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आम कामगार से मुख्‍यमंत्री कैसे बने केसीआर, जानिए हार से निराश होने की बजाय संघर्ष की दास्‍तां

Posted On: 17 Feb, 2020 Politics में

Rizwan Noor Khan

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने राज्य का मुखिया बनने से पहले सफलता हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष किया है। करियर के पहले विधानसभा चुनाव में हारकर निराश होने की बजाय उठ खड़े होने वाले केसीआर को बड़ी संख्‍या में युवा अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। केसीआर के जन्‍मदिन पर जानते हैं उनके जीवन के कुछ रोचक पहलू।

 

 

 

 

जॉब फर्म में रोजगार सलाहकार
मेदक जिले के चिंतामदका गांव में कलवाकुंतला राघव राव और वेंकटम्‍मा के घर 17 फरवरी 1954 को जन्‍में कलवाकुंतला चंद्रशेखर राव बचपन से तीक्ष्‍ण बुद्धि के थे। स्‍कूल के दिनों में उनकी वाकपटुता और ज्ञान से लोग सहज ही प्रभावित हो जाते थे। कॉलेज के दिनों में अपने नाम के शार्ट फॉर्म केसीआर से वह चर्चित होने लगे। जेब खर्च के लिए वह खाड़ी देशों में लोगों को काम देने वाली एक जॉब फर्म में रोजगार सलाहकार के तौर पर काम करने लगे।

 

 

 

 

यूथ पर केसीआर का गहरा प्रभाव
उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान अपनी लीडरशिप क्‍वालिटी के चलते वह छात्रसंघ चुनावों में भी भागीदारी लेते और छात्र आंदोलनों का नेतृत्‍व करते। साहित्‍य में रुचि रखने वाले केसीआर ने लिटरेचर में मास्‍टर्स की डिग्री हासिल की लेकिन वह साहित्‍य के क्षेत्र में जाने की बजाय छात्र राजनीति का अहम हिस्‍सा बन गए। केसीआर ने छात्रों के हितों के लिए कई आंदोलनों को जन्‍म दिया और सफलता भी पाई।

 

 

 

 

यूथ कांग्रेस से शुरुआत और टीडीपी
छात्रों के बीच मजबूत पकड़ होने के कारण वह यूथ कांग्रेस पार्टी के अहम पदों पर रहे और पार्टी का खूब प्रचार प्रसार किया। 1983 के विधानसभा चुनाव के दौरान केसीआर तेलगू देशम पार्टी के साथ जुड़ गए। विधानसभा चुनाव में केसीआर की युवाओं पर मजबूती भुनाने के लिए टीडीपी ने सिद्दीपेट सीट से टिकट दिया। इस चुनाव में सिद्दीपेट सीट से कांग्रेस के दिग्‍गज नेता मदन मोहन चुनाव लड़ रहे थे।

 

 

 

 

 

पहले चुनाव में हार से नहीं हुए निराश
केसीआर को अपने राजनीतिक करियर के पहले विधानसभा चुनाव में मदन मोहन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद कई साथियों ने केसीआर का साथ छोड़ दिया तो कई ने राजनीति छोड़ने की सलाह भी दी। लेकिन, केसीआर ने हौसला नहीं खोया और 1985 के चुनाव में दोबारा खड़े हुए और जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने। केसीआर सिद्दीपीट से लगातार 5 बार विधायक बने।

 

 

 

तेलंगाना के पहले मुख्‍यमंत्री होने का गौरव
अलग राज्‍य तेलंगाना की मांग करते हुए केसीआर ने तेलंगाना राष्‍ट्र समिति पार्टी का गठन किया। तेलंगाना राज्‍य के गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में टीआरएस ने राज्‍य में केसीआर के नेतृत्‍व में सरकार बनाई। केसीआर तेलंगाना के पहले मुख्‍यमंत्री बनने वाले नेता हैं और वह वर्तमान में भी तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री हैं। केसीआर कई बार सांसद और विधायक रहने के अलावा आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री और और आंध्र प्रदेश असेंबली में डिप्टी स्‍पीकर जैसे महत्‍वपूर्ण पदों पर भी रहे हैं।…NEXT

 

 

 

 

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