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P.Chidambaram - केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम

Posted On: 26 Aug, 2011 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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p.chidambaramपलानीअप्पन चिदंबरम का जीवन परिचय

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार की कैबिनेट में केन्द्रीय गृह मंत्री के पद पर कार्यरत, पी. चिदंबरम का जन्म 16 सितंबर, 1945 को तमिलनाडु के छोटे से गांव कनाडुकथन के एक शाही परिवार में हुआ था. इनका वास्तविक नाम पलानीअप्पन चिदंबरम है. आरंभिक शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल, चेन्नई से पूरी करने के बाद पी. चिदंबरम ने प्रेसिडेंसी कॉलेज, चेन्नई से विज्ञान में सांख्यिकी विषय के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन में दाखिला लिया. यहां से पी. चिदंबरम ने व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की. पी. चिदंबरम ने अपने कॅरियर की शुरुआत चेन्नई उच्च न्यायालय में वकालत से की. वर्ष 1984 में वह वरिष्ठ वकील के तौर पर नामित हुए. दिल्ली और चेन्नई के उच्च न्यायालयों में पी. चिदंबरम के चैंबर भी हैं. विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों समेत पी. चिदंबरम सर्वोच्च न्यायालय में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं. पी. चिदंबरम के परिवार में पत्नी नलिनी चिदंबरम और एक बेटा है. पी. चिदंबरम के दादा और परिवार के कई बड़े सदस्य इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडियन बैंक, अन्नामलाई यूनिवर्सिटी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सह-संस्थापक भी थे.


पी. चिदंबरम का व्यक्तित्व

पी. चिदंबरम की छवि कांग्रेस के भीतर एक कुशल रणनीतिकार की है. वह एक मंझे हुए राजनेता हैं. वकालत और राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले पी. चिदंबरम अपनी प्रतिबद्धताओं को लेकर भी बहुत गंभीर रहते हैं.


पी. चिदंबरम का राजनैतिक सफर

पी. चिदंबरम ने वर्ष 1972 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की सदस्यता ग्रहण की. वह 1973 में तमिलनाडु में युवा कांग्रेस अध्यक्ष और तमिलनाडु कांग्रेस प्रदेश समिति के महासचिव भी रह चुके हैं. वर्ष 1984 में तमिलनाडु के शिवगंगा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीतने के साथ पी. चिदंबरम ने सक्रिय राजनीति में प्रदार्पण किया. इस सीट पर उन्होंने लागातार 6 बार तक जीत दर्ज की. राजीव गांधी सरकार के अंतर्गत पी. चिदंबरम कार्मिक मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय में उप-मंत्री के तौर पर कार्य कर चुके हैं. इस कार्यकाल के दौरान पी. चिदंबरम को चाय के दामों को नियंत्रित कैसे किया जाए, जैसे पेचीदा दायित्व सौंपे गए थे. वर्ष 1986 में पी. चिदंबरम को लोकशिकायत और पेंशन मंत्रालय के साथ कार्मिक मंत्रालय में भी मंत्री पद सौंप दिया गया. इसी वर्ष अक्टूबर में पी. चिदंबरम को केन्द्रीय गृह मंत्रालय में, आंतरिक सुरक्षा मंत्री का पदभार प्रदान किया गया.  वर्ष 1991 में पी. चिदंबरम को राज्य मंत्री के पद पर वाणिज्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभारी बनाया गया. वर्ष 1995 में वह दोबारा इस पद पर आसीन हुए. वर्ष 1996 में केन्द्रीय कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र देने के बाद पी. चिदंबरम तमिलनाडु की कांग्रेस इकाई, तमिल मानिला कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए. 1996 के आम चुनावों के दौरान टीएमसी ने कुछ विपक्षी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों को मिलाकर गठबंधन सरकार का निर्माण किया. इस दौरान पी. चिदंबरम को कैबिनेट मंत्री के रूप में वित्त मंत्रालय का भार सौंपा गया. यद्यपि यह सरकार जल्द ही गिर गई, लेकिन पी. चिदंबरम को अपेक्षित राजनैतिक पहचान मिल गई. वर्ष 2004 में मनमोहन सरकार के अंतर्गत दोबारा पी. चिदंबरम को वित्त-मंत्रालय सौंपा गया. इस पद पर वह 2008 तक रहे. इस वर्ष दिल्ली में हुए आतंकवादी धमाकों के बाद तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफा दिए जाने के बाद पी. चिदंबरम को गृह-मंत्री बनाया गया.


पी. चिदंबरम से जुड़े विवाद और आलोचनाएं

  • वर्ष 1985 में राजीव गांधी सरकार के अंतर्गत चाय के दामों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए श्रीलंका सरकार ने पी. चिदंबरम की कड़ी आलोचना की. श्रीलंका सरकार का कहना था कि भारत में चाय की कीमतों को निर्धारित कर पी. चिदंबरम ने श्रीलंका के चाय व्यापार को समाप्त कर दिया है.
  • वित्तमंत्री के कार्यकाल के दौरान पी. चिदंबरम पर संसद में हिंदी भाषी सांसद और हिंदुओं के खिलाफ टिप्पणी करने जैसे कई आरोप लगे.
  • पी. चिदंबरम पर यह भी आरोप लगा कि वह राजीव गांधी ट्रस्ट के निदेशकों में से एक हैं. 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे अबुल कलाम द्वारा चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम के लाभ के पदों की जांच करने की इजाजत प्रदान की गई.
  • पार्टी के भीतर भी पी. चिदंबरम का सह-नेताओं के साथ नीतियों और निर्णयों को लेकर विवाद और मनमुटाव रहता है.
  • गृह मंत्री के पद पर रहते हुए भी पी. चिदंबरम को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. पी. चिदंबरम ने यह आश्वासन दिया था कि वह देश में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाएंगे. जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. दंतेवाड़ा में माओवादिओं द्वारा 6 सीआरपीएफ जवानों की हत्या, 28 मई 2010 का ट्रेन हाइजैक, जिसमें कई सौ निर्दोष लोगों की जान चली गई, जैसे माओवादी हमले उनके वायदों और आश्वासनों को बेबुनियाद साबित कर देते हैं.
  • गृहमंत्रालय की चूक और अनदेखी के कारण 2011 में हुए मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद भी पी. चिदंबरम और उनके मंत्री समूह की बहुत किरकिरी हुई.

पेशे से वकील पी. चिदंबरम को किताबें पढ़ने का भी बहुत शौक है. वह बैडमिंटन और शतरंज जैसे खेलों में दिलचस्पी रखते हैं. दुनियां भर के कई संस्थानों में अपने भाषण के बल पर ख्याति प्राप्त कर चुके पी. चिदंबरम तमिल साहित्य में भी विशेष रुचि रखते हैं.


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