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हेल्लो! नमस्कार ! आदाब ! सत-श्री-अकाल !

Posted On: 3 Jan, 2013 Others में

मैं-- मालिन मन-बगिया कीमन-बगिया में भाव कभी कविता बन महके हैं, कभी क्षोभ-कंटक बन चुभे हैं, कभी चिंतन-नव पल्लव सम उगें..

priyankatripathidiksha

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13 Comments

नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !
वर दे वीणावादिनी , वर दे ….
प्रिय स्वतंत्र रव, अमृत मंत्र नव भारत में भर दे $$$$
वर दे वीणावादिनी वर दे …
नव गति नव ताल छंद नव नवल कंठ जलद मंडरा रव
नव नभ के नव विहग-वृन्द को नव पर नव स्वर दे $$$$
वर दे वीणावादिनी , वर दे ….

हे मां इस नव वर्ष में मेरे आत्मीय जनों एवं मेरे मित्रों को तमाम बुराई रूपी अंधकार से बचाकर खुशहाली एवं ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले चलना !
हे मात्रीके! एक और फ़रियाद है तुमसे …
तेरी उस जीती-जागती मूरत के तन-मन को छलनी करने वाले उन ६ जंगली जानवरों को कानून से सख्त सजा दिलाने के लिए मेरे भारत देश की युवा-शक्ति को जाग्रत कर दे माँ $$$$$$$$$$$$

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