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तू मेरे मन का साहस है

Posted On: 14 Jun, 2014 Others में

जज्बात मन केJust another Jagranjunction Blogs weblog

pratima

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चलते चलते थक जाती हूँ मन को विवश मै पाती हूँ
पर तू जो मेरे अंदर है तुझे देख के मै उठ जाती हूँ

विश्वास के टूटे धागों को फिर से जोड़ मै पाती हूँ
टूटे मन टूटे तन से मै फिर खुद को समझाती हूँ

कुछ बिखरे सपने है माना कुछ … उम्मीदे भी टूटी हूँ
तेरे ही अपनों ने शायद .. तेरी जागीरें लूटी ही

फिर भी चलना होगा तुझको ये जीवन जब तक बाकी है
सब पीछे छूट जाते है पथिक बस साहस सबका साथी है

टूटे मन टूटी आस लिए मै फिर से कदम बढाती हूँ |
आँखों में नमी लेकर भी मै मंद मंद मुस्काती हूँ

तू जो मेरे मन का साहस है….हाँ तू ही मेरा साथी है
तू साथ ना मेरा छोड़ना…ये साँसे जब तक बाकी है

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