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कभी पब में बाउंसर थे जस्टिन ट्रूडो, बॉक्सिंग मैच जीतकर बने कनाडा के पीएम

Posted On: 20 Feb, 2018 Politics में

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कनाडा के 23वें प्रधानमंत्री जस्टिन पियरे जेम्स ट्रूडो यानि जस्टिन ट्रूडो 7 दिनके भारतीय दौरे पर आए हुए हैं। दुनिया में इस वक्त जितने भी राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री हैं, उनके बीच जस्टिन ट्रूडो अपनी एक खास पहचान रखते हैं और इस दौर के सबसे मशहूर नेताओं में भी गिने जाते हैं। जस्टिन ट्रूडो का ये पहला भारतीय दौरा है, इस वक्त वो पूरे परिवार के साथ यहां आए हुए हैं और हर भारत दर्शन कर रहे हैं। ऐसे में चलिए एक नजर ड़ालते हैं आखिर कैसे बने जस्टिन ट्रूडो एक पीएम और कैसा था उनका सफर।

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जस्टिन जेम्स ट्रूडो के पिता थे प्रधानमंत्री

जस्टिन पियरे जेम्स ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो कानाड के 13वें प्रधानमंत्री थे, जस्टिन अपने माता-पिता की पहली संतान थे औऱ उनका जन्म 25 दिसंबर 1971 में हुआ था। वैसे जस्टिन का लगभग पूरा परिवार ही राजनीति में था, ऐसे में जाहिर है की जस्टिन के खून में राजनीति थी।


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11 साल की उम्र में पहली बार भारत की यात्रा

पियरे ट्रूडो चार बार कनाडा के पीएम रहे, कनाडा में ये एक रिकॉर्ड है। 1968 से 1984 तक वो कनाडा के सबसे मजबूत नेता रहे। जेम्स ट्रूडो महज 6 साल के थे जब उनके माता-पिता का तलाक हो गया, उस वक्त जस्टिन के दो भाई भी थे। उस वक्त पियेर कनाडा के पीएम थे 11 की उम्र में पापा के साथ पहली बार भारत आए जस्टिन ट्रूडो, तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं।  जब जस्टिन 12 के हुए, तब पियरे ने राजनीति से संन्यास ले लिया और अपने तीनों बेटों के साथ मॉन्ट्रेल में शिफ्ट हो गए।


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नाइटक्लब में बाउंसर बन गए

जस्टिन ने अपनी 12वीं की पढ़ाई करने के बाद यूनिवर्सिटी की पढ़ाई अंग्रेजी लिटरेचर में बीए किया साल 1994 में। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जस्टिन एक साल तक जस्टिन घूमते रहे। कुछ समय बाद वो मैकगिल यूनिवर्सिटी में टीचर बनने की पढ़ाई की लेकिन बीच में पढ़ाई छोड़ कर दूसरे शहर विसलर चले गए। वहां नाइटक्लब में बाउंसर बन गए, फिर वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया से बैचलर ऑफ एजुकेशन डिग्री की पढ़ाई खत्म की।


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फ्रेंच और गणित के शिक्षक बने

बैचलर ऑफ एजुकेशन डिग्री की पढ़ाई खत्म करने के बाद जस्टिन ने फ्रेंच और गणित पढ़ाने लगे। उसी दौरान उनके छोटे भाई मिशेल की एक हादसे में मौत हो गई और साल 2000 में उनके पिता की कैंसर से मौत हो गई।


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सोशल वर्क पर दिया जोर

जस्टिन की भाई की मौत ऐवलान्च में हुई थी इस वजह से उन्होंने ऐवलान्च के लिए जागरूकता बढ़ाने का काम शुरू किया। एक कनाडियन ऐवलान्च फाउंडेशन बनाया और उसके डायरेक्टर बन गए। फिर उन्होंने कनाडा ऐवलान्च सेंटर बनाने में मदद की। पर्यावरण से जुड़ी चीजों पर भी काम किया। नस्लीय हिंसा के खिलाफ रैली निकालने में मदद की, ऐसे ही कई चीजें की।


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2005 में रचाई शादी

साल 2003 में जस्टिन और सोफी एक-दूसरे को डेट करने लगे, सोफी जस्टिन के छोटे भाई की दोस्त थी। सोफी टीवी और रेडियो में काम करती थीं। फ्रेंच और अंग्रेजी, दोनों बोलती थीं, दो साल की डेटिंग के बाद दोनों ने शादी कर ली। 28 मई, 2005 को, दोनों के तीन बच्चे हैं जेवियर, ऐला ग्रेस और हेड्रेन।


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2006 से 2011 तक लिबरल पार्टी ने देखा हार का मुंह

साल 2006 में हुए चुनाव में लिबरल पार्टी हार गई और ये सिलसिला साल 2011 में चला जिसके बाद पार्टी के नेता थे माइकल इग्नेटियफ ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। माइकल के इस्तीपा देने के बाद लोगों ने जस्टिन पर पार्टी का दारोमदार देना चाहा, हालांकि कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया क्योंकि जस्टिन के पास उस वक्त राजनीति का अनुभव कम था।

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जब बॉक्सिंग रिंग में उतरे जस्टिन

कनाडा की कंजरवेटिव पार्टी के सांसद पैट्रिक ब्राजेउ ने जस्टिन की जमकर आलोचना की लेकिन जस्टिन ने खुद को कमतर नहीं समझा और ब्राजेउ को बॉक्सिंग रिंग में आकर मुकाबला करने की चुनौती दी। पैट्रिक सेना में रह चुके थे, कराटे में ब्लैक बेल्ट थे। लोग कहने लगे कि जस्टिन हार जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ मार्च 2012 में ये मैच हुआ, तीसरे राउंड में जस्टिन ने मैच जीत लिया और फोकस में आ गए।


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कनाडा पर चला जस्टिन का जादू

लिबरल पार्टी का मुखिया कौन बनेगा, इसकी दौड़ शुरू हो चुकी थी। 2 अक्टूबर, 2012 को जस्टिन ने अपना कैंपेन शुरू किया। अपने मुकाबले खड़े लोगों की तुलना में वो ज्यादा लोकप्रिय थे। लोगों की दिलचस्पी पैदा होने लगी उनमें, ट्रूडो की वजह से लिबरल पार्टी के लिए भी समर्थन बढ़ने लगा। 14 अप्रैल, 2013 को नतीजा आया,जस्टिन जीत गए।


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फिर जीत गए जस्टिन ट्रूडो

19 अक्टूबर, 2015. कनाडा में चुनाव हुआ, लिबरल पार्टी ने सबको पीछे छोड़ दिया। हाउस ऑफ कॉमन्स में कुल 338 सीटें हैं, इनमें से 184 सीटों पर लिबरल पार्टी जीती। 2011 के मुकाबले पार्टी को 150 सीटों को फायदा हुआ था। इसकी सबसे ज्यादा वाहवाही मिली जस्टिन ट्रूडो को।

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क्यों इतना प्रगतिशील माना जाता है ट्रूडो को?

कोई एक चीज, कोई एक फैसला जस्टिन ट्रूडो को प्रगतिशील नहीं बनाता। जस्टिन ने मिडिल क्लास पर इनकम टैक्स का बोझ कम किया, अमीरों पर टैक्स बढ़ाया। कम कमाने वाले और मध्यम वर्गीय लोगों के बच्चों के लिए खास योजनाएं बनाईं। जस्टिन ट्रूडो बतौर प्रधानमंत्री हर नस्ल, हर समुदाय के साथ शरीक होते देखे गए। दो साल के अंदर जस्टिन ट्रूडो ने करीब 40,000 सीरियन शरणार्थियों को कनाडा में जगह दी। कनाडा की कैबिनेट में महिला और पुरुष की संख्या बराबर है और ऐसा पहली बार हुआ था।…Next


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