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अखिलेश पकड़ेंगे उच्‍च सदन की राह या जाएंगे जनता की अदालत, जल्‍द होगा फैसला!

Posted On: 31 Mar, 2018 Politics में

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उत्‍तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव से ही सूबे में चुनावी माहौल बना हुआ है। हालांकि, उपचुनाव के अलावा जो चुनाव हुए या होंगे, उनमें आम जनता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि मतदान कर रहे हैं। दरअसल, उपुचनाव और राज्‍यसभा चुनाव के बाद अब यूपी में अप्रैल में विधान परिषद का चुनाव संभावित है। इस चुनाव में सबसे दिलचस्‍प यह है कि इससे प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के भी माननीय बनने की राह का पता चलेगा। आइये आपको इसके बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

 

 

अखिलेश समेत 13 सदस्‍यों का कार्यकाल हो रहा खत्‍म

उत्‍तर प्रदेश विधान परिषद के 13 सदस्‍यों का कार्यकाल 5 मई को खत्म हो रहा है। जिन 13 सदस्‍यों का कार्यकाल खत्‍म हो रहा है, उनमें सपा से पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव, नरेश चंद्र उत्तम, राजेंद्र चौधरी, मधु गुप्ता, रामसकल गुर्जर, विजय यादव और उमर अली खान शामिल हैं। वहीं, बसपा से विजय प्रताप व सुनील कुमार चित्तौड़ और भाजपा से महेंद्र कुमार सिंह व मोहसिन रजा का कार्यकाल पूरा होगा। इसके अलावा रालोद के चौधरी मुश्ताक भी विधान परिषद में अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। वहीं, अंबिका चौधरी ने सपा से बसपा में जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था, जिससे उनकी सीट भी खाली हो गई है।

 

 

बसपा-सपा के पास आएंगी दो सीटें!

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा 402 सदस्य संख्या के अनुसार एमएलसी (विधान परिषद) की एक सीट के लिए 29 वोटों की जरूरत होगी। इस हिसाब से भाजपा गठबंधन के खाते में 11 सीटें जानी तय हैं। इसके बाद उसके पास 5 वोट ही अतिरिक्त बचेंगे। वहीं, बसपा के समर्थन से आसानी से सपा अपनी दो सीटें फिर वापस पा लेगी। अगर कांग्रेस का वोट भी जोड़ दिया जाए, तो विपक्ष के पास कुल 71 वोट होंगे, जो दो सीटों के लिए निर्धारित कोटे से 13 अधिक हैं।

 

 

अखिलेश पर टिकी हैं निगाहें

विधान परिषद चुनाव में जो समीकरण बन रहे हैं, उसके हिसाब से बसपा का समर्थन मिला, तो सपा अपने दो प्रतिनिधियों को दोबारा विधान परिषद भेजने में सफल हो पाएगी। अब सबकी निगाहें इस ओर हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फिर उच्च सदन की राह पकड़ेंगे या अगले लोकसभा चुनाव में सीधे जनता की अदालत में जाएंगे। अखिलेश यादव 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर विधान परिषद के सदस्य बने थे। हालांकि, सियासी गलियारों में अखिलेश यादव के एक बार फिर कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज है।

 

 

गठबंधन की भी होगी परीक्षा

विधान परिषद चुनाव में विपक्ष संयुक्त दावेदारी में ही कम से कम दो सीट जीतने में सफल हो पाएगा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने जिस तरह राज्यसभा चुनाव में धन्यवाद के साथ ही अखिलेश यादव को नसीहत दी है, उसे देखते हुए परिषद में सहयोग का उनका वादा भी कसौटी पर होगा। सियासी हलके में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा की ‘भरपाई’ के लिए सपा विधान परिषद में बसपा से एक सीट साझा करने की भी पहल कर सकती है। उधर, अखिलेश यादव के अलावा सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश चंद्र उत्तम और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। नरेश उत्तम जातीय समीकरण साधने के लिए अहम हैं और राजेंद्र चौधरी अखिलेश के मुख्‍यमंत्री रहते शायद ही कोई ऐसा फ्रेम रहा हो, जिससे बाहर रहे हों। ऐसे में अखिलेश के लिए लिए चेहरों का चुनाव आसान नहीं होगा…Next

 

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