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कौन हैं भीमराव अंबेडकर, जिन्‍हें राज्‍यसभा भेज रही हैं मायावती

Posted On: 7 Mar, 2018 Politics में

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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सियासी गलियारों में इन दिनों बहुजन समाज पार्टी (बसपा) चर्चा में है। पहले अपनी धुर विरोधी समाजवादी पार्टी को यूपी के उपचुनाव में समर्थन देकर बसपा ने चौंकाया। इसके बाद मंगलवार को पार्टी की ओर से राज्‍यसभा उम्‍मीदवार के नाम की घोषणा करके बसपा ने सुर्खियां बटोरीं। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में सपा को समर्थन देने के बाद चर्चा थी कि बसपा की ओर से राज्‍यसभा या तो खुद मायावती जाएंगी या फिर अपने भाई आनंद को उच्‍चसदन भेजेंगी। मगर इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए मायावती ने पार्टी के भीमराव अंबेडकर को राज्‍यसभा का उम्‍मीदवार बनाया। अब लोग ये जानने के लिए उत्‍सुक हैं कि आखिर ये भीमराव अंबेडकर कौन हैं, जिन्‍हें बसपा राज्‍यसभा भेज रही है। आइये आपको बताते हैं कौन हैं भीमराव और उन्‍हें राज्‍यसभा भेजने का फैसला कैसे लिया गया।


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कांशीराम के समय से ही बसपा में सक्रिय और मायावती के करीबी

बसपा के राज्यसभा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर पार्टी प्रमुख मायावती के काफी करीबी नेताओं में से एक हैं। मौजूदा समय में वे कानपुर मंडल जोनल को-ऑर्डिनेटर हैं। भीमराव बसपा संस्थापक कांशीराम के समय से ही सक्रिय भूमिका में हैं। पार्टी के मिशनरी कार्यकर्ताओं में उनका नाम आता है। कांशीराम ने 1991 में जब सपा के सहयोग से इटावा लोकसभा से चुनाव जीता था, उस समय से भीमराव पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता गिने जाते हैं। भीमराव पेशे से वकील हैं और विधायक भी रह चुके हैं। 2007 में मायावती ने उन्हें इटावा की लखना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, जिस पर चुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक बने। हालांकि, 2012 के विधानसभा चुनाव में वे नहीं जीत पाए। बावजूद इसके भीमराव पार्टी में सक्रिय रहे।


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बसपा मुख्यालय में बैठक के बाद घोषणा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के लिए देर शाम पार्टी मुख्यालय में विधायकों व प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में भीमराव अंबेडकर के नाम की घोषणा की गई। सियासी पंडितों का मानना है कि इस फैसले से मायावती ने अपने मूल वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। राज्‍यसभा उम्‍मीदवार की घोषणा के बाद मायावती ने बयान जारी कर कहा कि तमाम आग्रह व अनुरोध के बावजूद उन्होंने स्वयं चौथी बार राज्यसभा में चुनकर जाने की बजाय पार्टी के पुराने व समर्पित पूर्व विधायक अंबेडकर को प्रत्याशी बनाने का फैसला किया है। वे दलित समाज के हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके इस निर्णय का हर स्तर पर स्वागत किया गया है।


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ऐसे समझें राज्यसभा का गणित

उत्‍तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। यहां की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है, खाली सीटों की संख्‍या में 1 जोड़ें, इसके बाद उससे विधानसभा की कुल सीटों की संख्या से भाग दें। निष्कर्ष में जो संख्‍या आती है, उसमें भी 1 जोड़ दें। इसके बाद जो संख्या आती है, उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए जरूरी होते हैं। 10 सीटों में 1 जोड़ा जाए, तो हुए 11, अब 403 को 11 से भाग देते हैं, तो आता है 36.63। अब इसमें 1 जोड़ा जाए, तो आता है 37.63, यानी यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को औसतन 38 विधायकों का समर्थन चाहिए।


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किसके खाते में जा सकती है कितनी सीट

राज्‍यसभा के गणित से समझें, तो यूपी विधानसभा में सदस्यों की संख्या 403 है, जिसमें 402 विधायक 10 राज्यसभा सीटों के लिए वोट करेंगे। इस आंकड़े के मुताबिक, विधायकों की संख्‍या के हिसाब से बीजेपी गठबंधन के खाते में 8 राज्‍यसभा सीटें जा सकती हैं। वहीं, सपा को 1 सीट मिल सकती है, क्योंकि उसके पास 47 विधायक हैं। बची एक सीट के लिए सपा के 10 अतिरिक्‍त वोट, बसपा के 19, कांग्रेस के 7 और 3 अन्य मिलाकर उम्‍मीदवार को राज्यसभा भेज सकते हैं। इसी गणित से बसपा के भीमराव अंबेडकर को राज्‍यसभा भेजा जा सकता है…Next


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