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K.S. Hegde - पूर्व लोकसभा अध्यक्ष कावदूर सदानंद हेगड़े

Posted On: 30 Sep, 2011 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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justice k.s hegde

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष कावदूर सदानंद हेगड़े का जन्म 11 जून, 1909 को ब्रिटिश आधीन भारत के मद्रास प्रेसिडेंसी के दक्षिणी कनारा में हुआ था. इनका संबंध उडुपी जिला, कर्नाटक के करकला तालुक के कुलीन नयारा बेट्टु बंट परिवार से था. के.एस. हेगड़े के पिता कावदूर सुभैया हेगड़े एक संपन्न व्यक्ति थे. यह अपने सात भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. इसीलिए इनका पालन-पोषण बेहद लाड़-प्यार से हुआ. के.एस. सदानंद एक प्रतिभाशाली छात्र थे. इनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय कावदूर एलिमेंटरी स्कूल और करकला बोर्ड हाई स्कूल में हुई. के.एस. हेगड़े ने आगे की पढ़ाई मैंगलोर के सेंट अलोसियस कॉलेज और मद्रास के लॉ कॉलेज व प्रेसिडेंसी कॉलेज से पूरी की. एक कृषक के तौर पर अपने जीवन की शुरूआत करने वाले के.एस. हेगड़े एक अच्छे वकील भी थे. वर्ष 1933 में सरकारी यचिकाकर्ता के तौर पर के.एस. हेगड़े ने वकालत की शुरूआत की. 1947-1951 में वह सरकारी अभियोजक नियुक्त किए गए. जनता पार्टी के सदस्य रह चुके के.एस. हेगड़े के परिवार में पत्नी मीनाक्षी हेगड़े के अलावा सात बच्चे थे. कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त और लोकपाल बिल से जुड़े आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका के चलते सुर्खियों में आए जस्टिस एन. संतोष हेगड़े, के.एस. सदानंद हेगड़े के पुत्र हैं.


कावदूर सदानंद हेगड़े का राजनैतिक सफर

कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर कावदूर सदानंद हेगड़े वर्ष 1952 में राज्य सभा में चयनित हुए. राज्यसभा सदस्य के पद पर वह 1957 तक काबिज रहे. इस दौरान वह सभापतियों के पैनल, लोक लेखा समिति और नियम समिति के सदस्य बनाए गए. वर्ष 1954 में कावदूर सदानंद हेगड़े को संयुक्त राष्ट्र महासभा की नौवीं बैठक में एक वैकल्पिक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया. वह रेलवे भ्रष्टाचार पूछताछ समिति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शासी निकाय के एक सदस्य थे. वर्ष 1957 में मैसूर उच्च न्यायालय का न्यायाधीश चुने जाने के बाद के.एस. हेगड़े ने राज्यसभा पद से त्यागपत्र दे दिया. न्यायाधीश के पद पर रहते हुए अपने जन कल्याण और निष्पक्ष निर्णयों के कारण वह बहुत जल्दी लोकप्रिय हो गए थे. वर्ष 1966 में दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उन्होंने मैसूर न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया. वर्ष 1967 में राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया. 1973 में जब के.एस. सदानंद के कनिष्ठ को भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया तब सदानंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. 1977 के चुनावों में जनता पार्टी के टिकट पर के.एस. सदानंद बैंगलोर के दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा में चयनित हुए. तत्कालीन लोकसभा स्पीकर द्वारा के.एस. सदानंद को विशेषाधिकार समिति का सभापति बनाया गया. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के उद्देश्य से जब नीलम संजीवा रेड्डी ने लोकसभा अध्यक्ष पद त्याग दिया तब के.एस. हेगड़े को सर्वसम्मति से सदन का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया.


के.एस. हेगड़े का निधन

81 वर्ष की आयु में 24 मई, 1990 को अपने गृहनगर कर्नाटक में के.एस. हेगड़े ने अंतिम सांस ली.


कावदूर सदानंद हेगड़े के मरणोपरांत उनको श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए हेगड़े के नाम पर देराकलत्ते में के.एस. हेगड़े मेडिकल कॉलेज, नित्ते एजुकेशन की एक शाखा, का निर्माण किया गया. इसके अलावा मैंगलोर में शिक्षा और सामुदायिक हितों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से के.एस. हेगड़े के नाम पर एक चैरिटेबल ट्रस्ट की भी स्थापना की गई. इस संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष योग्य व्यक्तियों को अपने प्रभावकारी कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया जाता है.


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