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19 जनवरी तक टली आर्टिकल 35A सुनवाई, जानें क्या है आर्टिकल 35A और इस पर चलता विवाद

Posted On: 31 Aug, 2018 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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आर्टिकल 35A के मुद्दे को लेकर जम्मू-कश्मीर का माहौल भी गरमाया हुआ था। अलगाववादियों ने गुरुवार को कश्मीर घाटी में बंद का आह्वान कर रखा था। जम्मू कश्मीर में नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसी मुख्य पार्टियां भी सुनवाई का विरोध कर रही थीं। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 35A पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक स्थगित कर दी है, अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2019 को होगी। ऐसे में कई लोग आर्टिकल 35A से जुड़ी हुई बातें जानना बहुत जरूरी है।

 

 

आर्टिकल 35A क्या है
आर्टिकल 35-A को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में जोड़ा गया था। अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत मिली शक्तियों का इस्तेमाल किया था। यह कानून जम्मू-कश्मीर के बाहर के किसी व्यक्ति को राज्य में संपत्ति खरीदने से रोकता है। साथ ही, कोई बाहरी शख्स राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा भी नहीं उठा सकता है और न ही वहां सरकारी नौकरी पा सकता है। आर्टिकल 35A के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार को राज्य के स्थायी नागरिक प्रमाणित करने का अधिकार है। खास बात यह है कि यह आर्टिकल मूल रूप से संविधान में नहीं था और इसे 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया था।

 

 

इन बातों की वजह से हो रहा है विरोध
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में संविधान के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है जो जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करने वाली महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है। इस तरह महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करने वाला प्रावधान उसके बेटे पर भी लागू होता है। वकील बिमल रॉय के जरिए दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा है कि अगर कोई महिला जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करती है तो वह संपत्ति के अधिकार के साथ ही राज्य में रोजगार के अवसरों से भी वंचित हो जाती है।
जम्मू-कश्मीर के अस्थायी निवासी प्रमाणपत्र धारक लोकसभा चुनाव में तो मतदान कर सकते हैं, लेकिन वे राज्य के स्थानीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते। दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन ‘वी द सिटीजन्स’ ने भी संविधान के अनुच्छेद 35A को चुनौती दे रखी है, जिसे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने वृहद पीठ के पास भेज दिया था…Next

 

 

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