blogid : 321 postid : 1390775

करुणानिधि ने इस घटना के बाद ओढ़ ली पीली शॉल और लगाया काला चश्मा, जो 90 के दशक में बना था उनका ‘स्टाइल स्टेटमेंट’

Posted On: 3 Jun, 2019 Politics में

Pratima Jaiswal

Political Blogराजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

Politics Blog

944 Posts

457 Comments

दक्षिण भारत की राजनीति में एक अलग मुकाम बनाने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एम करुणानिधि 94 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए थे। 50 साल पहले उन्होंने डीएमके की कमान अपने हाथ में ली थी। एक राजनीतिज्ञ के अलावा करुणानिधि को स्क्रिप्टराइटर और एक बेहतरीन कलाकार के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में इतने लम्बे अरसे में करुणानिधि की छवि में उनकी पीली शॉल और काले चश्मे का अहम भूमिका है, जो उनकी पहचान बन गए। असल में इन दोनों चीजों को पहनने से एक घटना जुड़ी हुई है। आइए, आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं, उनसे जुड़ी खास बातें।

 

अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ एम करुणानिधि

 

1994 से पहले पीली की बजाय लेते थे सफेद शॉल
1994 में गले की समस्या की वजह से उनके गालों पर सूजन आ गई। डॉक्टरों ने उन्हें इस हिस्से को गर्म रखने के लिए शॉल ओढ़ने की सलाह दी। तब से करुणानिधि पीली शॉल लेने लगे थे। इससे पहले करुणानिधि सफेद शॉल लेते थे। उन्होंने इस पीली शॉल को अपनी पहचान का हिस्सा बना लिया। कई लोगों ने उनकी शॉल को अंधविश्वास से जोड़ना शुरू कर दिया। उनकी आलोचना भी की जाने लगी। करुणानिधि से कई दफा इस बारे में सवाल किए गए।

 

 

काले चश्मे को पहनने की वजह

1953 में उनका एक्सीडेंट हो गया। इस दुर्घटना में उनकी बायीं आंख खराब हो गई। उनकी 12 सर्जरी हुई। इसके बाद सितंबर 1967 में उनका एक और कार एक्सीडेंट हो गया। इसमें दोबारा उनकी आंख पर असर पड़ा। वो आंख में लगातार हो रहे दर्द से परेशान थे। 1971 में उन्हें अमरीका ले जाया गया, जहां उनकी बायीं आंख का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद से करुणानिधि काला चश्मा लगाने लगे। ये काला चश्मा उनकी आखों को पूरी तरह से ढक देता था। साल 2000 के बाद से वो ऐसा पारदर्शी चश्मा लगाने लगे जिसमें उनकी आंखें नजर आती थीं। इसी चश्मे के साथ करुणानिधि को विदा किया गया…Next

 

Read More :

प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया पीआर के तौर पर कॅरियर शुरू करके 2010 में ज्वाइन की थी कांग्रेस, जानें उनका राजनीतिक सफर

ममता बनर्जी के लिए चुनाव प्रचार करके बुरे फंसे फिरदौस अहमद, भारत सरकार से ब्लैक लिस्ट होकर वापस जाना पड़ा बांग्लादेश

चुनाव आयोग ने इन नेताओं के विवादित बयानों पर की कार्रवाई, जानें किसने क्या कहा था

 

 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग