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S. Shrinivas Iyangar - आजादी के योद्धा सेषाद्रि श्रीनिवास आयंगर

Posted On: 12 Jan, 2012 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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s.shrinivas ayangarसेषाद्रि श्रीनिवास आयंगर का जीवन-परिचय

प्रतिष्ठित वकील और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सेषाद्रि श्रीनिवास आयंगर का जन्म 11 सितंबर, 1874 को ब्रिटिश प्रेसिडेंसी के अंतर्गत रामनाथपुरम जिले में हुआ था. श्रीनिवास आयंगर का परिवार रूढ़िवादी वैष्णव समुदाय से संबंध रखता था. श्रीनिवास आयंगर की  प्राथमिक शिक्षा तमिल भाषा में ही संपन्न हुई. उन्होंने मदुरई से स्कूल शिक्षा ग्रहण की और मद्रास स्थित प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई संपन्न की. वर्ष 1916-1920 के बीच श्रीनिवास आयंगर मद्रास प्रेसिडेंसी के एडवोकेट जनरल पद पर कार्यरत रहे. इसके अलावा वर्ष 1923 से 1930 के बीच वह स्वराज पार्टी के अध्यक्ष भी रहे. श्रीनिवास आयंगर प्रतिष्ठित वकील और मद्रास प्रेसिडेंसी के सबसे पहले भारतीय महाधिवक्ता सर वेंमबाउकम भाष्यम आयंगर के दामाद थे. श्रीनिवास आयंगर के अनुयायी उन्हें दक्षिण का शेर कहते थे.


स्वतंत्रता संग्राम में सेषाद्री श्रीनिवास आयंगर की भूमिका

श्रीनिवास आयंगर ने मद्रास प्रेसिडेंसी के महाधिवक्ता के पद को त्याग कर वर्ष 1920 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. उन्होंने असहयोग आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लेकिन चुनावों में भागीदारी जैसे मसले पर उनकी महात्मा गांधी से मतभेद उत्पन्न होने लगे. जिसके बाद उन्होंने चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अलग से स्वराज पार्टी की स्थापना की. तमिलनाडु कांग्रेस समिति के अध्यक्ष पद पर सेवाएं देने के बाद श्रीनिवास आयंगर ने स्वराज पार्टी की भी अध्यक्षता की. साइमन कमीशन के विरोध में उन्होंने इंडिपेंडेंस ऑफ इण्डिया लीग की स्थापना की. अन्य कांग्रेस नेताओं से मनमुटाव होने के कारण उन्होंने राजनीति और कांग्रेस की सदस्यता दोनों को त्याग दिया. हालांकि वर्ष 1938 में वे थोड़े समय की राजनीति में आए और कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सुभाष चंद्र बोस का समर्थन किया.


श्रीनिवास अयंगर का निधन

राजनीति में उनके पुन: प्रवेश का समय बहुत कम था. 29 मई, 1941 को मद्रास के अपने घर में उनका देहांत हो गया.


दक्षिण भारत के छोटे-छोटे गांव में कांग्रेस को लोकप्रियता दिलवाने में श्रीनिवास आयंगर ने एक महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसके अलावा के. कामराज जैसे प्रतिष्ठित नेता को कांग्रेस में श्रीनिवास आयंगर ही लाए थे.


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