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नेता नही क्रांतिकारी चाहिए.....

Posted On: 16 Apr, 2013 Others में

मेरी कलम से !!कहते हैं जो गिरने से डरा नहीं करते, अक्सर वही आसमान को छु लिया करते हैं.........

Pradeep Kesarwani

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आज ऑफिस से आते हुए रास्ते मे एक आदमी को देखा वो आसमान की ओर घूरे जा रहा था, उस रास्ते से जा रहे लोग भी चाहे एक बार ही ऊपर की तरफ देखते लेकिन देखते जरूर, पैदल चल रहे लोग के अंदर ज्यादा उत्साह था ऊपर देखने का, उनके साथ जो लोग थे वो भी अपने साथी को ऊपर देखते देख खुद भी ऊपर देखने लगते, इसी तरह कईयो के सर आसमान की ओर ऊपर देखता देख कुछ लोग अपनी गाड़ी खड़ी करके ऊपर देखने लगते। ये जानने के लिए की सब लोग ऊपर देख क्यो रहे हैं सच कहू तो इस भीड़ मे मैंने भी अपना सर ऊपर गुमाया देखा तो कुछ नही था, फिर एक बात समझ मे आई हमे दूसरों के किए गए कार्य ज्यादा लुभावने लगते हैं, चाहे वो बिना वजह आसमान की ओर सर ही क्यो न गुमना हो, फिर और सोचा तो एक बात और समझ मे आई की उस दौरान एक बहाव (flow) उमड़ आया था इसलिए लोग ऊपर की तरफ देखने के लिए स्वतः उत्साहित होने लगे जहां पर लोगो के पास समय की इतनी कमी होती हैं वहाँ पर लोग अपना अमूल्य वक़्त सिर्फ इस जद्दोजहद को सुलझाने के लिए लगा देते की हो क्या रहा हैं, उस दौरान न जाने कितने सूझ बुझ वाले इंसान भी यही जानने की कोसिस कर रहे थे की आखिर हो क्या रहा हैं, फिर मैं घर पर आया और इस घटना पर और विश्लेषण किया तो एक और चीज़ समझ मे आई की हमको भले ही पता हो की ऊपर कुछ नही है लेकिन मन को शांत करने के लिए एक बार जरूर देखते हैं, वो कहते हैं न की पानी के तेज़ बहाव मे तो अच्छे -2 तैराक भी डूब जया करते हैं, फिर मैंने इस घटना को अपनी भारतीय राजनीति और न्यूज़ चैनल से जोड़ा तो एक नतीजा जो की मुझे चौका दिया वो सामने आया। जब श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी प्रधान मंत्री हुआ करते थे, उस समय बीजेपी का बोलबाला था हर तरफ कमल ही कमल दिखते थे। बीजेपी की उस समय चाँदी ही चाँदी थी न्यूज़ चैनल भी खूब इनके किए हुए कारनामो को नमक मिर्च लगा कर दिखा रही थी। फिर जब संसद कांड हुआ तो इसी मीडिया ने बीजेपी को खूब उछला सबने अपने तवे गरम किए इस घटना से…. उस समय इनहि कांग्रेसी को लाने की बात मीडिया ने बहुत ही ज़ोर शोर से साथ दिया। बस फिर क्या था एक अकेले इस मीडिया ने तो उसी आदमी की तरह जो खड़े होकर ऊपर देख रहा था और ये जानने के लिए की वो क्यो देख रहा हम भी उसी दौड़ मे लग गए…… आज भले ही बीजेपी का बोलबाला हो लेकिन जब 5 साल या फिर 10 साल बीत जाएंगे फिर से हम दूसरी पार्टी की गुहार करने लगेगे, और इन सब को शुरू करने के लिए मीडिया सबसे पहले आएगी। फिर उस समय कोई खुलासा मोदी को लेकर होगा, आडवानी को लेकर होगा। जैसा की आज राहुल और आदरणीय स्वः इन्दिरा गांधी जी के साथ हो रहा हैं। मुझे याद हैं उत्तर प्रदेश मे आज से तकरीबन 11-12 साल पहले इसी मीडिया ने सपा सरकार को इतना नीचे गिराया कभी आतंक के नाम पर तो कभी भ्रस्टाचर के नाम पर और बीएसपी (भारतीय समता पार्टी) को खूब नमक मिरचा लगाकर प्रस्तुत किया फिर तो मानो जैसे आँधी चल गई… बीएसपी के एक भूतपूर्व बिधायक जिनको राजनीति का समीकरण भी नही आता था उन्होने एक 25 साल से लगातार बने और चले आ रहे बिधायक को मुह पटक मारा और जीत गये ……. ये तो बस वो आंधी वो बहाव (flow) था की एक हम बस बह चले, और नतिजन शु-श्री मायावती जी मुख्य मंत्री बनी। फिर जब उनके 5 साल पूरे होने को आए फिर इसी मीडिया ने शु श्री मायावती जी नोटो की माला और भी ना जाने कितने इशू को लेकर उनको भला बुरा कहा और दुबारा एसपी को लाने के लिए ज़ोर देने लगी। अब फिर से वही दौर वही बहाव वही आंधी चल पड़ी सपा की तरफ जबकि ये मीडिया और पूरा उत्तर प्रदेश ये जनता था की सपा की सरकार मे आतंक होता हैं (मीडिया के द्वारा) फिर भी इस बार पुनः सपा की सरकार बनी। और हालांकि उत्तर प्रदेश से ही हूँ तो ये जनता हूँ की इस बार फिर से बीएसपी की सरकार आ जाएगी…….

अब जरा सेंट्रल गवर्नमेंट की बात करे तो वही तूफान उठ रहा हैं श्री मोदी जी को लेकर अब तो मीडिया की दौड़ मे फेसबूक भी भदचढ़कर भाग ले रहा हैं, जबकि हम नतीजा जानते हैं की आने वाले 5 साल या फिर 10 साल बाद क्या होगा। लेकिन कर भी क्या सकते हैं आंधी जो चली हैं बीजेपी और मोदी सरकार की अब तो सिर्फ बह चलना हैं सूखे पत्तों की तरह बीजेपी सरकार का दरवाजा खटखटाने की देश का विकास करो हम असमर्थ हैं। आज मे अपने दिल से पूछता हूँ की कौन आना चाहिए सरकार मे तो बस एक ही जवाब आता हैं, “हम” ना कोंग्रेस ना बीजेपी ना एसपी ना बीएसपी सत्ता मे हमको हम भारतीयो को आना चाहिए क्योकि हम ही उन्हे सब देते हैं और नीतिजा आप सब जानते हैं। लेकिन वही होगा जो होना हैं वही महंगाई, वही गरीबी, बस भूख ही रह जाएगी पेट मे, क्योकी जो पैसे देश के विकास मे लागने चाहिए वो करोड़ो रूपये यूंही व्यर्थ हो जाएंगे सिर्फ चुनाव और नेता खरीदने मे, पर हम तो बह चले हैं उस आसमान को देखने जहां कुछ नही हैं।

शायद मैंने अपनी पूरी बात ना लिखी हो,
लेकिन सवाल पूछना चाहता हूँ सभी भारतीयो से……

क्या हम अपना मत बिना सोचे सिर्फ हवा के झोके या फिर इस उम्मीद मे दे देते हैं की इस बार तो अपना बेड़ा पार करेगी ये पार्टी ?

क्या श्री मोदी जी भी सिर्फ हमारी उम्मीद का ही एक हिस्सा हैं?

क्या हर काँग्रेस का नेता भ्रास्टाचारी और देश को बर्बाद करने मे भागीदार हैं??

क्या हर वो नेता जो की बीजेपी मे हैं वो भ्रास्टाचारी नही हैं और देश के विकास ले लिए दिल से प्रयास करेगा?

अगर ये सच नहीं हैं तो हिंदुस्तान का विकास कैसे होगा ? और अगर ये सच तो कैसे हैं ?

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