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सियासत का स्टार्टअप स्टेट बन गया है तमिलनाडु, नई पार्टियों के साथ 3 दिग्‍गज!

Posted On: 17 Mar, 2018 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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तमिलनाडु की सियासत का अलग ही मिजाज है। यहां राजनीतिक गलियारों में हलचल जारी है। पिछले दिनों सूबे की सियासत में कुछ बड़े और नए घटनाक्रम हुए। पहले फिल्‍मस्‍टार कमल हासन ने अपनी नई पार्टी की घोषणा की। इसके बाद तमिलनाडु की पूर्व मुख्‍यमंत्री जयललिता की खास रहीं शशिकला के भतीजे दिनाकरण ने नई पार्टी लॉन्‍च की। तीसरी पार्टी का एलान मेगास्‍टार रजनी‍कांत की ओर से हो सकता है, क्‍योंकि वे भी सियासत में एंट्री की घोषणा कर चुके हैं। आइये आपको बताते हैं क्‍या है इन दिनों तमिलनाडु की सियासत का हाल।

 

 

राजनीति में दो नए और एक पुराना खिलाड़ी

पिछले एक महीने में तमिलनाडु सियासत का स्टार्टअप स्टेट बन गया है। पहले फरवरी में कमल हासन ने अपनी पार्टी की घोषणा की, जिसका नाम है ‘मक्कल निधि मय्यम’। इसके बाद टीटीवी दिनाकरण ने 15 मार्च को पार्टी लॉन्‍च की, जिसका नाम रखा ‘अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम यानी एएमएमके’। इस बात की प्रबल संभावना है कि जल्द ही रजनीकांत भी इनकी तरह अपनी नई पार्टी लॉन्‍च कर सकते हैं। यानी प्रदेश को तीन नई पार्टियां और सूबे की सियासत को तीन दिग्‍गज मिलेंगे। इनमें दो तो सक्रिय राजनीति में नए हैं, जबकि दिनाकरण राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं।

 

सभी कर रहे अलग-अलग विरासत का दावा

इन सभी के बीच सबसे मजेदार बात यह है कि ये सब स्टार्टअप अपनी अलग-अलग विरासत का दावा कर रहे हैं। कमल हासन पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर अपना दावा ठोंक रहे हैं। रजनीकांत जनता के सामने एमजीआर के साथ अपने संबंधों की दुहाई देने में जुटे हैं। वहीं, दिनाकरण अपने आपको जयललिता की विरासत का असली उत्तराधिकारी साबित करने में लगे हैं। मगर दिनाकरण का एएमएमके बनाना एक वैकल्पिक व्यवस्था के अलावा कुछ ज्यादा प्रतीत नहीं होता, क्योंकि उनका मुख्य लक्ष्य असली एआईएडीएमके पर कब्जा करना है।

 

 

मद्रास हाईकोर्ट पर टिकी हैं दिनाकरण की निगाहें

दिनाकरण की निगाहें अब मद्रास हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं। अगर हाईकोर्ट तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर के उस निर्णय को पलट दे, जिसमें स्पीकर ने दिनाकरण से जुड़े 18 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी, तो पलानीस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी। दिनाकरण को लगता है कि सरकार गिरने के बाद जब राज्य में एक बार राष्ट्रपति शासन लगा, तो एआईएडीएमके का पूरा कैडर उनके पीछे आ जाएगा। शायद यही वजह है कि दिनाकरण ने मदुरै में अपनी ताकत दिखाने में पूरा जोर लगा दिया।

 

खुद को बता रहे अम्‍मा का नजदीकी

टीटीवी दिनाकरण ने अपनी नई पार्टी का नाम ‘अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम’ रखा है। दिनाकरण अम्मा यानी जयललिता से अपनी नजदीकी प्रदर्शित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे। 15 मार्च को मदुरै में एक पब्लिक मीटिंग में दिनाकरण ने पार्टी के झंडे का अनावरण किया, जिसमें जयललिता की तस्वीर लगी हुई है। ये महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि दिनाकरण खुद को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का उत्तराधिकारी दिखाना चाहते हैं। जयललिता की परंपरागत सीट आरके नगर से दिसंबर में उपचुनाव में जीतने के बाद दिनाकरण का मदुरै में पार्टी का एलान पूरी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि बाद में वे जयललिता की विरासत पर पूरा हक जता सकें।

 

 

 

डीएमके के लिए दिनाकरण ज्यादा बड़ा खतरा

राजनीति में एंट्री मारने वाले फिल्म स्टार कमल हासन और रजनीकांत तमिल फिल्मों के बड़े कलाकार हैं और उनका विशाल प्रशंसक वर्ग भी है। मगर उनकी सबसे बड़ी समस्या ये है कि उन्हें चुनाव लड़ने के सामान्य तौर-तरीके के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों पर डीएमके ने भी अपनी पैनी नजर बनाए रखी है। मगर कमल हासन और रजनीकांत के मुकाबले दिनाकरण डीएमके के लिए ज्यादा बड़ा खतरा बन सकते हैं, क्योंकि उन्हें न केवल चुनाव लड़ने का अनुभव है, बल्कि उन्हें जयललिता और शशिकला जैसे धाकड़ नेताओं ने संवारा है…Next

 

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