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सुषमा नहीं लड़ेंगी 2019 का लोकसभा चुनाव, राजनीतिक कॅरियर की ये 6 बातें हैं बेहद खास

Posted On: 21 Nov, 2018 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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सुषमा स्वराज ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया किया है। जिसके बाद उनके पति स्वराज कौशल ने उनके 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘मैडम (सुषमा स्वराज) अब और चुनाव नहीं लड़ने के आपके फैसले के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। मुझे याद है कि एक वक्त ऐसा आया था, जब मिल्खा सिंह ने दौड़ना बंद कर दिया था।’

उन्होंने कहा, ‘यह दौड़ 1977 से शुरू हुई थी..इसे 41 साल हो गए। आपने लगातार 11 चुनाव लड़े हैं। मतलब आपने 1977 के बाद से सभी चुनाव लड़े हैं। सिर्फ दो बार 1991 और 2004 में पार्टी ने आपको चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी।’

सुषमा की ये घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि राजनीति में 60-65 साल की उम्र से ऊपर हो चुके नेता अभी तक चुनावी अखाड़े में डटे हुए हैं। इस वजह से अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा करके उन्होंने एक स्वस्थ्य परम्परा को आगे बढ़ाया है। हालांकि, ऐसा करने वाले राजनीति में अब भी अपवाद स्वरूप ही हैं।  इसके अलावा सुषमा ने साफ कर दिया है कि वो सिर्फ चुनाव नहीं लड़ रही हैं बाकी वो राजनीति में बनी रहेंगी।
सुषमा के इस फैसले के बाद वो लगातार चर्चा में हैं। उनसे जुड़े यादगार किस्से और राजनीतिक घटनाएं फिर से ताजा हो उठी हैं। आइए, एक नजर डालते खास बातों पर।

 

 

 

भारत की पहली महिला विदेश मंत्री हैं सुषमा
अम्बाला छावनी में जन्मीं सुषमा स्वराज ने एस॰डी॰ कॉलेज अम्बाला छावनी से बी॰ए॰ और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गयीं। वर्ष 2014 में वो भारत की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं।

 

 

25 साल की उम्र में बनी थीं हरियाणा की कैबिनेट मंत्री
जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली सुषमा स्वराज हमेशा से अपनी राय खुलकर रखती रही हैं। इस वजह से वो हर आंदोलन, चुनाव में काफी सक्रिय नजर आती हैं। 1977 में 25 साल की उम्र में सुषमा हरियाणा की कैबिनेट मंत्री बनी थी।

 

 

 

पहली महिला सांसद जिन्हें मिला आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंट्रियन अवार्ड
सुषमा स्वराज पहली और एक मात्र महिला सांसद हैं, जिन्हें आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंट्रियन का अवॉर्ड मिला है। सुषमा के अलावा अभी तक कोई भी ये अवार्ड अपने नाम नहीं कर पाया है।

 

विदेश मंत्री के तौर पर विदेश में बसे भारतीयों की मदद
विदेश मंत्री के तौर पर एक ट्वीट पर एक्शन लेने वाले नेताओं की लिस्ट में सुषमा स्वराज का नाम सबसे ऊपर है। सुषमा विदेश में बसे भारतीयों की मदद के लिए हमेशा चर्चा में रहीं। कई बार तो ट्रोलिंग का शिकार भी होना पड़ा था।

 

 

पार्टी की ओर से बनने वाली पहली मुख्यमंत्री

सुषमा स्वराज बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री (दिल्ली, 13 अक्टूबर 1998 से 3 दिसंबर 1998) बनीं। अप्रैल 1990 में वो राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं। साल 1996 में 11वें लोकसभा चुनावों में उन्हें साउथ दिल्ली से उतारा गया। वो वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री भी रह चुकी हैं।

 

 

प्रभावशाली वक्ता और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी
सुषमा अपनी दमदार भाषाशैली और प्रभावशाली भाषण के लिए जानी जाती हैं। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में सुषमा की अच्छी पकड़ है।
वहीं, कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी उन्होंने हमेशा से सक्रिय भूमिका निभाई है। साल 2011 में बाबा रामदेव के खिलाफ रामलीला ग्राउंड में पुलिस कार्रवाई के विरोध में बीजेपी के राजघाट पर सत्याग्रह के दौरान सुषमा स्वराज अलग ही मूड में दिखीं थी। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वह भी एक देशभक्ति गाने पर झूम उठीं। जिसका कांग्रेस ने जमकर विरोध किया था…Next

 

 

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