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सीएम जो खुद को चोर कहता था लेकिन मरने के बाद अकांउट से निकले सिर्फ 10 हजार, पंडित नेहरू से बढ़कर था जलवा

Posted On: 25 Jul, 2017 Politics में

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पंडित जवाहरलाल नेहरू उन्हें पसंद नहीं करते थे इसलिए एक चुने हुए मुख्यमंत्री को अपने पद से हटना पड़ा. 17 साल की उम्र में आजादी के आंदोलन में शामिल हो गए और सीतापुर, यूपी में अंग्रेजी सरकार के ‘रॉलेट एक्ट’ का जमकर विरोध किया. चंद्रभानु गुप्ता जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी ऐसा चेहरा माने जाते थे, जिनसे विधायक कोई भी बात पंडित नेहरू से पहले पूछते थे.


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चंद्रभानु गुप्ता के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1926 में हुई. उनको उत्तर प्रदेश कांग्रेस और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का सदस्य बनाया गया. वहीं 1937 के चुनाव में वो उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए. 1960 में वो पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. राजनीति की गलियारों से होते हुए उनके किस्से बहुत मशहूर हैं. उनमें से कुछ किस्से लाए हैं हम आपके लिए.


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10 बार जेल गए, 17 साल की उम्र में आंदोलन का हिस्सा बन गए.

चंद्रभानु 17 साल की उम्र में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग ले चुके थे. ब्रिटिश सरकार का विरोध करते-करते 10 बार से ज्यादा बार जेल गए. चंद्रभानु तीन बार उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे थे. 1960 से 1963 लेकिन नेहरू की नापसंदगी के चलते इस्तीफा लेना पड़ा लेकिन 1967 के चुनाव में जीतने के बाद फिर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन इस बार सिर्फ 19 दिनों के लिए. इसका कारण था कि चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस तोड़कर अपनी पार्टी बना ली, जिससे सरकार गिर गई. चंद्रभानु की सीएम पद की कुर्सी चली गई और चौधरी चरण सिंह सीएम बन गए लेकिन वो सरकार भी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई और 1969 में चंद्रभानु फिर से मुख्यमंत्री पद पर एक साल के लिए आसीन हो गए.


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उनकी संपत्ति पर मचा था बवाल

बड़े-बड़े बिजनेसमैन सरकारी सपोर्ट लेने के लिए चंद्रभानु गुप्ता के पास आते थे. ऐसे में उन पर आरोप लगने लगे कि उन्होंने काफी पैसों की हेरफेर करके अपने पास जमा कर रखे हैं. ऐसे आरोप सुनकर वो कभी नहीं घबराते थे और मजाकिया अंदाज में अपने विरोधियों को जवाब देते थे ‘गली-गली में शोर है, चंद्रभानु गुप्ता चोर है’.

सबसे दिलचस्प बात ये थी कि जब वो मरे तो उनके बैंक अकांउट में महज 10 हजार रुपए थे जबकि उनके घर में नाम मात्र का सामान था. उत्तरप्रदेश के राजनीति की गलियारों में कभी उनका जादू पंडित नेहरू से ज्यादा था….Next


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