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राज्‍यसभा में कमजोर हो सकती है विपक्ष की धार, भाजपा को होगा फायदा!

Posted On: 26 Feb, 2018 Politics में

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16 राज्यों की 58 राज्यसभा सीटों के लिए 23 मार्च को चुनाव होगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नामांकन की आखिरी तारीख 12 मार्च है और वोटों की गिनती 23 मार्च को ही होगी। निर्वाचन प्रक्रिया 5 मार्च को चुनाव अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी। बता दें कि तीन नाॅमिनेटेड और एक इंडिपेंडेंट मेंबर्स सहित 58 राज्‍यसभा मेंबर्स अप्रैल में सेवानिवृत्‍त हो रहे हैं। इस चुनाव के बाद राज्यसभा में संख्या के आधार पर और किसी भी सरकारी बिल को रोकने के मामले में विपक्ष की धार कमजोर हो सकती है। उधर, इस मामले में बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए काफी मजबूत स्थिति में हो सकता है। आइये आपको बताते हैं कि क्‍या है राज्‍यसभा का गणित।


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राज्यसभा के गणित में बदलाव होना तय

58 सांसदों के सेवानिवृत्त होने के साथ ही राज्यसभा के गणित में बदलाव होना तय है। इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को फायदा होगा। राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिले मजबूत बहुमतों को देखते हुए राज्यसभा चुनाव में भी यही स्थिति कायम रह सकती है। इसी के साथ जहां कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की संख्या 123 से कम होकर करीब 115 पर आ सकती है, वहीं बीजेपी, उसके गठबंधन सहयोगियों और समर्थकों का कुल आंकड़ा वर्तमान के 100 से बढ़कर 109 हो सकता है।


55 सदस्‍यों में से 30 विपक्ष के

तीन नॉमिनेटेड मेंबर्स को छोड़कर सेवानिवृत्त होने जा रहे 55 सदस्‍यों में से 30 विपक्षी खेमे के हैं, जबकि 24 बीजेपी और उसके सहयोगियों के हैं। इनमें से एनडीए के कई उम्मीदवार सदन में वापस लौट सकते हैं, जबकि विपक्ष के कई सदस्य चले जाएंगे। फिलहाल जो स्थिति है उसके मुताबिक, सदन के 233 निर्वाचित सदस्यों (12 नामांकित सदस्यों के अलावा) में से कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष के 123 सांसद हैं। वहीं, बीजेपी के 58 सदस्‍यों सहित एनडीए के 83 सांसद हैं और चार निर्दलीय सदस्य भी हैं, जो बीजेपी के समर्थक हैं। इनमें राजीव चंद्रशेखर, सुभाष चंद्रा, संजय दत्तात्रेय काकाडे और अमर सिंह शामिल हैं। इसके अलावा ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके), जिसके राज्यसभा में 13 सदस्य हैं, वे भी एनडीए के साथ हैं। इसका मतलब यह है कि संसद के ऊपरी सदन में एनडीए के समर्थन में 100 सदस्य हैं।


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राज्यसभा में विपक्ष का पलड़ा था भारी

यह अंतर कुछ महीने पहले और अधिक था। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा में विधेयकों व प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच किसी भी प्रकार की बहस की स्थिति में विपक्ष का पलड़ा भारी था। इसका हालिया उदाहरण तीन तलाक विधेयक है, जिसे विपक्ष ने ऊपरी सदन में रोक दिया था। राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत के कारण केंद्र सरकार को कई मामलों में मुश्किल हुई और सदन में संघर्ष की स्थिति से बचने के लिए उसे कई बार धन विधेयक का सहारा लेना पड़ा। संविधान के तहत धन विधेयक को केवल लोकसभा में पारित कराना जरूरी है और राज्यसभा इसे नहीं रोक सकती। अप्रैल के बाद राजग काफी बेहतर स्थिति में होगा।


चुनाव के बाद ऐसा हो सकता है गणित

बीजेपी और उसके गठबंधन सहयोगियों के 24 सांसद सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसका अर्थ है कि सरकार के पास एआईएडीएमके सदस्‍यों समेत 76 सांसद होंगे। मगर एनडीए के कम से कम 30 सांसदों के फिर से निर्वाचित होने की संभावना है, इसलिए उनका कुल आंकड़ा बढ़कर 106 हो जाएगा। इसमें सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए नॉमिनेटेड किए जाने वाले तीन सदस्यों को भी मिला दें, तो एनडीए सदस्यों का कुल आंकड़ा करीब 109 हो जाएगा। इसके अलावा तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (आईएनएलडी) और वायएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियां भी हैं, जो पूरी तरह बीजेपी के खिलाफ नहीं हैं और वे जब तक कोई ठोस कारण न हो सरकार का विरोध नहीं करेंगी।


ऐसी होगी कांग्रेस समेत विपक्ष की स्थिति

कांग्रेस और शेष विपक्ष की बात करें, तो उनके 30 सांसद सेवानिवृत्त होंगे, जिसके बाद उनके करीब 93 सदस्य बचेंगे। विपक्ष लगभग 22 सीटें जीत सकता है, जिसका मतलब यह है कि अप्रैल के बाद राज्यसभा में उसके करीब 115 सदस्य होंगे। आम आदमी पार्टी (आप) के तीन नवनिर्वाचित सदस्य बीजेपी और कांग्रेस दोनों से ही समान दूरी बनाए रख सकते हैं। हालांकि, AAP के तृणमूल कांग्रेस जैसी कुछ प्रमुख विपक्षी पार्टियों के साथ अच्छे संबंध हैं…Next


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