blogid : 321 postid : 741367

तो ये है बीजेपी को बहुमत मिलने का सबसे खास कारण

Posted On: 16 May, 2014 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

Politics Blog

757 Posts

457 Comments

लोकसभा चुनावी संग्राम का महाकुंभ समाप्त हुआ और देखिए एक लंबे इंतजार के बाद परिणाम भी सामने आ रहे हैं. वैसे जाहिर तौर पर जो परिणाम आने हैं वह कहीं ना कहीं अपेक्षित भी थे इसलिए ये कहना कि लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे हैरान कर देने वाले हैं, सही नहीं होगा. कांग्रेस के लंबे शासनकाल पर विराम लगाते हुए बीजेपी एक बहुत बड़ी और उल्लेखनीय जीत हासिल करने की ओर है जो वाकई काबिल-ए-तारीफ है.


narendra modi

कांग्रेस के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई और सामाजिक अपराधों ने देश की जनता को इतना त्रस्त कर दिया कि वह एक विकल्प की तलाश में जुट गई और ये विकल्प उन्हें मिला भाजपा के रूप में. लेकिन इस सिक्के का एक और पहलू यह भी है कि इस चुनाव से देश में मौजूद धर्मनिर्पेक्षता को गहरा आघात पहुंचा है और यह साबित हो गया है कि देश की जनता विशेषकर युवा, कट्टरवाद को पूरा समर्थन देते हैं. शायद जनता विकल्प की नहीं कट्टर नेता की तलाश कर रही थी और उनकी ये तलाश मोदी ने पूरी कर दी.


modi

भाजपा की जीत को नरेंद्र मोदी की जीत माना जा रहा था और अब जब भाजपा ने चुनावी मैदान में अपने दम पर परचम लहरा दिया है तो जाहिर तौर पर यह जीत मोदी की ही है, वे मोदी जो अभी तक अपने सिर से गुजरात में हुए हिन्दू-मुसलमान दंगों का दाग धो नहीं पाए हैं. जिन्हें आज भी सांप्रदायिक छवि वाले नेता के तौर पर ही जाना जाता है और ऐसे बड़े आरोपों के बावजूद उन्हें मिला विशाल समर्थन यह स्पष्ट प्रमाणित करता है कि जिस धर्मनिर्पेक्षता की हम बात करते हैं, हमारे राजनीतिज्ञ कसमें खाते हैं, वह सिर्फ और सिर्फ किताबी बातें हैं क्योंकि जब बात वोट देकर अपनी सरकार चुनने की आती है तो कहीं ना कहीं हमारा सपोर्ट भी कट्टरवाद की ही तरफ बढ़ता है.


Read: पढ़िए 2014 लोकसभा चुनाव के फेमस किस्से जो हमेशा याद किए जाएंगे


इन 60 सालों में पहली बार स्वयं जनता ने यह साबित कर दिया है कि धर्मनिर्पेक्षता जैसी कोई भी बात उनके लिए मायने नहीं रखती. मोदी कट्टर हैं या नहीं, लेकिन उनकी सामाजिक छवि एक ऐसे लीडर की है जो संप्रदाय विशेष को महत्व देकर आगे बढ़ता है और ऐसी छवि वाले नेता के हाथ में देश की सत्ता सौंप देने का अर्थ है धर्मनिर्पेक्षता की अवधारणा को पूरी तरह नकार देना.

bjp


मोदी को समर्थन देकर इस बार देश की जनता ने एक विशेष प्रकार के फासिज्म की तरफ रुख किया है और नरेंद्र मोदी को उनकी उसी छवि के रूप में स्वीकार किया है जिस रूप में उन्हें प्रचारित किया जाता रहा है. देश की जनता ने स्वयं मोदी को वो चेहरा दिया है जो सांप्रदायिक नेता की पहचान है लेकिन फिर भी उनके नेतृत्व में भाजपा को जीत की राह पर आगे बढ़ा कर यह साबित कर दिया गया है कि धर्मनिर्पेक्षता की कोई भी अवधारणा भारत के लिए सटीक नहीं बैठती.

bjp


वैसे जो भी है सबसे बड़ी और गौर करने वाली बात तो यह है कि भाजपा ने बहुमत से जीत हासिल कर गठबंधन सरकार बनने की परंपरा को अपने दम पर तोड़ डाला है जोकि वाकई उसकी एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पिछले कई सालों ने भारत को गठबंधन सरकार से ही काम चलाना पड़ रहा है. ऐसा गठबंधन जिसके टूटकर बिखरने की संभावनाएं हमेशा ही बनी रहती हैं.

Read More:

जानिए चुनाव में कौन से नेता थे बयानबाजी के उस्ताद

रो रहे हैं मोदी और साथ दे रही हैं सुषमा स्वराज, जानिए क्या फर्क है इन दोनों के रोने में

चुनाव परिणाम रुझान: एक झलक


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.75 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग