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पीड़िता की पहचान क्यों छुपायी जाए?

Posted On: 4 Jan, 2013 Others में

मैं-- मालिन मन-बगिया कीमन-बगिया में भाव कभी कविता बन महके हैं, कभी क्षोभ-कंटक बन चुभे हैं, कभी चिंतन-नव पल्लव सम उगें..

priyankatripathidiksha

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बहुत प्रयास करने के बाद भी मैं यह समझने में असमर्थ हूँ की बलात्कार-पीडिता/पीड़ित की पहचान आखिर क्यों छुपायी जानी चाहिए?
क्या वह कोई माफिया, अपराधी अथवा सुरक्षा एजेंसी से सम्बंधित है?
या फिर उसने कोई लोकनिन्दित कार्य किया है, जो उसका नाम ख़राब होने के डर से उसकी पहचान छुपानी पड़े???
बलात्कार का सीधा-सीधा मतलब है – जबरदस्ती स्थापित किया गया शारीरिक सम्बन्ध |
यानी इस कृत्य में पीड़ित/पीडिता की कोई संलिप्तता नहीं होती |
ऐसे में यदि हम उसे भुक्तभोगी न मानकर भी विचार करें तो पायेंगे कि लज्जा उन्हें आनी चाहिए जो इस कृत्य को अंजाम देते हैं |
अतः अपनी पहचान छुपाने का जतन तो बलात्कारियों को करना चाहिए , न कि पीड़ित/पीडिता को |

यहाँ हम पीडिता के साथ-साथ पीड़ित शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह कोई जरुरी नहीं है कि कोई पुरुष किसी महिला के साथ ही
जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करे | आज के परिवर्तन क़ी इस उल्टी धारा में ऐसा भी हो सकता है कि कोई पुरुष किसी पुरुष के साथ
अथवा कोई महिला किसी पुरुष के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक सम्बन्ध बनाये |

बलात्कार निरोधी कोई भी कानून बनाते समय अथवा उसके अनुपालन के वक्त दोनों पहलुओं पर गौर किया जाना चाहिए |

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