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इतिहास का वो दिन जब कश्मीर बना था भारत का हिस्सा, जानें विलय की कहानी

Posted On: 6 Aug, 2019 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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70 साल से जिस मुद्दे की मांग उठ रही थी,  उसे पूरा करते हुए मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया है। सोमवार को सोशल मीडिया पर कश्मीर पर हुए इस फैसले के समर्थन और आलोचना में पोस्ट-ट्वीट देखने को मिले। वहीं, इतिहास के पन्नों को पलटे तो पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर कैसे बना भारत का हिस्सा। 26 अक्टूबर 1947 का ऐतिहासिक दिन, जिससे जुड़े किस्से हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गए।

 

 

तीन रियासतों ने विलय से किया था इंकार
15 अगस्त, 1947 को भारत की आजादी के बाद ज्यादातर देशी रियासतों या रजवाड़ों ने अपना विलय भारत में कर लिया। लेकिन तीन रियासतों के शासकों ने भारत के साथ विलय से इनकार किया। ये तीन शासक जूनागढ़ के नवाब, हैदराबाद के निजाम और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह थे। 16 मार्च, 1846 को ब्रिटिश के कब्जे में आने के बाद कश्मीर एक देशी रियासत बन गया था। अंग्रेजों ने बाद में इसे गुलाब सिंह को दे दिया था, जो उस समय जम्मू के राजा थे। भारत में विलय के समय कश्मीर के शासक रहे महाराजा हरि सिंह उन्हीं गुलाब सिंह के वंशज थे।

 

 

आजादी के बाद कश्मीर पर थी पाकिस्तान की नजर
कश्मीर में मुस्लिमों की बड़ी आबादी होने के कारण जिन्ना सोचते थे कि कश्मीर उनके देश का हिस्सा बन जाएगा। 15 अगस्त, 1947 को आजादी मिलने के कई हफ्तों बाद हरि सिंह ने अपनी रियासत को पाकिस्तान या भारत के साथ विलय की इच्छा नहीं जताई। फिर पाकिस्तान ने ताकत के बल पर जम्मू-कश्मीर को हड़पने की योजना बनाई। पाकिस्तान ने महाराजा हरि सिंह से जम्मू-कश्मीर को छीनने के लिए कबायलियों की एक फौज भेजने का फैसला किया। 24 अक्टूबर, 1947 को तड़के हजारों कबायली पठानों ने कश्मीर में घुसपैठ को अंजाम दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर की ओर रुख किया जहां से हरि सिंह शासन करते थे। संकट के इस समय में महाराजा हरिसिंह ने भारत से मदद की अपील की। 25 अक्टूबर को सरदार पटेल के करीबी वीपी मेनन को विमान से श्रीनगर भेजा गया। वीपी मेनन कश्मीर के भारत में विलय के लिए हरि सिंह की मंजूरी लेने के लिए गए थे।

 

 

इस तरह हुआ विलय और कश्मीर बना भारत का हिस्सा
26 अक्टूबर को हरि सिंह और उनका दरबार जम्मू शिफ्ट हो गया ताकि हमलावर कबायलियों से सुरक्षित रहें। मेनन के कश्मीर पहुंचने के बाद हरि सिंह से कश्मीर के भारत में विलय की बात पक्की हो गई और विलय के दस्तावेजों पर हरि सिंह ने हस्ताक्षर कर दिए। इस तरह से जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय का काम पूरा हो गया…Next

 

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