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दो साल डिटेंशन सेंटर में बंद रहे वेंकटरमन बाहर निकले तो अंग्रेजों को छोड़ना पड़ा भारत

Posted On: 27 Jan, 2020 Politics में

Rizwan Noor Khan

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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देश को उन्‍नति की ओर ले जाने वाले लोगों की लिस्‍ट में आर वेंकटरमन का नाम बड़े सम्‍मान से दर्ज है। अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में उतरने वाले वेंकटरमन ने लोगों को जेल से छुड़ाने के लिए अर्थशास्‍त्र के साथ वकालत पढ़ी। मद्रास में अंग्रेजों के लिए किरकिरी बन चुके वेंकटरमन को दो साल तक डिटेंशन सेंटर में बंद रखा गया। जब वह बाहर निकले तो अंग्रेजों को भारत छोड़कर भागना पड़ गया। वह कई मंत्रालयों से होते हुए देश के सर्वोच्‍च पद पर पहुंचे। राष्‍ट्रपति बनने तक के सफर में उनके जीवन में कई रोचक घटनाक्रमों ने जगह बनाई। वेंकटरमन की पुण्‍यतिथि के मौके पर नजर डालते हैं उनके रोचक जीवन पर।

 

 

 

 

 

 

अगले सेलेबस को पहले ही पढ़ लेते थे
मद्रास प्रेसीडेंसी में तंजौर जिले के पोट्टूकुट्टई गांव में तमिल ब्राह्मण परिवार में 4 दिसंबर 1910 में जन्‍मे रामास्‍वामी वेंकटरमन बेहद प्रतिभाशाली थे। तेज बुद्धि के धनी वेंकटरमन शुरुआती कक्षा में ही अपनी आगे की कक्षा की पुस्‍तकें पढ़ जाया करते थे। किताबों से उनकी गहरी दोस्‍ती के चलते वह अपने स्‍कूल के सबसे चर्चित और होनहार बच्‍चों में गिने जाते थे।

 

 

 

 

बुलंद की आवाज तो सलाखों के पीछे कैद
युवावस्‍था के दौरान वह स्‍वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। जानकारों के मुताबिक इस दौरान वह रोजाना मार्च का हिस्‍सा बनकर अंग्रेजों के खिलाफ नारेबाजी करते आंदोलन को मुखर बनाने की रणनीतियां तय करते। एक बार आंदोलन के दौरान उनपर सिपाहियों ने लाठियां बरसा दीं। उनके जैसे तमाम लोगों को चोट आई मुकदमे के लिए कई लोगों को तत्‍कालीन सिविल कोर्ट में पेश किया गया, उन लोगों की पैरवी के लिए अच्‍छा वकील नहीं मिलने पर कई लोगों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। कहा जाता है कि इसके चलते वेंकटरमन को 1942 में पकड़कर डिटेंशन सेंटर में डाल दिया गया। यहां वह दो साल तक रहे।

 

 

 

 

अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए बने वकील
इस घटना ने वेंकटरमन की सोच को गहराई तक प्रभावित किया। अर्थशास्‍त्र की पढ़ाई का लक्ष्‍य लेकर चलने वाले वेंकटरमन ने वकालत करने की ठानी। वेंकटरमन ने लोयोला कॉलेज से अर्थशास्‍त्र में मास्‍टर डिग्री हासिल की और साथ ही उन्‍होंने लॉ कालेज मद्रास से वकालत की डिग्री भी ली। आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों की मदद के लिए सिविल कोर्ट में वकालत करने लगे और मद्रास प्रोविंसियल फेडरेशन के सचिव बने। कुछ समय बाद 1935 में वह मद्रास हाईकोर्ट और 1951 में वह सुप्रीमकोर्ट में भी वकालत करने वाले बड़े वकील बन गए।

 

 

 

 

उद्योग जगत और रेलवे में कायापलट
मजबूत राजनीतिक समझ रखने वाले वेंकटरमन की नेतृत्‍व क्षमताओं और उनके काम को देखते हुए उन्‍हें 1947 से 1950 तक देश की पहली संसद का सदस्‍य चुना गया। इसके बाद वह 1953 से 1954 तक कांग्रेस के सचिव रहे। 1967 में वेंकटरमन को योजना आयोग का सदस्‍य बनाया गया। इस दौरान उन्‍होंने रेलमार्ग, सड़क यातायात, उद्योग समेत कई विभागों में काम करते हुए कायापलट कर दिया।

 

 

 

 

वित्त, रक्षा, गृह मंत्रालयों से होते हुए राष्‍ट्रपति
अपनी नीतियों और दूरदर्शिता के चलते नामचीन हो चुके वेंकटरमन 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार में वित्‍त मंत्री बनाए गए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दूसरे कार्यकाल के दौरान 1982 में वेंकटरमन को रक्षामंत्री नियुक्‍त किया गया। रक्षामंत्री रहते हुए वेंकटरमन ने सैन्‍य हथियारों को डेवलप करने और सेना की मूलभूत समस्‍याओं को दूर करने का काम किया। देश के प्रमुख नेताओं में शुमार हो चुके वेंकटरमन गृह मंत्री भी बने और 1984 में देश के सातवें उप राष्‍ट्रपति बने। 1987 में राजीव गांधी की सरकार में वह देश के आठवें राष्‍ट्रपति नियुक्‍त किए गए।

 

 

सभी तस्‍वीरें ट्विटर से।

 

 

 

आर्मी अस्‍पताल में भर्ती
आम व्‍यक्ति की तरह जीवन की शुरुआत करने वाले वेंकटरमन ने अपनी वाकपटुता, बुद्धिकौशल और निणर्यकुशलता के कारण हर जगह नाम कमाया। वेंकटरमन को 2009 में यूरोसेप्सिस की शिकायत के बाद दिल्‍ली के आर्मी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। अस्‍पताल में करीब 15 दिन एडमिट रहे वेंकटरमन का 27 जनवरी 2009 को निधन हो गया। वेंकटरमन ने उद्योग विकास, गांधी परिवार से जुड़ाव जैसे तमाम विषयों पर दर्जन भार से ज्‍यादा किताबें लिखीं। वेंकटरमन पर भी कई लेखकों ने किताबें लिखी हैं।…NEXT

 

 

 

 

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