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अन्याय जीत गया हम हार गये ......

Posted On: 21 Dec, 2015 Others में

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प्रताप तिवारी

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अन्याय जीत गया हम हार गये ………

16 दिसम्बर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली के  चलती बस में मानवता की सारी हदों को पार करते हुए निर्भया के साथ  जो कांड हुआ था  उससे लोगो के रोंगटे खड़े हो गये । निर्भया कांड में न्याय की मांग के लिए सारा देश उबल पड़ा था ,सड़को से  सदन तक न्याय की मांग उठने लगी थी लेकिन 20 दिसम्बर 2015 को निर्भया कांड का एक दोषी बालिग नही होने की वजह से सधार गृह से रिहा कर किसी गेर सरकारी संस्था को सोंप दिया गया ।रिहाई की घटना ने जेसे तीन साल पहले के जख्म को फिर से हरा कर दिया । पुलिस जाँच के क्रम में यह बात सामने आई थी कि नाबालिग अपराधी की दरिंदगी की वजह से ही निर्भया को अपनी जान गवानी पड़ी थी ।पांच दोषियों में से एक ने आत्महत्या कर ली ,एक बालिग नही होने की वजह से रिहा कर दिया गया और बाकी अभी जेल की सलाखों के पीछे मोत की सजा का इंतजार कर रहे हैं । रविवार को रिहा नाबालिग घटना के समय 18 वर्ष व्यस्क  की उम्र सीमा से महज 6 महीने कम था जिसकी वजह से उस पर ना तो सामान्य अदालत में मुकदमा चल सकता था ना ही जेल में रखा जा सकता था । बालिग नही होने की वजह से उसपर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में मुकदमा चला और कानून में प्रस्तावित अधिकतम तीन साल तक सुधार गृह में रखने की सजा सुनाई गयी थी । तीन साल पूरा होने के बाद रविवार को  नाबालिग की रिहाई के बाद एक बार फिर लोग न्याय की मांग के लिए सडको पर उतर आये हैं और हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं कानूनविद के अनुसार कानून में उल्लेख सजा से अधिक अवधि की सजा अदालत नही सुना सकती ।
।निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल एक्ट में संसोधन को लेकर बात की गयी ।महिला आयोग ,गेर सरकारी संस्था ,बुद्धिजीवी तथा आम जन सभी ने एक स्वर में एक्ट में संसोधन की बात की तथा नाबालिग की तय उम्र सीमा 18 से घटाकर 16 किये जाने की मांग की ।बाल विकाश विभाग ने संसद में संसोधित बिल पेश कर दिया तथा लोकसभा में विधेयक पास होने के बाद आज भी राज्य सभा में विधेयक लटका हुआ है । संसोधित जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में सीधे तोर पर तो नाबालिग की उम्र नही घटाई गयी लेकिन गंभीर अपराध जेसे हत्या ,बलात्कार में शामिल 16 से 18 वर्ष के अवयस्क को दण्डित किया जा सकता है । क़ानूनी कवायद और राजनेताओ की निष्क्रियता की वजह से आज एक अपराधी कड़ी सजा से बाच गया अगर राज्य सभा में विधेयक पारित हो जाता तो न्याय पर अन्याय विजयी नही होता ।
कानून में अधिकतम 3 साल की सजा होने के कारन एक अपराधी जघन्य अपराध करने के बावजूद कड़ी सजा से बच गया ।अगर समय रहते संसोधित कानून राज्य सभा में पास नही हुआ तो निर्भया कांड जेसी बड़ी बड़ी गुनाहों में गुनाहगार बचते रहेंगे और आम जन सडको पर चिल्लाते रहेंगे ।

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