गणतंत्र दिवस

मैं अपनी कार से सुबह-सुबह गणतंत्र दिवस समारोह में जाने के लिए निकला | रोजाना मैं इसी रास्ते से अपने ऑफिस जाता हूँ तो ट्रैफिक का मुझे अच्छी तरह पता था | इंडिया गेट अभी थोड़ी दूरी पर ही था की ट्रैफिक लाइट पर रेड सिग्नल होने पर मैंने अपनी गाड़ी रोकी | तभी एक अधनंगा सा कोई ७ साल की उमर का नन्हा सा बच्चा गाड़ी की खिड़की पर आकर मुझसे एक छोटा सा तिरंगा खरीदने की मिन्नतें करने लगा | दिल्ली की कडकडाती ठण्ड में वो नन्हा सा बालक मुझे रोज़ ही दिखता था लेकिन हमेशा भीख मांगते हुए और आज तिरंगा बेचते हुए देखा तो मन में अनायास ही एक सवाल आया की आज इसने अपना धंधा बदल कैसे दिया ? ये अपने मन का सवाल मैंने उस मासूम अधनंगे से, नन्हे से बालक से करने का सोचा |
मैंने बालक से पूछा , “अरे तू तो रोज़ भीख मांगता है तो ये आज तिरंगा कहाँ से बेचने लगा ? तुझे पता है क्या आज गणतंत्र दिवस है सो मौके का फायदा उठा रहा है ? ”
बालक बोला, “क्या करें साहब, रोज़ मेरा मालिक बोलता है ट्रैफिक लाइट पर पैसे मांगने को, लेकिन आज सुबह बोला की आज पैसे मत माँगना, आज ये तिरंगा बेचना, आज के दिन खूब कमाई होगी इनको बेचने से | लेकिन साहब ये गणतंत्र दिवस क्या होता है, मुझे भी बताओ ना | ”
बालक के इस सवाल ने मुझे कहीं गहरे तक सोचने को मजबूर कर दिया और मेरा हाथ अपने आप ही मोबाइल पर Child Helpline (1098) डायल करने लगा |

प्रशांत सिंह
(prashant.knit07@gmail.com)