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रक्षामंत्री ने सुखोई-30 में उड़ान भरकर रचा इतिहास, आसमान में रहीं इतनी देर

Posted On: 17 Jan, 2018 Politics में

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रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राजस्थान के जोधपुर में लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई में ऐतिहासिक उड़ान भरी। रक्षामंत्री को सुखोई की उड़ान भरवाने का जिम्मा 31 स्‍क्‍वाड्रन लॉयन के पास था। सीतारमण पायलट का जी सूट पहनकर कॉकपिट में बैठीं। वे अभियान की तैयारियों और युद्धक क्षमताओं की समीक्षा कर रही हैं। हाल ही में सीतारमण ने आईएनएस विक्रमादित्य पर मिग-29के की सवारी भी की थी। सुखोई-30 एमकेआई परमाणु सक्षम विमान है, जो दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक घुस सकता है। इसमें उड़ान भरकर उन्‍होंने एक इतिहास रच दिया।


nirmala sitharaman sukhoi


लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली पहली महिला रक्षामंत्री


sitaraman


रक्षामंत्री का पद संभालने के बाद से ही सीतारमण जवानों का हौसला बढ़ाती रही हैं। इस उड़ान के साथ वे देश की पहली महिला रक्षामंत्री बन गईं, जिन्होंने लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। उड़ान के दौरान रक्षामंत्री करीब 45 मिनट तक आसमान में रहीं। सीतारमण वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 विमान में सवार हुईं। यह दो सीटर लड़ाकू विमान है। वे पायलट के साथ पिछली सीट पर बैठीं और जोधपुर एयरबेस का चक्कर लगाया। इस दौरान उन्होंने लड़ाकू विमान की तकनीक और हमला करने की रणनीति को भी जाना।


इससे पहले भी लेती रही हैं सैन्‍य तैयारियों का जायजा


nirmala sitharaman


गौरतलब है कि इससे पहले बीते वर्ष रक्षामंत्री भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंची थीं, जहां उन्होंने सैन्य तैयारियों का जायजा लिया। वे अरुणाचल सीमा पर भी पहुंची थीं और चीनी सैनिकों का अभिवादन किया था। बता दें कि सुखोई-30एमकेआई एयरफोर्स का एक अहम हिस्सा है। जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 की दो स्क्वॉड्रन यानी कुल 36 प्‍लेन हैं। भारत के पास 2020 तक कुल ऐसे 270 प्लेन होंगे। ये फाइटर प्लेन अब मिग-21 और मिग-27 की जगह लेंगे।


HAL बना रहा सुखोई-30 MKI


sitharaman


सुखोई 30एमकेआई के डिजाइन का निर्माण रूस के सुखोई कॉरपोरेशन द्वारा किया गया। रूस और भारत ने संयुक्त रूप से इस विमान को बनाने की योजना बनाई थी। इसके बाद इसे बनाने की जिम्मेदारी भारत की हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दे दी गई, जहां काफी प्रयास और कड़ी मेहनत के बाद इसे बनाया गया। असल में एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान एसयू-27 और एसयू-37 फाइटर प्लेन का मिश्रण है। एसयू-30 एमकेआई के विस्तार से पहले से यह दोनों लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हैं। बस फर्क इतना है कि एसयू-30 एमकेआई नई तकनीक से पूरी तरह लैस है और इसके उड़ने की क्षमता भारत के अन्य फाइटर विमानों से काफी अधिक है।


नई तकनीक से पूरी तरह लैस है लड़ाकू विमान


sukhai 30 mki


भारतीय वायु सेना में शामिल हो चुका यह लड़ाकू विमान नई तकनीक से पूरी तरह लैस है। अपनी उड़ने की क्षमता, हवा और जमीन में तेजी से मिसाइलें दागने के कारण यह भारतीय वायु सेना का सबसे अहम लड़ाकू विमान बन चुका है। इस विमान को टाइटेनियम और उच्च तीव्रता वाले एल्यूमीनियम धातुओं से तैयार किया गया है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि भारत की क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण इस लड़ाकू विमान की मदद से ही किया गया था। साल 2016 में भारतीय वायुसेना के नासिक एयरबेस पर ढाई टन वजनी ब्रह्मोस मिसाइल को इस लड़ाकू विमान में अटैच कर आसमान में परीक्षण के लिए भेजा गया था…Next


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