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P.A Sangama - पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा

Posted On: 28 Sep, 2011 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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p.a sangmaपुर्नों अगिटोक संगमा का जीवन परिचय

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पुर्नो अगिटोक संगमा का जन्म 1 सितंबर, 1947 को पश्चिम गारो हिल्स, मेघालय के चपाथी ग्राम में हुआ था. सेंट एंथनी कॉलेज, शिलांग से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद पी.ए. संगमा ने असम के डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंध में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने एल.एल.बी. की परीक्षा भी उत्तीर्ण की. इनके परिवार में पत्नी सोरडनी के. संगमा और चार बच्चे हैं. पी.ए. संगमा की पुत्री अगाथा संगमा उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान लोकसभा की सदस्या हैं जिनके नाम पर भारत की लोकसभा की सबसे कम आयु वाली सदस्या बनने का भी रिकॉर्ड दर्ज है. पी.ए संगमा के पुत्र कोनराड संगमा मेघालय विधान सभा में विपक्ष के नेता हैं.


पी.ए. संगमा का जीवन परिचय

वर्ष 1973 में पी.ए. संगमा प्रदेश यूथ कांग्रेस समिति के अध्यक्ष निर्वाचित हुए. कुछ ही समय बाद वह इस समिति के महासचिव नियुक्त हुए. वर्ष 1975 से 1980 तक पी.ए. संगमा प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव रहे. वर्ष 1977 के लोकसभा चुनावों में पी.ए. संगमा तुरा निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज करने के बाद पहली बार सांसद बने. चौदहवीं लोकसभा चुनावों तक वह इस पद पर लगातार जीतते रहे. हालांकि नौवीं लोकसभा में वह जीत दर्ज करने में असफल रहे थे. वर्ष 1980-1988 तक पी.ए. संगमा केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे. वर्ष 1988-1991 तक वह मेघालय के मुख्यमंत्री भी रहे. 1991 में वह दोबारा केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत कार्यरत हुए. वर्ष 1996 में पुर्नो अगिटोक संगमा लोकसभा अध्यक्ष बनाए गए. वर्ष 1991-1993 में उन्हें केन्द्रीय राज्य मंत्री के तौर पर कोयला मंत्रालय और 1993-1995 श्रम मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभारी बनाया गया. वर्ष 1995-1996 तक यूनियन कैबिनेट मंत्री के तौर पर उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का पदभार सौंपा गया.


वर्ष 1999 में कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद शरद पवार और तारिक अनवर के साथ मिलकर पी.ए. संगमा ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की स्थापना की. शरद पवार के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी से नजदीकी बढ़ जाने के कारण पी.ए. संगमा ने अपनी पार्टी का ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी में विलय कर नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. 10 अक्टूबर, 2005 को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के तौर पर लोकसभा पद से इस्तीफा देने के बाद पी.ए. संगमा फरवरी 2006 में नेशनलिस्ट  कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर संसद पहुंचे. 2008 के मेघालय विधानसभा चुनावों में भाग लेने के लिए उन्होंने चौदहवीं लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. वर्तमान में पी.ए संगमा एन.सी.पी. के महासचिव पद पर कार्यरत हैं.


पुर्नो अगिटोक संगमा की उपलब्धियां और दिए गए सम्मान


  • पी.ए संगमा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षा को विशेष बल दिया. उन्होंने निर्धन और जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए रात्रि विद्यालयों की स्थापना की.

  • सार्वजनिक नेतृत्व के क्षेत्र में पी.ए. संगमा को वर्ष 2003 में मुंबई की दक्षिण भारतीय एजुकेशन सोसाइटी द्वारा सरस्वती एमिनेंस अवार्ड प्रदान किया गया.

  • कॉम्पीटिशन सक्सेस रिव्यू ( सीएसआर – 1998) द्वारा पी.ए. संगमा को मैन ऑफ द ईयर नामित किया गया.

  • श्रमिक वर्ग के हितों के लिए उत्कृष्ट योगदान देने के कारण पी.ए. संगमा को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा द्वारा भारतीय राष्ट्रीय व्यापार संघ का गोल्डन जुबली अवार्ड प्रदान किया गया.

  • संसदीय प्रणाली और श्रमिकों के हितों के लिए कार्य करने के लिए वर्ष 1997 में पी.ए. संगमा को टाटा वर्कर्स का माइकल जॉन रोल ऑफ ऑनर प्राप्त हुआ.

पेशे से प्रोफेसर, वकील और पत्रकार पी.ए. संगमा को लिखने का भी बहुत शौक है. उन्होंने इंटू द थर्ड मिलेनियम: ए स्पीकर पर्सपेक्टिव नामक एक किताब लिखी है. इसके अलावा उन्होंने इंडिया इन आई.एल.ओ. (दो संस्करण) का संपादन भी किया है. पी.ए. संगमा रेड क्रॉस सोसाइटी और यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया से भी जुड़े हुए हैं.


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