत होता गया। अंग्रेजों ने इस परंपरा को भारत में भी बढ़ाया जो आज भी जारी है। आजादी के बाद पहले वित्त मंत्री आरके शानमुखम चेट्टी ने 26 जनवरी 1947 को जब पहली बार बजट पेश किया तो लेदर बैग के साथ संसद पहुंचे थे।

 

 

कई बार बदला रंग
इतने सालों में इस बैग का आकार लगभग बराबर ही रहा। हालांकि, इसका रंग कई बार बदला है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 में परिवर्तनकारी बजट पेश किया तो वह काला बैग लेकर पहुंचे थे। जवाहरलाल नेहरू, यशवंत सिन्हा भी काला बैग लेकर बजट पेश करने पहुंचे थे, जबकि प्रणब मुखर्जी लाल ब्रीफकेस के साथ पहुंचे थे। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के हाथों में ब्राउन और रेड ब्रीफकेस दिखा था। इस साल अंतरिम बजट पेश करने वाले कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल लाल ब्रीफकेस के साथ सदन में पहुंचे थे।…Next

 

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