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भारत-पाक सिंधु जल समझौते पर करेंगे बात, जानें क्या है समझौते से जुड़ा विवाद

Posted On: 27 Aug, 2018 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान में लम्बे समय से विवाद रहा है। दोनों देश इस मसले को सुलझाने पर कई बार आमने-सामने आ चुके हैं लेकिन अभी तक इस मामले को सुलझाया नहीं जा सका है। पाकिस्तान में इमरान खान की नई सरकार आने के बाद एक बार फिर दोनों देश इस मसले पर चर्चा करने वाले हैं। ऐसे में इस मुद्दे के साथ कई दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद की जा रही है।
ऐसे में इस मुद्दे की शुरुआत के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है।

 

फाइल चित्र

सिंधु जल संधि क्या है?

1947 में आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मसले पर जोरदार खींचतान चली और नहरों के पानी पर खूब विवाद हुआ। विभाजन के बाद नहरों के पानी को लेकर पाकिस्तान का रूख बड़ा ही शंकाओं से भरा रहा है। 1949 में एक अमेरिकी एक्सपर्ट डेविड लिलियेन्थल ने इस समस्या को राजनीतिक की जगह तकनीकी तथा व्यापारिक स्तर पर सुलझाने की सलाह दी। लिलियेन्थल ने दोनों देशों को राय दी कि वे इस मामले में विश्व बैंक से मदद भी ले सकते हैं। सितंबर 1951 में विश्व बैंक के अध्यक्ष यूजीन रॉबर्ट ब्लेक ने मध्यस्थता करना स्वीकार भी कर लिया। सालों चली बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच जल पर समझौता हुआ। इसे ही 1960 की सिन्धु जल संधि कहते हैं।

 

 

6 नदियों के पानी का बिना रोक-टोक बंटवारा
इस संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने रावलिपिंडी में दस्तखत किए थे। 12 जनवरी 1961 से संधि की शर्तें लागू कर दी गईं थी। संधि के तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं। 3 पूर्वी नदियों (रावी, व्यास और सतलज) के पानी पर भारत का पूरा हक दिया गया। बाकी 3 पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के पानी के बहाव को बिना बाधा पाकिस्तान को देना था। संधि में तय मानकों के मुताबिक भारत में पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका करीब 20 फीसदी हिस्सा भारत के लिए है।

किस बात का है विवाद
पाकिस्तान, वर्ल्ड बैंक के सामने जम्मू-कश्मीर में भारत के किशनगंगा और राटले पनबिजली परियोजना का मुद्दा कई बार उठा चुका है। पाक ने रातले, किशनगंगा सहित भारत द्वारा बनाए जा रहे 5 पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन को लेकर चिंता जाहिर की थी और वर्ल्ड बैंक से कहा था कि ये डिजाइन सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करते हैं। इन परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान ने साल 2016 में विश्व बैंक को शिकायत कर पंचाट के गठन की मांग की थी। पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि ये प्रॉजेक्ट्स भारत के साथ हुए सिंधु जल समझौते के अनुरूप नहीं हैं। जबकि, भारत का कहना है कि परियोजनाएं समझौते का उल्लंघन नहीं करती हैं और वर्ल्ड बैंक को एक निष्पक्ष एक्सपर्ट नियुक्त करना चाहिए।
उड़ी में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने संकेत दिए थे कि पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने का दबाव बनाने के लिए वह सिंधु जल समझौते का इस्तेमाल कर सकता है। सिंधु का पानी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी जैसा है। पाकिस्तान मुख्य तौर पर कृषि प्रधान देश है और इसकी खेती का 80 फीसद हिस्सा सिंचाई के लिए सिंधु के पानी पर निर्भर है। भारत ने अभी तक सिंधु के अपने हिस्से के पानी का बहुत इस्तेमाल नहीं किया था…Next

 

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