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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : वोटिंग के बाद कुछ ऐसे बीता नेताओं का दिन, किसी ने बनाई जलेबी तो किसी की डोसा-सांभर पार्टी

Posted On: 30 Nov, 2018 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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चुनाव आते ही नेता सबसे ज्यादा एक्टिव दिखाई देते हैं। जिन नेताओं के नाम भी जनता को ठीक से पता नहीं होते, वो नेता घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने से भी नहीं चूकते। वहीं चुनाव खत्म होने के बाद नेता ऐसे गायब होते हैं कि जनता को उन्हें ढूंढ़ना पड़ता है। बहरहाल, ये तो बात हुई चुनावी मौसम और नेताओं की।

 

 

 

अब बात करते हैं चुनाव खत्म होने के बाद नेता अपनी चुनावी थकान कैसे उतारते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 28 नवंबर को वोटिंग पूरी हो चुकी है। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रचार की थकान उतार रहे हैं। साथ ही राजनीति से थोड़ी दूरी रखते हुए अपनी पसंद का काम कर रहे हैं।
आइए, एक नजर डालते हैं।

 

पक्षियों को दाना, कार्यकर्ताओं के लिए बनवाई जलेबी

 

 

भोपाल की सबसे वीआईपी सीट गोविंदपुरा से बीजेपी प्रत्याशी और बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर ने सुबह-सुबह ही घर में मौजूद पक्षियों को दाना खिलाकर दिन की शुरुआत की। यही नहीं, उन्होंने घर में ही हलवाई को बुलवाकर पकोड़े और जलेबियां बनवाई और उसे अपने हाथों से कार्यकर्ताओं को परोसा। गौर ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने चुनाव में जो मेहनत की है उनके लिए ही ये व्यवस्था की गई है।

 

दिग्विजय की ‘डोसा-सांभर पार्टी’

 

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी वोटिंग के अगले दिन भोपाल के एक रेस्टोरेंट में कार्यकर्ताओं के साथ खाना खाते और चुनावी थकान उतारते दिखे। दिग्विजय दोपहर को अचानक भोपाल के न्यू मार्केट पहुंचे और कार्यकर्ताओं संग खाना खाया। दिग्विजय यहां करीब 2 घंटे तक रुके। उन्होंने बताया कि वो इस रेस्टोरेंट में बीते 30 साल से आ रहे हैं और उन्हें यहां का इडली, डोसा और सांभर बहुत पसंद है।

 

 

बीमार पिता के लिए निकाला समय

 

 

चुनावी व्यस्तता खत्म होने के बाद भोपाल की नरेला सीट से प्रत्याशी विश्वास सारंग ने वोटिंग के अगले दिन समय मिलते ही बीमार पिता के लिए डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया और उन्हें अस्पताल ले गए। बोले चुनाव के दौरान भी पिता भर्ती हुए थे लेकिन प्रचार से वक्त निकाल पाए इसलिए अब डॉक्टर के पास ले जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश में बीते एक महीने से चुनावी लड़ाई चरम पर थी और अब सबको नतीजों का इंतजार है। ऐसे में प्रत्याशियों को आराम का एक दिन मिलना तो बनता ही है…Next

 

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