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रो रहे हैं मोदी और साथ दे रही हैं सुषमा स्वराज, जानिए क्या फर्क है इन दोनों के रोने में

Posted On: 16 May, 2014 Politics में

कटाक्षराजनीति: एक हंगामा

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टीवी पर जो रिजल्ट प्रोग्राम आ रहे हैं उनमें मोदी को नाचते हुए दिखाया जा रहा है लेकिन हमारा अनुमान है कि चुनाव परिणाम देखते हुए मोदी रो रहे हैं. क्यों? रोने की तो बात है. 10 सालों बाद भाजपा जीत रही है और उसका सारा श्रेय मोदी को मिलेगा. बेचारे इतनी खुशियां अपने अंदर कैसे समाएंगे. खुशी के मारे बेचारे रो रहे हैं.


Narendra Modi


दूसरी तरफ सुषमा स्वराज उनका साथ दे रही हैं. पर उनके आंसू दूसरे किस्म के हैं, गम वाले आंसू. और गम क्यों न हो बताइए. बेचारी के नाम तक में ‘स्वराज’ जुड़ा है, सुषमा स्वराज! लेकिन भाजपाइयों को जाने क्या हो गया है बेचारी को स्वराज में जीने नहीं देना चाहते, विदेश मंत्रालय देकर विदेश बिठाना चाहते हैं. अब जिसने जन्म-जन्मांतर ‘स्वराज में जीने’ का संकल्प लिया हो वह तो जरूर कहेगी कि ‘मुझे अपने स्वाभिमान से समझौता किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं’. तो मिसेस स्वराज भी रो रही हैं.


Sushma Swaraj

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सुषमा के रोने का और कोई फायदा होगा या नहीं यह तो बाद में पता चलेगा. फिलहाल तो अकूत खुशी से फूले न समाते अपने टीवी के सामने अकेले खुशी के आंसू गिराते (हमारे व्यंग्यानुमान के मुताबिक) नरेंद्र मोदी को रोने में साथ तो दे ही रही हैं. क्या पता इस साथ का कर्ज बाद में मोदी के ‘स्वराज-संकल्प’ को पूरा कर ही दे दें.

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