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जसवंत सिंह को ‘हनुमान’ कहकर पुकारते थे वाजपेयी, एक किताब बनी थी पार्टी से निकाले जाने की वजह

Posted On: 3 Jan, 2019 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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“शिमला से आने के बाद मैंने पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी जी से मुलाकात की। मैं उन्हें गणेश चतुर्थी की बधाई देने, उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछने और उनसे आशीर्वाद मांगने गया था। अब उनका आशीर्वाद मेरे साथ है। ”
अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी माने जाने वाले जसवंत सिंह ने एक इंटरव्यू में ये बातें कही थीं। जसवंत के बेटे मानवेंद्र सिंह ने अपने एक ब्लॉग में कहा था कि “मैंने अपने पिताजी को अटल जी की मौत की खबर नहीं दी है क्योंकि विज्ञान के चमत्कार पर मुझे इतना यकीन नहीं है कि अपने पिता की मौत का जोखिम उठाऊं। कुछ समय पहले वो ब्रेन हेमरेज की वजह से कोमा में चले गए हैं। फिलहाल, वो अपने दोस्त की मौत की खबर सह नहीं पाएंगे। ”

जसवंत और वाजपेयी के दोस्ती के कई किस्से राजनीति के गलियारों में मशहूर हैं। आज जसवंत का जन्मदिन है। ऐसे में जानते हैं उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से।

 

1980 में पहली बार बने सांसद
राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव जसोल में जन्मे जसवंत सिंह, ऐसे नेता जो अपने राजनैतिक कॅरियर की शुरूआत से लेकर कोमा में चले जाने तक लगातार सक्रिय रहे। एनडीए सरकार में वित्त, विदेश और रक्षामंत्री रह चुके जसवंत सिंह ने ‘दिल्ली से कई मायनों में बहुत दूर बसे’ देश की पश्चिमी सीमा के एक रेगिस्तानी गांव से दिल्ली के सियासी गलियारों तक का लंबा सफर तय किया। अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई और फिर कम उम्र में ही आर्मी ज्वॉइन करने के बाद जसवंत सिंह ने 1966 में अपनी नाव राजनीति की नदी में उतार ली। इसके बाद 1980 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए।

 

 

अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे ‘हनुमान’
जसवंत सिंह को अटल बिहारी वाजपेयी का हनुमान कहा जाता रहा है। एनडीए के कार्यकाल में वे अटल जी के लिए एक संकटमोचक की तरह रहे। 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब भारत आर्थिक प्रतिबंधों की आंधी में फंसा था तब दुनिया को जवाब देने के लिए वाजपेयी ने उन्हें ही आगे किया था। जसवंत के बेटे मानवेंद्र ने अपने ब्लॉग में अपने पिता और वाजपेयी की दोस्ती को जमकर सराहते हुए कहा था कि वो वाजपेयी के लिए हमेशा हनुमान ही रहे। अटल सरकार के दौरान जसवंत संकटमोचक हनुमान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहे।

 

 

विवादस्पद किताब के कारण पार्टी से निकाला
जसवंत सिंह जिन्ना पर लिखी अपनी किताब को लेकर भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित किए गये थे। वे अपनी किताब ‘जिन्ना: इंडिया-पार्टीशन, इंडिपेंडेंस’ में एक तरीके से जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष होने का सर्टिफिकेट देते नजर आए थे। अपनी किताब में उन्होंने सरदार पटेल और पंडित नेहरू को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन ये बातें भाजपा और आरएसएस की सोच से मेल नहीं खाती थीं। वर्ष 2009 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।

वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री और वित्त मंत्री रह चुके जसवंत फिलहाल ब्रेन हेमरेज की वजह से कोमा में हैं। उनकी सेहत काफी समय से ठीक नहीं है…Next

 

 

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