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आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं गोवा के नए सीएम प्रमोद सावंत, मनोहर पर्रिकर ने सिखाए थे राजनीति के दांवपेंच

Posted On: 19 Mar, 2019 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद प्रमोद सावंत ने गोवा की कमान अपने हाथों में ली है। 46 वर्षीय सावंत गोवा में बीजेपी के अकेले विधायक हैं, जो आरएसएस काडर से हैं। गोवा के सीएम बनने से पहले वह पार्टी के प्रवक्ता और गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं।
आइए, जानते हैं गोवा के नए सीएम से जुड़ी खास बातें।

 

फ्लैशबैक : मनोहर पर्रिकर से हाथ मिलाते हुए प्रमोद सावंत

 

आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया है ग्रेजुएशन
प्रमोद सावंत ने आयुर्वेदिक चिकित्सा में महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गंगा एजुकेशन सोसायटी से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद उन्होंने सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन पुणे की तिलक महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से किया। प्रमोद सावंत किसान और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रेक्टिशनर हैं।

 

 

ऐसे शुरू हुआ था कॅरियर, सबसे कम उम्र में बने थे विधानसभा के अध्यक्ष
सावंत ने आयुर्वेद औषधि में ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन सामाजिक कार्य में किया। उन्होंने मेडिको-लीगल सिस्टम का भी अध्ययन किया है। उनकी राजनीति में एंट्री साल 2008 में बीजेपी नेतृत्व के आग्रह के बाद हुई। सांकेलिम (अब साखली) सीट खाली हुई थी जिससे उनको चुनाव लड़ने को कहा गया था। उस समय वह मापुसा स्थित उत्तरी जिला अस्पताल में आयुर्वेद के डॉक्टर के तौर पर तैनात थे। बीजेपी नेतृत्व के आग्रह के बाद उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ा।
2017 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बनी, तब उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। वह किसी भी विधानसभा सबसे कम उम्र के अध्यक्ष थे। वह नेतृत्व के लिए किस तरह से पसंदीदा लीडर थे, इस बात को इससे ही समझा जा सकता है कि जब भी पर्रिकर के विकल्प की बात की गई तो उनका नाम प्रमुख रहा। सन 2017 के विधानसभा चुनाव में डॉ प्रमोद सावंत ने 10,058 वोट हासिल करके कांग्रेस के धर्मेश प्रभुदास सगलानी को मात दी थी। उन्होंने सगलानी से 32% अधिक वोट हासिल किए थे। साल 2012 के चुनाव में प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के प्रताप गौंस को हराया था। सावंत को 14,255 वोट मिले थे।

 

 

मनोहर पर्रिकर से ही सीखें थे राजनीति के दांवपेंच
माना जाता है कि पर्रिकर के मातहत ही उन्होंने राजनीति सीखी थी और वह उनकी पसंद भी थे। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के प्रति सावंत की वफादारी उन्हें पर्रिकर के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करती है।….Next

 

 

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